scorecardresearch
 

कथावाचक जया किशोरी ने बताया सक्सेस का सीक्रेट, बचपन में पिता से मिली थी सीख, आप भी अपनाएं ये मंत्र

प्रसिद्ध कथावाचिका और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने अपने पिता से मिली एक खास सलाह साझा की है। उन्होंने बताया कि 'बहता पानी निर्मला' की सीख ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ना सिखाया। जया ने उन लोगों को खास संदेश दिया है जो असफलताओं से हार मानकर रुक जाते हैं।

Advertisement
X
कथावाचक जया किशोरी हाल ही में मुंबई पहुंची थी. (PHOTO:ITG)
कथावाचक जया किशोरी हाल ही में मुंबई पहुंची थी. (PHOTO:ITG)

Jaya Kishori: कथावाचक जया किशोरी किसी ना किसी वजह से सुर्खियों में छाई रहती हैं, उनकी हर बात लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाती है. मोटिवेशनल स्‍पीकर और कथावाचिका के तौर पर उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है और सबसे खास बात यह है कि उन्होंने बेहद कम उम्र में ही अपना इतना नाम कर लिया है.

अपनी खूबसूरती के साथ-साथ अपने विचारों से भी कथावाचक लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं और यही वजह है कि उनकी बातों को मानने वालों की भी कमी नहीं है. लाखों की संख्या में उनके फॉलोअर्स है, ऐसे में उनकी बातों का प्रभाव भी बड़ी तादाद में लोगों पर पड़ता है. 

जया किशोरी के कार्यक्रम में भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं, वो भगवान कृष्ण की भक्त हैं और वो श्रीमद्भागवत कथा और कृष्ण की बाल लीलाओं को लोगों को सुनाती हैं. उनकी आवाज भी बहुत मीठी है और वो कई बार भक्ति गीत गाती भी नजर आती हैं. जया किशोरी के ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें उन्होंने अपने पिता की एक सलाह का जिक्र किया है. आइए जानते हैं कि कथावाचक को बचपन में उनके पिता से क्या खास सलाह मिली थी, जिसे वो अपनी जिंदगी में अपनाती आ रही है. 

Advertisement

पिता से बचपन में मिली खास सलाह 

जया किशोरी का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वो एक इंटरव्यू के दौरान बता रही हैं कि उन्हें उनके पिता ने बचपन में ही उनको एक सलाह दी थी. वो सलाह महज एक लाइन की थी, उनका कहना था 'बहता पानी निर्मला...'. कथावाचक ने बताया है कि जब तक पानी बहता रहता है, साफ रहता है. लेकिन अगर पानी एक जगह पर बहुत देर रुक गया तो उसमें गंदगी जमने लगती है. 

जया किशोरी
जया किशोरी

जया किशोरी ने लोगों दी ये सलाह 

अपने पिता की इस सलाह को याद करते हुए जया किशोरी ने सभी लोगों को सलाह दी है कि रुकना नहीं, बहते रहना, कुछ न, कुछ नया करते रहना. कथावाचक ने  यह सलाह खासतौर पर उन लोगों को दी है, जो एक ठोकर पाते ही रुक जाते हैं और आगे बढ़ने का विचार ही छोड़ देते हैं. लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी गलती होती है, क्योंकि जिंदगी कभी रुकती नहीं है. इसलिए इंसानों को भी कभी रुकना नहीं चाहिए. 


 


 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement