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'पूकी बाबा' क्यों कहलाते हैं अनिरुद्धाचार्य महाराज? खुद बताया इसके पीछे का दिलचस्प राज

इंटरनेट पर 'पूकी बाबा' के नाम से मशहूर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपनी इस नई पहचान और निजी जीवन पर खुलकर बात की है. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि लोग उन्हें इस नाम से क्यों बुलाते हैं.

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कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज के वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं. (Photo: Instagram/Aniruddhacharya Maharaj)
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज के वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं. (Photo: Instagram/Aniruddhacharya Maharaj)

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज अक्सर अपने वीडियोज के कारण सोशल मीडिया पर छाए हुए रहते हैं. उनकी कथाओं के क्लिप्स और उनके बोलने का अंदाज युवाओं के बीच इतना चर्चित है कि इंटरनेट की दुनिया ने उन्हें एक नया नाम दे दिया है 'पूकी बाबा'. हर तरफ उनके मीम्स और वीडियो वायरल होते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाराज जी को इस नाम से क्यों पुकारा जाता है? हाल ही में उन्होंने न केवल इस नाम का कारण बताया बल्कि प्यार से जुड़े सवालों पर भी जवाब दिया.

क्यों पड़ा 'पूकी बाबा' नाम?

'पूकी' शब्द का इस्तेमाल अक्सर किसी ऐसी चीज या व्यक्ति के लिए किया जाता है जो बहुत 'क्यूट' या प्यारा हो. अनिरुद्धाचार्य महाराज से पूछा गया कि उन्हें पूकी बाबा क्यों कहा जाता है तो उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया, लोग उन्हें 'पूकी बाबा' इसलिए कहते हैं क्योंकि वह धर्म और अध्यात्म जैसी गंभीर बातें भी बहुत सरल तरीके से, हंसते-हंसाते लोगों को समझा देते हैं.

क्या महाराज को कभी प्यार हुआ?

अनिरुद्धाचार्य महाराज से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी किसी से प्यार किया है, तो उनका जवाब बहुत ही आध्यात्मिक और स्पष्ट था. उन्होंने कहा कि वह अपने कार्य और भगवान से प्रेम करते हैं.

वह अपनी जिम्मेदारियों को पूरी शिद्दत से निभाते हैं, चाहे वह गौ-सेवा हो या समाज सेवा. उनके लिए सेवा ही प्रेम का दूसरा रूप है. प्रेम और जिम्मेदारी 2 अलग-अलग चीजें हैं जिन्हें साथ लेकर चलना जरूरी है.

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प्यार और जिम्मेदारी पर महाराज की सलाह

अनिरुद्धाचार्य महाराज ने लोगों को नसीहत देते हुए कहा कि जीवन में रिश्तों का सम्मान करना सबसे ऊपर है. उन्होंने कहा कि अपनी पत्नी, माता-पिता और परिवार का सम्मान करना आपकी जिम्मेदारी है और इसे पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए.

रही बात प्यार की, तो महाराज का मानना है कि सच्चा प्रेम केवल भगवान से ही करना चाहिए. संसार में रहकर अपनी जिम्मेदारियां पूरी करते रहिए और अपना हृदय ईश्वर की भक्ति में लगाए रखिए. उनके अनुसार, यही जीवन जीने का सही तरीका है.

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