
Bryan Johnson New Longevity Workout: हर कोई हेल्दी और फिट लाइफ जीना चाहते है और सभी चाहते हैं कि उनकी उम्र लंबी हो. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो आपके लिए अमेरिकी अरबपति टेक एंटरप्रेन्योर और बायोहैकर ब्रायन जॉनसन (Bryan Johnson) ने एक सीक्रेट रिवील किया है. ब्रायन अपने उम्र घटाने के कारण अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. उनको लेकर यह कहा जाता है कि वो 2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 17 करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च हर साल हेल्थ, एंटी-एजिंग लाइफस्टाइल पर करते हैं.
बॉडी बनाना अब फिटनेस नहीं है, बल्कि लंबे समय तक हेल्दी और एक्टिव रहना है, इस बात को ब्रायन जॉनसन भी मानते हैं, उनका कहना है कि 2026 का लक्ष्य मसल्स बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी फिटनेस रूटीन अपनाना है जो उम्र बढ़ाए और बीमारियों का खतरा घटाए. सही तरह की एक्सरसाइज से समय से पहले मौत का जोखिम 40% से ज्यादा तक कम हो सकता है.
ब्रायन जॉनसन ने हाल में ही इंस्टाग्राम पर शेयर वीडियो में कुछ टिप्स शेयर किए हैं, उनका मानना है कि हफ्ते में 6 दिन एक्सरसाइज सबसे बेहतर होता है. मगर इसमें तीन दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग यानी वेट या बॉडीवेट एक्सरसाइज और तीन दिन कार्डियो यानी चलना, साइक्लिंग, जॉगिंग करनी चाहिए.
कार्डियो में हफ्ते भर में करीब 150 मिनट हल्की की एक्सरसाइज और 75 मिनट तेज या हाई-इंटेंसिटी कार्डियो करना फायदेमंद है. इसके साथ ही स्ट्रेचिंग, बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी एक्सरसाइज भी जरूरी हैं, ताकि शरीर लचीला रहे और चोट का खतरा कम हो.
क्या देर रात एक्सरसाइज करना सही?
जॉनसन ने लोगों को खास सलाह देते हुए कहा कि देर रात एक्सरसाइज न करें, क्योंकि इससे नींद और रिकवरी दोनों पर ही असर पड़ता है. सबसे जरूरी बात नियमितता. रोज थोड़ा-थोड़ा करना, कभी-कभार ज्यादा करने से बेहतर होता है. कुछ लोग पूरे हफ्ते एक्सरसाइज नहीं करते हैं, लेकिन दिन हद से ज्यादा करने लगते हैं, जो पूरी तरह से गलत है.
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर ऑर्थोपेडिक डॉ. राजू वैश्य के मुताबिक, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सिर्फ दिखने के लिए नहीं, बल्कि हड्डियों, जोड़ों और मसल्स की सेफ्टी के लिए बहुत जरूरी है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर होती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है. स्क्वाट, लंज और वेट उठाने जैसी एक्सरसाइज हड्डियों की मजबूती बढ़ाती हैं.
मजबूत मसल्स जोड़ों पर दबाव कम करती हैं और गठिया जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में काम आती है. यही वजह है कि चोट के बाद मरीजों को सिर्फ कार्डियो नहीं, बल्कि रेजिस्टेंस एक्सरसाइज भी कराई जाती हैं.

डॉ. वैश्य बताते हैं कि कार्डियो दिल, फेफड़ों और स्टैमिना के लिए जरूरी है. लेकिन अगर सिर्फ कार्डियो किया जाए और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न हो, तो जोड़ों में दर्द और ओवरयूज इंजरी का खतरा बढ़ सकता है.