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Heart Attack Myths: क्या सीने में दर्द ही है हार्ट अटैक का इकलौता लक्षण? हैदराबाद के डॉक्टर से जानें पूरी सच्चाई

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अक्सर लोग इसे केवल सीने में दर्द से जोड़कर देखते हैं, लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि यह एक बड़ी गलतफहमी है.

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हार्ट अटैक कम उम्र के लोगों को भी आ रहा है. (Photo: AI Generated)
हार्ट अटैक कम उम्र के लोगों को भी आ रहा है. (Photo: AI Generated)

Heart attack Myths and Facts: भारत में हार्ट की बीमारियों के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले आए हैं जिसमें कम उम्र के लोगों को भी हार्ट अटैक आया. इतने केस देखने  उसे देखते हुए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है. अक्सर हम सीने में भारीपन या दर्द को ही हार्ट अटैक का संकेत मानते हैं लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह आधी-अधूरे जानकारी है. कई बार कोई छोटा सा दर्द या बेचैनी भी बड़े खतरे की घंटी हो सकती है. लाइफस्टाइल में बदलाव और स्ट्रेस ने अब युवाओं को भी इस रिस्क जोन में डाल दिया है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि हार्ट हेल्थ को लेकर कौन-कौन सी गलतफहमियां फैली हुई हैं जो खतरनाक साबित हो सकती हैं.

क्या सीने में दर्द होना जरूरी है?

हैदराबाद के अपोलो अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार का कहना है, सबसे बड़ा मिथक यही है कि हार्ट अटैक आने पर सीने में तेज दर्द होगा. लेकिन सच यह है कि कई लोगों को, खासकर महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों को, सीने में कोई दर्द महसूस नहीं होता. उन्हें केवल सांस फूलना, थकान, मतली या जबड़े और गर्दन में दर्द की शिकायत हो सकती है. इसे 'साइलेंट हार्ट अटैक' भी कहा जाता है इसलिए यदिआपको अचानक बहुत ज्यादा पसीना आए या घबराहट हो तो इसे मामूली समझकर इग्नोर न करें.

युवाओं को हार्ट अटैक का जोखिम नहीं?

डॉ. सुधीर का कहना है, लोग अक्सर सोचते हैं कि हार्ट अटैक केवल बुजुर्गों या 50 की उम्र पार कर चुके लोगों को आता है लेकिन यह पूरी तरह गलत है. आजकल 20 से 30 साल के युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले देखे जा रहे हैं. खराब डाइट, जिम में जरूरत से ज्यादा वर्कआउट, स्मोकिंग और नींद की कमी युवाओं के दिल को कमजोर बना रही है. फिटनेस का मतलब यह नहीं कि आपका दिल पूरी तरह सुरक्षित है, रेगुलर चेकअप हर उम्र में जरूरी है.

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कोलेस्ट्रॉल और दवाइयां लेना सही है

एक और मिथक यह है कि अगर आप फिट दिखते हैं तो आपका कोलेस्ट्रॉल लेवल ठीक ही होगा. डॉ. सुधीर बताते हैं कि पतले लोगों का कोलेस्ट्रॉल भी हाई हो सकता है जो जेनेटिक कारणों पर निर्भर करता है. साथ ही कई लोग लक्षण ठीक होते ही दवाइयां बंद कर देते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है. डॉक्टर की सलाह के बिना हार्ट की दवाएं कभी न छोड़ें. याद रखें, हार्ट के मामले में छोटी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है.

फैमिली हिस्ट्री होना जरूरी है

फैमिली हिस्ट्री एक बड़ा रिस्क फैक्टर जरूर है, लेकिन यह इकलौता कारण नहीं है. आपकी लाइफस्टाइल जैसे आप क्या खाते हैं, कितनी एक्सरसाइज करते हैं और स्ट्रेस लेवल कैसा है इसका आपके दिल पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है. आज के दौर में बिना किसी फैमिली हिस्ट्री के भी लोग हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं.

पसीना आना सिर्फ गर्मी या मेहनत का नतीजा है

अगर आप बिना किसी भारी काम के या ठंडे कमरे में बैठे हुए भी अचानक पसीने से तर-बतर हो जाते हैं तो यह हार्ट अटैक का एक गंभीर संकेत हो सकता है. इसे 'कोल्ड स्वेट' कहते हैं. इसे कभी भी केवल मौसम का असर मानकर नजरअंदाज न करें और न ये सोचें कि आपको पसीना सिर्फ गर्मी के कारण आ रहा है.

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