गुजरात का खाना अपने खट्टे-मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है. ढोकला, खमण, खांडवी, थेपला, फाफड़ा-जलेबी, उंधियू, खाखरा, और दाल ढोकली जैसी कई चीजें गुजरात की गलियों से निकलकर आज पूरे भारत में काफी चाव से खाई जाती हैं. ऐसे ही रोटी जैसी चीज का नाम है 'थेपला'. मेथी की हल्की कड़वाहट और दही की खटास को जब गेहूं के आटे और बेसन के साथ मिलाया जाता है तो ये काफी अच्छा स्वाद देता है. इसे अचार, दही या फिर गरमा-गरम चाय के साथ खाया जाता है जो काफी टेस्टी होता है.
अधिकतर लोग शिकायत करते हैं कि उनका थेपला पापड़ जैसा कड़क होता है लेकिन यदि कोई गुजराती इसे बनाए तो वो काफी मुलायम होता है. दरअसल, गुजराती लोग थेपला जो बनाते हैं उसके पीछे एक साइंस है. थेपला सॉफ्ट बनाने का सबसे सही तरीका आटे को गूंथने और मसालों के सही अनुपात का है. थेपला बनाने के लिए आपको बारीक कटी हुई ताजी मेथी, गेहूं का आटा और थोड़ा सा बेसन चाहिए. बेसन इसमें वह खास सोंधापन जोड़ता है जो इसे साधारण पराठे से अलग बनाता है.
थेपला बनाने के लिए गेहूं के आटे और बेसन को अच्छी तरह से मिक्स कर लें. फिर उसमें बारीक कटी मेथी, अदरक का पेस्ट, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, नमक, अजवाइन डालकर मिलाएं. फिर उसे दही की मदद से गूंथ लें.
अगर जरूरत हो तभी पानी का इस्तेमाल करें. आटा न तो बहुत सख्त होना चाहिए और न ही बहुत ज्यादा नरम. आटा गूंथने के बाद उस पर थोड़ा सा तेल लगाकर 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें. यह स्टेप सबसे जरूरी है क्योंकि इसी दौरान आटा सेट होता है जिससे बेलते समय थेपला फटेगा नहीं और तवे पर डालने के बाद भी मुलायम रहेगा.
थेपले को हमेशा पतला बेला जाता है. इसे तवे पर डालते समय आंच मध्यम से तेज रखें. धीमी आंच पर थेपला सूख जाता है और कड़क हो जाता है. दोनों तरफ हल्का तेल लगाकर इसे तब तक सेकें जब तक कि उस पर सुनहरे भूरे रंग के धब्बे न आ जाएं.
इसे बहुत ज्यादा दबा-दबाकर न सेकें. जैसे ही यह सिक जाए, इसे तुरंत किसी कपड़े या कैसरोल में रखें ताकि इसकी भाप इसे और भी ज्यादा सॉफ्ट बना दे.
थेपले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 3 से 4 दिनों तक आराम से चलता है. अगर आप कहीं बाहर जा रहे हैं तो इसे एल्युमिनियम फॉयल की जगह सूती कपड़े में लपेटकर रखें. इसे आप आम के छुंदे (मुरब्बा) या फिर हरी मिर्च के अचार के साथ सर्व कर सकते हैं.