हल्दी वाला दूध जिसे आजकल 'गोल्डन मिल्क' भी कहा जाता है को काफी हेल्दी माना जाता है. इसे रोजाना पीने से इम्यूनिटी मजबूत होती है, जोड़ो के दर्द में राहत मिलती है और सूजन कम होती है. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन नाम का कंपाउंड इसे काफी ज्यादा हेल्दी बनाता है. 2017 में Foods जर्नल में पब्लिश एक रिसर्च के मुताबिक करक्यूमिन में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हल्दी वाला दूध हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता. आज हम इस खबर में जानेंगे कि किन लोगों को हल्दी वाला दूध पीने से बचना चाहिए या फिर डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे लेना चाहिए.
पित्ताशय (गॉलब्लैडर) की समस्या वाले लोग
हल्दी शरीर में पित्त (बाइल) बनाने की प्रोसेस को तेज करती है. अगर किसी को पित्त की पथरी या बाइल डक्ट में कोई समस्या है तो हल्दी वाला दूध पीने से दर्द और परेशानी बढ़ सकती है. ऐसे लोगों को हल्दी वाला दूध रोजाना पीने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए.
ब्लड थिनर दवा लेने वाले लोगों को
हल्दी में करक्यूमिन नामक कंपाउंड होता है जो ब्लड थिनर का काम करता है. अगर आप पहले से वॉरफेरिन, एस्पिरिन या क्लोपिडोग्रेल जैसी दवाइयां ले रहे हैं तो हल्दी वाला दूध पीने से खून बहने या जल्दी नील पड़ने का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे मामलों में डॉक्टर आमतौर पर रोज हल्दी वाला दूध पीने से मना करते हैं.
आयरन की कमी वाले लोग
हल्दी शरीर में आयरन के एब्जॉर्प्शन को कम कर सकती है. जिन लोगों को एनीमिया है या हीमोग्लोबिन पहले से कम है, उनके लिए रोज हल्दी वाला दूध नुकसानदेह हो सकता है. ऐसे लोगों के लिए सादा दूध या आयरन-फोर्टिफाइड दूध ज्यादा बेहतर ऑप्शन होता है.
किडनी स्टोन की समस्या वाले लोग
हल्दी में ऑक्सेलेट्स होते हैं जो कैल्शियम के साथ मिलकर किडनी स्टोन बना सकते हैं. जिन लोगों को पहले किडनी स्टोन हो चुका है या जिनमें इसका खतरा रहता है, उन्हें हल्दी वाला दूध ज्यादा नहीं पीना चाहिए.
प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिला को
हल्दी की थोड़ी मात्रा आमतौर पर सेफ मानी जाती है लेकिन ज्यादा मात्रा में हल्दी या रोजाना हल्दी वाला दूध पीना प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान ठीक नहीं माना जाता. इस दौरान इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए या पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.