Minissha Lamba Vegetarian Story: बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में जहां फिटनेस ट्रेंड्स, डाइट फड्स और लाइफस्टाइल एक्सपेरिमेंट्स आम बात हैं, फिट और यंग रहने के लिए सेलेब्स कई तरह की डाइट फॉलो करते हैं. इस बीच रणबीर कपूर की फिल्म 'बचना ऐ हसीनो' में नजर आने वाली एक्ट्रेस मिनिषा लांबा पिछले कई साल से एक जैसी डाइट ले रही हैं. बिग बॉस 8 का हिस्सा रह चुकीं मिनिषा लंबे समय से फिल्मी दुनिया से दूर हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वो काफी एक्टिव रहती हैं. उनकी बिकिनी फोटोज अक्सर लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचती हैं, 40 साल की उम्र में भी मिनिषा आज भी काफी फिट हैं.
मिनिषा ने अपनी लेटेस्ट इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया है कि उन्होंने पिछले 5 साल से नॉनवेज फूड नहीं खाया है. उन्होंने एक इमोशनल पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने दिल खोलकर बताया कि कैसे यह बदलाव उनके शरीर से ज्यादा उनके मन और सोच को बदल गया.
मिनिषा लांबा ने बताया कि उन्होंने इस जर्नी को महज 1 महीने के लिए ट्रायल पर शुरू किया था. मगर जब उनका एक महीना आसानी से निकल गया तो उन्होंने इसे 6 हफ्ते कर लिया और फिर 2 महीने. ऐसे ही देखते-देखते यह सफर 5 साल तक पहुंच गया. उन्होंने कहा कि यह तरीका न सिर्फ आसान था, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें मजबूत बनाता गया. उनके लिए यह जर्नी सिर्फ खाने की प्लेट का बदलना नहीं था, बल्कि अपनी आत्मा की आवाज सुनना, गिल्ट से फ्री होना और मेंटल पीस की तलाश की है.
उन्होंने माना कि यह फैसला एक झटके में नहीं हुआ, बल्कि छोटे-छोटे कदमों से शुरू होकर आज उनके लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है. उनका मानना है कि जब इंसान अपने मूल्यों के साथ जीने लगता है, तभी असली सुकून मिलता है.
नॉनवेज छोड़ने और शाकाहारी खाने से मिनिषा के अंदर क्या बदलाव आया.
मिनिषा लांबा के अनुसार, शाकाहारी बनने के बाद उनके जीवन में सबसे बड़ा बदलाव मेंटल पीस के रूप में आया. उन्होंने बताया कि मांस खाते समय उनके भीतर कहीं न कहीं एक अनकहा गिल्ट रहता था. जानवरों के दर्द के बारे में सोचना उन्हें भीतर से बेचैन करता था. जैसे ही उन्होंने नॉनवेज छोड़ने का फैसला लिया, वह गिल्ट धीरे-धीरे खत्म होने लगा और दिल को गहरी शांति मिलने लगी.
एक्ट्रेस ने ईमानदारी से माना कि वह सालों से खुद को यह समझाने की कोशिश कर रही थीं कि सब कुछ नॉर्मल है, लेकिन अंदर की आवाज कुछ और ही कहती थी. उन्होंने लिखा, 'अब खुद को समझाने का वक्त खत्म हो गया था, मुझे अपनी आत्मा की सुननी थी.' शाकाहार अपनाने के बाद उन्हें लगा कि अब वह अपने विचारों, मूल्यों और संवेदनाओं के ज्यादा करीब हैं.
शारीरिक तौर पर भी इस बदलाव ने उन्हें पॉजिटिव अनुभव दिया. शाकाहारी खाना आसानी से डाइजेस्ट हो जाता है, जिससे शरीर में भारीपन नहीं रहता और एनर्जी बनी रहती है. मिनिषा के मुताबिक, इस लाइफस्टाइल ने उनके पूरे सिस्टम को ट्रांसफॉर्म कर दिया है. वह खुद को ज्यादा एक्टिव, हल्का और बैलेंस्ड महसूस करती हैं.