सर्दियों में अक्सर हम सोच लेते हैं कि मौसम ठंडा है, इसलिए पका हुआ खाना और बाकी चीजें अक्सर बाहर ही छोड़ देते हैं कि खराब नहीं होगा. खाने के साथ-साथ लोग गूंथा हुआ आटा भी बाहर छोड़ देते हैं, और सोचते हैं कि गूंथा हुआ आटा बाहर रखा रह भी जाए तो इस मौसम में खराब नहीं होगा. कई बार तो लोग आलस के चक्कर में भी आटे को रसोई में भी छोड़ देते हैं और वो अगली सुबह तक वहां पर ही रह जाता है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सर्दियों में गूंथा आटा बाहर छोड़ना सही है, क्या वो खराब नहीं होता है और उससे रोटियां बनानी चाहिए.
आमतौर पर जो महिलाएं घर पर आटा गूंथ कर बाहर छोड़ जाती हैं, उनके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि जो वो कर रही हैं, उसका नतीजा क्या है. किचन एक्सपर्ट्स और फूड साइंस के अनुसार, गूंथे हुए आटे को ठंड में बाहर छोड़ना बिल्कुल सही नहीं है.
उनका मानना है कि भले ही ठंड में चीजें काफी देर तक खराब नहीं होत हैं, मगर इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप आटे को पूरी रात रसोई के तापमान पर छोड़ सकते हैं. सबसे पहली बात तो ये है कि गूंथे आटे में जल्दी बैक्टीरिया लगते हैं.
रसोई के तापमान में आटा रखना सही नहीं है, भले ही सर्दी में वो कम होता है. खासतौर पर खाना पकाते समय तो रसोई का तापमान बैक्टीरिया को जन्म लेने के लिए परफेक्ट समय हो सकता है.
गूंथे हुए आटे में नमी और कार्बोहाइड्रेट होते हैं और यह दोनों ही बैक्टीरिया के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण माने जाते हैं. ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के मुताबिक, किसी भी तरह के मॉइस्चर वाले खाने को अगर आप रूम टेम्पेरचर पर रखते हैं तो उसमें पैथोजेनिक बैक्टीरिया का जोखिम बढ़ जाता है.
गर्मी ही नहीं बल्कि ठंड में भी रसोई का तापमान ऐसा ही रहता है, जिसमें जल्दी बैक्टीरिया जन्म ले लेते हैं. यही वजह होती है कि आटे में हल्का खट्टापन आ जाता है.
USDA की एक रिसर्च है जिसे 'द डेंजर जोन' कहा जाता है, उसमें बताया गया है कि 4°C से 60°C के बीच का तापमान बैक्टीरिया के लिए खतरनाक होता है, अगर आटा या कोई भी गीली चीज इस तापमान में 2 घंटे से ज्यादा रहती है, तो उसमें बैक्टीरिया की संख्या हर 20 मिनट में डबल हो सकती है.
द जर्नल ऑफ फ़ूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी की रिसर्च बताती है कि जब आटा गूंथा जाता है, तो उसमें मौजूद अमाइलेज एंजाइम एक्टिव होकर स्टार्च को शुगर में बदल देते हैं.
यही शुगर हवा में मौजूद प्राकृतिक खमीर और बैक्टीरिया को पोषण देती है, जिससे आटे में तेजी से फर्मेंटेशन शुरू हो जाता है और आटा नरम और पचने में आसान बनता है.
अगर आटे को 2 से 4 घंटे से ज्यादा समय के लिए फ्रिज से बाहर कही रख दिया जाए, तो उसमें फर्मेंटेशन प्रोसेस शुरू हो सकता है. इस आटे की रोटी कोई खा लेता है तो उसका पेट खराब हो सकता है.
जब आप आटे को रसोई में पूरी रात के लिए छोड़ देते हैं तो उसके हवा के संपर्क में आने उसके ऊपर की लेयर का रंग बदल जाता है, वो कुछ भूरे या काले रंग की हो जाती है, जिसे ऑक्सीकरण कहा जाता है. जब आटे का ऑक्सीकरण हो जाता है तो इससे रोटियों के टेस्ट में भी बदलाव आता है और आटे में मौजूद पोषण भी कम हो जाते हैं.
इसके अलावा गूंथे आटे को जब बाहर छोड़ देते हैं तो ठंड की हवा आटे की नमी खींच लेती है, जिससे ऊपर परत जम जाती है और सख्त हो जाती है. इसकी वजह से न तो रोटियां ठीक से बेली जाती हैं और न ही फूलती हैं.
कई बार गलती से आटा बाहर रह जाता है और लोग सुबह उसकी रोटियां बना लेते हैं. मगर अगली बार अगर आटा बाहर रह जाए तो सबसे पहले कुछ चीजें देखें. जैसे आटे की स्मेल को चेक करें, अगर खट्टी या अजीब सी स्मेल आती है तो आटा फेंक दें.
कई बार आटे की स्मेल नहीं, उसका कलर भी बताता है. अगर सफेद से कलर काला या भूरा हो गया और वो हाथ में उठाने पर चिपक भी रहा है तो समझ लीजिए कि आटा खराब हो चुका है.
अगर सिर्फ ऊपर की परत हार्ड हो गई है और नीचे आटा सही है. तो आप ऊपर की लेयर को हटा लीजिए. हालांकि उसके बाद आटे को थोड़ा तेल या घी लगाकर दोबारा गूंथ सकते हैं.