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आपकी सहेली की नफरत है आपके पीठ दर्द की वजह

पीठ में दर्द की वजह शारीरिक होने से कहीं अधिक भावनात्मक होती है. एक होलिस्ट‍िक थेरेपिस्ट के मुताबिक, पीठ का दर्द हमें बचपन से ही शुरू होता है और यह शरीर में स्टोर होता रहता है.

पीठ दर्द पीठ दर्द

आज के समय में ज्यादातर लोगों को पीठ दर्द की शिकायत है और कई बार तो ऐसा होता है कि इसकी सही वजह तक नहीं पता चल पाती है. कुछ लोगों को लगता है कि विटामिन डी की कमी के चलते पीठ में दर्द है, कुछ काे लगता है कि सही से न सो पाने के कारण ऐसा हो रहा है. वहीं पीठ दर्द के कुछ प्रतिशत मरीज की इसकी वजह कैल्शियम की कमी को मान लेते हैं. एक धारणा यह भी है कि बहुत अधिक काम करने से भी पीठ दर्द होता है.

पीठ दर्द की ये सभी संभावित वजहें हैं. कई बार स्टोन की समस्या होने पर भी पीठ में दर्द बना रहता है लेकिन हाल ही में पीठ दर्द की एक बेहद रोचक वजह सामने आई है. एक होलिस्ट‍िक थेरेपिस्ट सोफिया कप्से के मुताबिक, पीठ में दर्द की वजह शारीरिक होने से कहीं अधिक भावनात्मक होती है. कप्से के मुताबिक, पीठ का दर्द हमें बचपन से ही होता है और छिपा रहता है लेकिन जब हम बड़े हो जाते हैं तो वह बढ़ जाता है और फिर उसे बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो जाता है.

कप्से इसके लिए एक कारण यह भी देती हैं कि नकारात्मक व्यवहार या फिर किसी नकारात्मक बात के चलते हमारी मांसपेशियों में एसिड जम जाता है. यह दर्द के लिए जिम्मेदार होता है. कप्से का यह स्टाइल काफी अनोखा है. वो Langellotti Tri-Therapy के तहत काम करती हैं. इस थेरेपी के कई सितारे मुरीद हैं. जिसमें फिजियोथेरेपी के साथ मसाज भी दी जाती है.

सोफिया ने इसके लिए वैकल्पिक उपचार भी रखे हैं. कप्से लंदन के हार्ले स्ट्रीट और ब्रैडफोर्ड में प्रैक्ट‍िस करती हैं. दर्द से परेशान शख्स को बेहद आराम मुद्रा में लाने की कोशिश की जाती है. कप्से उसके साथ बैठकर बातचीत करती हैं. वह मेडिकल हिस्ट्री के बारे में कुछ बातें पूछती हैं. मसलन नींद, पीरियड्स वगैरह.

उसके बाद वे पीठ की मांसपेशि‍यों को दिखाती हैं. जिनमें कुछ जगहों पर ऐंठन नजर आती है. उनके अनुसार, यह वह दौर था जब हम बुरे दौर से या नकारात्मक प्रभाव से गुजरे हुए होते हैं. उसके बाद वह उन जगहों पर दबाव डालती हैं और मसाज करती हैं और यह जानने की कोशिश करती हैं कि आखिर मांसपेशियों में मरोड़ की वजह क्या है.

 

इस पूरे इलाज के पीछे एक सोच है. थ्योरी के मुताबिक, जब हम किसी ट्रॉमा से गुजरते हैं तो हमारी मांसपेशि‍यों को धक्का लगता है. जितना अधि‍क हम तनाव से गुजरते हैं, हमारे शरीर में उतना अधिक एडरीनेलिन और कॉर्टिसोल निकलता है जो लैक्टि‍क एसिड में बदल जाता है.इससे सेंसरी नर्व प्रभावित होती हैं और दर्द पनप जाता है.

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