कोरोना से ठीक होने के बाद कुछ लोगों में इसके साइड इफेक्ट्स भी देखे जा रहे हैं. COVID-19 से ठीक होने के बार पांच मरीजों के गॉल ब्लैडर में गैंग्रीन (Gangrene) की समस्या देखी गई. सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर्स का कहना है कि ये भारत में इस तरह का पहला मामला है. जून और अगस्त के बीच इन पांचों मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा चुका है.
अस्पताल में इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर, गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी एंड पैनक्रिएटिकोबाइलरी साइंसेज के चेयरमैन डॉक्टर अनिल अरोड़ा ने कहा कि हमने जून और अगस्त के बीच ऐसे पांच मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया है. कोरोना से ठीक होने के बाद इन मरीजों के गॉल ब्लैडर में पथरी के बिना ही गंभीर सूजन हो गई थी और इसकी वजह से उनमें गैंग्रीन हो गया. हमें इनका तुरंत ऑपरेशन करना पड़ा.
डॉक्टर अरोड़ा का कहना है कि यह पहली बार है जब कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय की थैली के गैंग्रीन के मामले सामने आए हैं. इन पांचों मरीजों में 4 पुरुष और एक महिला है और इन सभी की उम्र 37 से 75 साल के बीच है. गैंग्रीन एक बीमारी है जिसमें इंफेक्शन या ब्लड फ्लो कम होने की वजह से शरीर के ऊतक (Tissue) नष्ट होने लगते हैं.
इन सभी मरीजों ने बुखार, पेट के दाहिने हिस्से में दर्द और उल्टी जैसे लक्षण (Symptoms of gangrene) महसूस किए थे. इनमें से दो डायबिटीज के मरीज थे जबकि एक को दिल की बीमारी थी. इनमें से तीन मरीजों ने कोरोना के इलाज में स्टेरॉयड लिए थे. अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन के जरिए इस बीमारी के बारे में पता लगाया जा सका. इन सभी मरीजों की सफलतापूर्वक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई.
डॉक्टर अरोड़ा के अनुसार गॉल ब्लैडर की थैली में गैंग्रीन अकलकुलस कोलेसिस्टिटिस एक गंभीर स्थिति है जो जो 30 से 60 फीसदी तक मौत की संभावना को बढ़ा देती है. ये आमतौर डायबिटीज के मरीजो, HIV संक्रमण, वैस्कुलर डिजीज, लंबे समय तक भूखे रहने वालों और सेप्सिस के मरीजों में देखी जाती है.