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साइंस न्यूज़

स्पर्म का शिकार करने वाली एंटीबॉडीज से नई गर्भ निरोधक दवा बनाने की तैयारी

Sperm Hunting Antibodies
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निकट भविष्य में संभव है कि कंडोम, कॉपर-टी या अन्य माध्यमों की जरूरत न पड़े. शरीर में मिलने वाले एक खास तरह के एंटीबॉडी के जरिए एक ऐसी दवा बनाने की तैयारी है जो अनचाहे गर्भ से छुटकारा दिलाएगा. ये एंटीबॉडीज नर और मादा दोनों में होता है. बस मात्रा कम-ज्यादा होती है. यह स्टडी हाल ही में साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित भी हुई है. (फोटोः गेटी)

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ये एंटीबॉडीज शरीर के अनचाहे हिस्से में स्पर्म को प्रवेश करने से रोकते हैं. जबकि, मादाओं में ये एंटीबॉडीज गर्भधारण की प्रक्रिया में भी काम करते हैं. क्योंकि हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम स्पर्म को एक घुसपैठिये की तरह देखता है. उसे शरीर में आने से एंटाबॉडी के जरिए रोकता है.  (फोटोः गेटी)

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शोधकर्ताओं ने उन महिलाओं के प्रजनन नाल से भी एंटीबॉडी निकाली जो बांझपन समस्या से पीड़ित है. आइए समझते हैं कि किसी तरह से बनाई जाएगी ऐसी गर्भनिरोधक दवा जो शरीर के अंदर मौजूद एंटीबॉडी के उपयोग से बनेगी. नई गर्भनिरोधक दवा बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने कुछ एक्सट्रा एंटीजन बांधने वाले फ्रैगमेंट्स का भी उपयोग किया है. इससे स्पर्म का शिकार करने वाली एंटीबॉडीज की क्षमता 10 गुना ज्यादा बढ़ गई.  (फोटोः गेटी)

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शोधकर्ताओं ने इस एंटीबॉडी का प्रयोग मादा भेड़ की योनि में किया गया. जिसकी वजह से मादा भेड़ के शरीर में स्पर्म को रोकने वाले एंटीबॉडी 99.9 फीसदी कारगर साबित हुए. वैज्ञानिक कहते हैं कि हॉर्मोन आधारित जन्म नियंत्रण दुनिया में काफी ज्यादा कारगर साबित हो रहा है, लेकिन उसके साइड इफेक्ट इतने ज्यादा है कि उससे लोगों को दिक्कत हो रही है. जैसे- उलटी आना, सर भारी होना, डकार आना, मूड बदलना, माइग्रेन और गंभीर स्थिति में खून के थक्के जमना. हॉर्मोन आधारित जन्म नियंत्रण के लिए लोग एक खास तरह की गोली खाते हैं.  (फोटोः गेटी)

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शोधकर्ताओं ने कहा कि हमारा प्रयोग अभी सीधे तौर पर यह बता पाने में सक्षम नहीं है कि इस तरीके के इलाज से 100 फीसदी गर्भाधान रुक जाएगा. लेकिन यह एक ताकतवर गर्भनिरोधक साबित हो सकता है. वैज्ञानिकों ने बताया कि यह तकनीक किसी भी समय तेजी से बाजार में आ सकती है. क्योंकि यह सुरक्षित है.  (फोटोः गेटी)

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यह इंसानों और उन जीवों के शरीर में मौजूद ऐसे तत्व से बनाया गया है जो शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता. हालांकि अभी इसका प्रयोग सिर्फ भेड़ पर किया गया है. इंसानों में इसका क्लीनिकल ट्रायल बचा हुआ है. वैज्ञानिकों का सिर्फ यही एक समूह एंटीबॉडी आधारित गर्भनिरोधक बनाने का प्रयास नहीं कर रहा है.  (फोटोः गेटी)

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इसके अलावा अमेरिकी वैज्ञानिकों ने भी गर्भनिरोधक प्रक्रिया से संबंधित एक नए प्रकार के कॉन्ट्रसेप्टिव का प्रयोग भी हाल ही में किया था. जहां उन्होंने एंटीबॉडीज के जरिए स्पर्म को एक जगह जमा करने की तकनीक विकसित की थी. एक जगह पर सारे स्पर्म जमा होंगे तो उनकी प्रजनन क्षमता खत्म हो जाती है. वो निष्क्रिय हो जाते हैं.  (फोटोः गेटी)

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आपको बता दें कि सभी जीवों के नर और मादा के शरीर में स्पर्म एंटीबॉडी मौजूद होते हैं. जिसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि पुरुषों में ये एंटीबॉडी स्पर्म को शरीर के अन्य अंगों में प्रवेश करने से रोकते हैं.  मादाओं में यह स्पर्म को शरीर के अंदर आया हुआ एक घुसपैठिया समझते हैं. इसलिए उनके शरीर से निकले एंटीबॉडी स्पर्म को मारते या रोकते हैं. जो सबसे सेहतमंद और स्वस्थ स्पर्म होता है, उसके मादा अंडकोष से मिलने के बाद नए जीवन की शुरुआत होती है.  (फोटोः गेटी)