आजकल गलत खान-पान और खराब लाइफस्टाइल की वजह से डायबिटीज जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसे में लोग अपनी डाइट को लेकर नए-नए तरीके अपना रहे हैं. ऐसा ही कुछ MBBS की पढ़ाई कर रहीं 34 साल की आकृति गोयल ने किया. आकृति ने अपना एक्सपीरियंस सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे रोटी और चावल से दूरी बनाकर और दाल के चीले को डाइट में शामिल करके उन्होंने अपनी हेल्थ को पहले से काफी बेहतर बना लिया है.
इंडिया टुडे के मुताबिक, आकृति गोयल पहले इंजीनियर थीं. इसके बाद उन्होंने NEET में AIR 1,118 रैंक हासिल की और अब वह हिंदू राव अस्पताल में MBBS की पढ़ाई कर रही हैं.
पिछले 10 सालों से नहीं खाया रोटी-चावल
वीडियो में आकृति गोयल ने बताया कि वह पिछले लगभग 10 सालों से अपनी रोज की डाइट में रोटी और चावल नहीं खा रही हैं. हां, कभी-कभार वह इन्हें खा लेती हैं लेकिन उनके घर में आमतौर पर न आटा रहता है और न ही चावल. उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों से वह हर मील में रोटी की जगह मूंग दाल या किसी दूसरी दाल का चीला और सब्जी खाती हैं. इससे उनकी एनर्जी बनी रहती है और डाइजेशन भी बेहतर रहता है. इसके साथ ही वह हफ्ते में पांच दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी करती हैं.
34 साल की आकृति का कहना है कि वह काफी एक्टिव रहती हैं और उनकी एनर्जी उनके MBBS बैच के कई 20 साल के स्टूडेंट्स से भी ज्यादा है. उन्होंने बताया कि वह पिछले 10 सालों से लगातार एक्सरसाइज कर रही हैं और रोटी-चावल न खाने की वजह से उन्हें किसी तरह की एनर्जी की कमी महसूस नहीं हुई. उन्होंने साफ कहा कि रोटी और चावल न खाने की सबसे बड़ी वजह यह है कि उनके परिवार में ज्यादातर लोग डायबिटीज के मरीज हैं और वह खुद डायबिटीज नहीं चाहती.
आकृति कहती हैं कि भारत में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दूसरी क्रॉनिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. इसकी बड़ी वजह यंग एज में खान-पान को लेकर लापरवाही है. उनके मुताबिक, हम 30-40 की उम्र में अपनी हेल्थ पर ध्यान नहीं देते और फिर 50-60 की उम्र में डायबिटीज जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है. वो कहती हैं कि अगर समय रहते सही डाइट और लाइफस्टाइल अपनाई जाए तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है.
दाल का चीला खाने से क्या बदलाव आए?
आकृति ने बताया कि रोटी और चावल की जगह दाल का चीला खाने से उन्हें कई फायदे महसूस हुए. खाना खाने के बाद आलस नहीं आता, यह आसानी से पच जाता है और इसमें गेहूं के मुकाबले ज्यादा प्रोटीन होता है, जबकि चावल में लगभग कोई प्रोटीन नहीं होता. साथ ही इसमें गेहूं जितना ही फाइबर होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है, यानी ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ती.
अंत में आकृति कहती हैं कि वह किसी को रोटी या चावल पूरी तरह छोड़ने की सलाह नहीं दे रही हैं. लेकिन अगर किसी को डायबिटीज है या उसके परिवार में किसी को रहा है तो उन्हें अपने खान-पान और लाइफस्टाइल का पूरा ध्यान रखना चाहिए.
नोट: यह खबर सिर्फ जानकारी के लिए है. किसी भी तरह की डाइट या लाइफस्टाइल में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.