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लाइफस्टाइल न्यूज़

Tuberculosis: कोरोना से रिकवर मरीज आ रहे टीबी की चपेट में, MP में मिले कई केस

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ब्लैक फंगस के बाद कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के लिए अब टीबी नई मुसीबत खड़ी कर रहा है. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जो लोग इस घातक वायरस से संक्रमित हो गए थे, लेकिन किसी तरह इसे हराने में कामयाब रहे, अब उनमें सफेद प्लेग यानी टीबी का खतरा बढ़ता जा रहा है.

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पूरे मध्य प्रदेश में टीबी के मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी गई है. भोपाल के हमीदिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ लोकेंद्र दवे के अनुसार, जो लोग हाल ही में कोरोना पॉजिटिव हुए थे, उनमें ज्यादातर मरीजों में टीबी के लक्षण पाए गए हैं.

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हमीदिया अस्पताल में प्रतिदिन एक दर्जन के लगभग मरीज टीबी से संक्रमित पाए जा रहे हैं. भोपाल के सरकारी टीबी अस्पताल में पिछले 15 दिनों में भर्ती हुए ज्यादातर मरीज कोरोना पॉजिटिव थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन मरीजों में 15 वर्षीय विभा नाम की लड़की, जो दूसरी लहर के दौरान कोरोना पॉजिटिव हुई थी, अब टीबी से संक्रमित पाई गई है.

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विभा की मां का कहना है कि परिवार में इससे पहले किसी को भी टीबी की बीमारी नहीं हुई है. उन्होंने कहा, मेरी बेटी को कोरोना हुआ था और रेमडेसिविर सहित पूर्व निर्धारित दवाओं की मदद से हम उसे बचाने में कामयाब रहे. लेकिन अब विभा टीबी जैसी बीमारी के लिए पॉजिटिव पाई गई है.

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विभा का इलाज कर रहे डॉक्टर आकाश मंगोले के मुताबिक, इस वायरस से ठीक हो चुके कई कोरोना संक्रमित मरीज अब टीबी से संक्रमित पाए गए हैं. मंगोले ने कहा, टीबी से संक्रमित हुए कई नए मरीज, कोरोना से ठीक हो चुके हैं. पर उनके थूक का परीक्षण करने पर टीबी की पुष्टि की जा रही है जो निश्चित रूप से गंभीर विषय है.

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मध्य प्रदेश की राज्य सरकार ने अभी तक ऐसा कोई अध्ययन या सर्वेक्षण नहीं किया है, जो ये बता सके कि टीबी से संक्रमित हुए कोरोना मरीजों की सही संख्या क्या है. डॉ दवे ने कहा कि दूसरी लहर के दौरान कोरोना काफी व्यापक रूप से फैल गया था. ऐसे में विभिन्न तरह की बीमारियों से पीड़ित ज्यादातर लोग अस्पतालों में जाने से हिचकिचा रहे थे. क्योंकि वे जानते थे कि अस्पताल जाने के बाद वे पहले से टीबी से पीड़ित मरीजों के संपर्क में आ सकते हैं. डॉक्टर्स का कहना है कि टीबी के लक्षण दिखने पर इसका टेस्ट जरूर कराएं.

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हैदराबाद के यशोदा अस्पतालों के सलाहकार इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ गूई कृष्णा यसलापति के अनुसार, कोरोना की दूसरी लहर ने पोस्ट कोविड जटिलताओं के नाम पर फंगल इंफेक्शन और टीबी जैसी कई घातक बीमारियों ने लोगों को बहुत क्षति पहुंचाई है. लेकिन अच्छी बात ये है कि टीबी के लक्षणों का पता लगाकर मरीजों को ठीक किया जा रहा है.

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थूक की जांच करने से बड़ी संख्या में टीबी से संक्रमित मरीजों का पता लगाया जा सकता है. यशोदा अस्पताल, हैदराबाद में मरीजों के कुछ समूहों में, ब्रोन्कोस्कोपी द्वारा टीबी (ड्रग रेजिस्टेंट टीबी) बनाम फंगस की जांच के लिए एक विशेष तकनीक का उपयोग किया जाता है. ये एक एंडोस्कोपिक तकनीक है, जिससे बीमारी का एग्जैक्ट पता लगाया जा सकता है. डॉ गोपी कृष्णा कहते हैं कि फंगल इंफेक्शन की तुलना में टीबी से पीड़ित ये मरीज ज्यादा आसानी से रिकवर हो रहे हैं.

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टीबी के सामान्य लक्षणों में कफ के साथ खांसी, बलगम में खून आना, वजन घटना, बुखार रहना, ज्यादा पसीना आना आदि शामिल हैं. इस तरह के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से तुरंत जांच कराएं.

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टीबी से संक्रमित पाए जाने पर डॉक्टर की सलाह लें. इधर-उधर ना थूकें. पौष्टिक खाना खाएं. हेल्दी डाइट लें. योग करें. नशीले पदार्थों के सेवन से बचें. शराब, सिगरेट आदि के सेवन से बचें.

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