दिल्ली में सच में पक्षियों की लाशें आसमान से गिर रही हैं. ऐसा किसी खतरनाक बीमारी या हमले की वजह से नहीं हो रहा है बल्कि इसके पीछे इंसानी करतूत है.
दिल्ली का पारा 45 डिग्री तक पहुंच गया है. उस पर चलने वाली गर्म हवाएं इन छोटे-छोटे पक्षियों को मरने पर मजबूर कर दे रही है.
इंसानों से ज्यादा गर्मी का असर इन लाचार पक्षियों पर पड़ रहा है, वे बेहोश होकर आसमान से गिर रहे हैं.
सबसे दुखी करने वाली बात तो ये है कि इन पक्षियों की मौत पर किसी का ध्यान भी नहीं जा पा रहा है क्योंकि अधिकतर मरे हुए पक्षियों को बिल्ली व कुत्ते अपना भोजन बना ले रहे हैं.
वाइल्ड लाइफ एसओएस के को फाउंडर कार्तिक सत्यनारायण के मुताबिक, चील जैसे पक्षी बहुत ज्यादा ऊंचाई पर उड़ते हैं. ऐसे में तपते हुए सूरज की चपेट में जल्दी आ जाते हैं. कई बार शिकार या पानी की तलाश में उड़ते हुए ये बेहोश होकर गिर जाते हैं.
दुर्भाग्य से इंसानों ने इन पक्षियों की मुश्किलें और बढ़ाई हैं. पेड़ों को काटकर, वाहनों और फैक्ट्रियों के धुएं, ऊंची बिल्डिंग और हाइवेज बनाने से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में लगातार वृद्धि हुई है और हमारी इन हरकतों का नतीजा झेलना पड़ रहा है इन छोटे-छोटे पक्षियों को. कुल मिलाकर हमने इनके लिए बदतर हालात बना दिए हैं.
पर्यावरण एवं मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले 3 सालों (2014-16 ) में दिल्ली में विकास परियोजनाओं के लिए 15,000 पेड़ काटे गए.
उदाहरण के तौर पर, प्रगति मैदान में कन्वेंशन सेंटर के लिए नीम, पिलखन और पीपल समेत 1713 पेड़ काट दिए गए. 2002 के बाद से नेटवर्क बढ़ाने के लिए अकेले दिल्ली मेट्रो ने ही शहर के 50,000 पेड़ काट दिए.
छतरपुर में फौना पुलिस हेल्पलाइन अभिनव श्रीहान कहते हैं, 'सरकार को यह समझ ही नहीं है कि किसी भी तरह से पुराने पेड़ों की भरपाई नए पौधे लगाकर नहीं की जा सकती है. तोता या अन्य पक्षी पेड़ की खोह में अपना घर बनाते हैं जो नए पौधे में नहीं बनाया जा सकता है. मदर्स इंटरनैशनल स्कूल के पास एक पुराने नीम के पेड़ को कटवाया जा रहा था तो हमने अधिकारियों से शिकायत की थी लेकिन यहां कौन सुनने वाला है?'
13 मई को आए आंधी तूफान में भी कई पेड़ गिर गए थे जिससे कई पक्षियों के घोंसले उजड़ गए.
कबूतर जैसे पक्षी धूप से बचने के लिए लगातार घरों में दाखिल हो रहे हैं. कई पक्षी घरों के पंखों से टकराकर मौत के मुंह में भी चले जाते हैं.
हम लोगों को इन पक्षियों के लिए कम से कम एक कटोरे में पानी बाहर रख देना चाहिए और हो सके तो पेड़ जरूर लगाना चाहिए.
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