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महिला द्वारा, महिलाओं के लिए, महिला-कामसूत्र

सेक्स पर लिखी गई वात्स्यायन की पुस्तक कामसूत्र को एक लेखिका की चुनौती. स्त्रियों के नजरिए से इस कामोत्तेजक किताब को दोबारा लिखा गया है.

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कामसूत्र
कामसूत्र

वात्स्यायन के कामसूत्र में दी गई संभोग की 64 मुद्राओं में से स्त्रियों को सिर्फ चार के लिए राजी होना चाहिएः स्त्री के ऊपर पुरुष, पुरुष के ऊपर स्त्री, पुरुष की गोद में स्त्री तथा आमने-सामने खड़े स्त्री और पुरुष.

*स्त्रियों को अपने चेहरे और सेहत का ख्याल रखना चाहिए ताकि वे अपने पुरुष साथी की अपेक्षा उम्र में ज्‍यादा बड़ी नजर न आएं. इसके लिए उन्हें विवाह और बच्चे पैदा करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.

*स्त्रियों को विवाहित पुरुषों के साथ विशिष्ट परिस्थितियों में ही संभोग करने की इजाजत मिलनी चाहिएः शत्रुओं का विनाश करने में मदद के लिए, जिस पुरुष के साथ यौन संबंध स्थापित किया जा रहा हो उसकी संपत्ति हड़पने के लिए, अपने रहस्य छिपाए रखने के लिए, एक बेवफा पति से हिसाब चुकता करने और अपना काम निकलवाने के लिए.

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*ऐसा पुरुष ही चुनने योग्य है जो सक्षम हो, जानकार हो, कुरूप न हो, ज्‍यादा गरीब या रोगी न हो, अच्छा व्यवहार करता हो और जिसका चरित्र मजबूत हो. उसके अनावश्यक मित्र या बड़ा परिवार नहीं होना चाहिए.

ये सुझाव उन कुछ विलक्षण सुझावों में से हैं जो के.आर. इंदिरा नाम की लेखिका ने जल्द ही बाजार में आने वाली अपनी किताब स्त्रैण कामसूत्र में दिए हैं. यह किताब वात्स्यायन के कामसूत्र का स्त्रियों के नजरिए से पुनर्लेखन है. केरल के त्रिसूर जिले की रहने वाली कथा लेखिका 50 वर्षीया इंदिरा की यह पुस्तक डीसी बुक्स से जून के दूसरे हफ्ते में आएगी. उनके मुताबिक, यह किताब ''बिस्तर पर चलने वाली जंग जीतने के लिए'' महिलाओं की खातिर एक प्रैक्टिल गाइड की तरह होगी.Kaamsutra

मलयाली साहित्य में पोस्टग्रेजुएट और फिलहाल रेडियो एकांकी पर अपनी डॉक्टरल थीसिस लिख रहीं इंदिरा कहती हैं कि यौन सुख पर दुनिया की पहली वैज्ञानिक कृति ''पुरुष द्वारा, पुरुष के लिए, पुरुष पर आधारित है. और उस समय लिखी गई थी जब समाज में स्त्रियों की स्थिति बहुत ही दयनीय थी.'' केरल के इडुक्की जिले में आकाशवाणी के देवीकुलम स्टेशन में सीनियर प्रोग्राम एक्जीक्यूटिव के तौर पर काम करने वाली इंदिरा 2000 साल पुराने कामसूत्र के स्त्री विरोधी चरित्र को गिनवाती हैं और सबूत भी पेश करती हैं. वे कहती हैं, ''कामसूत्र के मुताबिक, एक पुरुष का 16 से 70 वर्ष की उम्र तक सक्रिय यौन जीवन हो सकता है. लेकिन स्त्रियों के यौन जीवन के बारे में यह पुस्तक क्या कहती है? एक शब्द भी नहीं.''

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इंदिरा इशारा करती हैं कि वात्स्यायन का मानना था कि महिलाएं संसर्ग (इंटरकोर्स) के माध्यम से चरम सुख प्राप्त करने में शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हैं क्योंकि पुरुषों के मुकाबले उनमें यौनेच्छा आठ गुना ज्‍यादा होती है.

किताब के लिए शोध करने के क्रम में इंदिरा ने समकालीन मलयाली महिलाओं के यौन व्यवहार का अध्ययन किया. इसके लिए उन्होंने मार्च, 2009 से जुलाई, 2011 के बीच केरल की 500 महिलाओं को एक प्रश्नावली भेजी. हालांकि उन्हें सिर्फ  100 महिलाओं से ही जवाब वापस मिले जिनमें अधिकांशतः पुरुषों के यौन वर्चस्व की पुष्टि की गई थी. मसलन, अधिकतर महिलाओं का मानना था कि उन्हें संभोग की पारंपरिक मुद्रा ही पसंद है यानी स्त्री के ऊपर पुरुष. इंदिरा कहती हैं, ''यह दिखाता है कि पितृसत्ता कितने गहरे तक अपनी पैठ बना चुकी है और उसके मूल्यों को महिलाओं ने भी आत्मसात कर लिया है. अधिकांश मलयाली महिलाएं जो देश के दूसरे िहस्सों की महिलाओं की बनिस्बत बेहतर स्थिति में हैं, वे भी अपना यौन व्यवहार किसी को बताना नहीं चाहतीं, गोपनीय तरीके से भी नहीं.'' इंदिरा तलाकशुदा हैं और उनका एक बेटा है जो कॉलेज में पढ़ता है.

इंदिरा बताती हैं कि कामसूत्र में 'वेश्याधिकरण' नाम के एक अध्याय के अतिरिक्त कहीं भी स्त्रियों के 'काम' की कोशिश करने तथा चरम सुख प्राप्त करने की बात नहीं कही गई है. इस अध्याय में स्त्री की भूमिका एक वेश्या की तरह बताई गई है जिसका कर्तव्य पुरुष को यौन सुख प्रदान करना है.

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स्त्रैण कामसूत्र पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए स्त्रियों को दो कारण गिनाती है.

पहला प्रेम, लेकिन स्त्रियों को हिदायत दी गई है कि वे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि पुरुष उनके प्रेम के लायक है भी या नहीं. प्रेम में अंधी न हो जाएं और फिर बेवफाई मिलने पर हैरत में न डूबें.

दूसरी वजह भौतिक है. इसमें स्त्रियों को चेताया गया है कि अपनी मनचाही चीज हासिल होने के बाद ही पुरुष के साथ हमबिस्तर होना चाहिए, उससे पहले नहीं. यह तय कर लें कि आप उसे पहले ही अपनी इच्छा बता दें.

इंदिरा कहती हैं कि कामसूत्र के कई प्रमुख सामाजिक नुस्खे अब भी भारतीय समाज में प्रचलन में हैं. इनमें एक यह है कि पुरुषों से उनकी स्त्रियों की उम्र कम होनी चाहिए उन्हें अपनी जाति में विवाह करना चाहिए; पुरुषों को दहेज लेना चाहिए; और विवाह के बाद पुरुषों को अपनी पत्नी को अपने घर ले जाना चाहिए.

इंदिरा की स्त्रैण कामसूत्र के मुताबिक, ये सारे नुस्खे स्त्रियों के हितों के खिलाफ हैं. इंदिरा कहती हैं, ''स्त्रियों को अपना साथी या पति ऐसे पुरुषों को बनाना चाहिए जो या तो हमउम्र हों या फिर कम उम्र के.''

स्त्रैण कामसूत्र कहता है कि स्त्री को शादी के बाद इस बात पर जोर देना चाहिए कि उसका पति उसके साथ उसी के घर में रहे. स्त्रैण कामसूत्र के मुताबिक, ''वधू को वर के अपरिचित घर और उसके अपरिचित रिश्तेदारों के यहां ले जाने से वह दबाव में आ जाती है और शुरू में ही आत्मसमर्पण कर देती है.''

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स्त्रियों के यौन अधिकारों पर इन तमाम क्रांतिकारी विचारों के बावजूद इंदिरा की स्त्रैण कामसूत्र स्वच्छंद यौन संबंधों और लिव-इन रिलेशनशिप का विरोध करती है. इंदिरा के मुताबिक, ये तथाकथित क्रांतिकारी तरीके बुनियादी तौर पर महिलाओं के हितों के खिलाफ जाते हैं और वेश्यावृत्ति से भी ज्‍यादा नुकसान पहुंचाते हैं. उनका दावा है, ''वेश्याओं की स्थिति परित्यक्ताओं के मुकाबले कहीं बेहतर होती है. विवाह में दहेज लाने के बावजूद महिलाओं को पतियों के हाथों उत्पीड़न झेलना पड़ता है, जबकि वेश्याएं पुरुषों को अपनी सेवाओं के बदले उनसे वैध भुगतान की मांग कर पाती हैं. जो पुरुष यह कहते हैं कि महिलाओं को स्वच्छंद यौन संबंधों का अधिकार होना चाहिए, वे उनका नुकसान कर रहे होते हैं. यह दरअसल बिना पैसे दिए उनके साथ सोने का एक बहाना भर होता है.''

इंदिरा लिव-इन रिलेशनशिप को इसलिए नाजायज मानती हैं क्योंकि इससे पुरुषों को बच्चों की जिम्मेदारी से पल्ला झड़ने का मौका मिलता है. वे कहती हैं, ''पुरुष कुछ समय तक इस संबंध का मजा लेते हैं. फिर अपनी मर्जी से अलग हो जाते हैं. पुरुष के छोड़कर जाने के बाद महिला को अकेले ही उन बच्चों का ख्याल रखना पड़ता है जो उनके संबंध से जन्मे होते हैं.'' उनका मानना है कि ऐसे रिश्ते में पुरुष के ऊपर भी बच्चे की जिम्मेदारी डालने का कोई तरीका होना चाहिए.

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