खिचड़ी के बिना मकर संक्रांति का त्योहार अधूरा माना जाता है. इस दिन ज्यादातर घरों में तिल, गुड़ के साथ-साथ खिचड़ी भी बनाई जाती है. मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाना और दान करना शुभ माना जाता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि खिचड़ी मूंग दाल की बनाएं या अरहर दाल की. आज हम इस खबर में जानेंगे कि किस दाल की खिचड़ी खाना ज्यादा हेल्दी होता है और क्यों.
मूंग दाल
मूंग दाल, खासकर पीली धुली मूंग दाल को डाइजेस्ट करना आसान होता है क्योंकि इसमें ऐसे फाइबर कम होते हैं जो गैस बनाते हैं. इसी वजह से इसे खाने के बाद गैस या पेट फूलने की समस्या कम होती है. मूंग दाल जल्दी पच जाती है, इसलिए जिन लोगों का डाइजेशन की समस्या होती है या जिन्हें एसिडिटी या IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) की परेशानी रहती है. उनके लिए यह दाल बहुत अच्छी मानी जाती है.
अरहर (तूर) दाल
अरहर दाल पोषण से भरपूर होती है और ज्यादातर भारतीय घरों में रोज बनाई जाती है. लेकिन इसमें मूंग दाल के मुकाबले फाइबर ज्यादा होता है, जिससे कुछ लोगों को इसे पचाने में मुश्किल हो सकती है. फिर भी यह रोज खाने के लिए अच्छी दाल है, बस इसे सही तरीके से भिगोकर और अच्छी तरह पकाना जरूरी होता है.
मकर संक्रांति पर किसकी खिचड़ी बनाएं?
मकर संक्रांति का त्योहार मौसम के बदलाव का संकेत देता है. इस दौरान तिल, गुड़ और घी से बनी चीजें भी खूब खाई जाती हैं. ये सभी सेहत के लिए फायदेमंद तो होती हैं लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने से डाइजेशन प्रॉब्लम हो सकती है. ऐसे में त्योहार के दौरान या बाद में मूंग दाल से बनी खिचड़ी खाने से डाइजेशन बैलेंस रहता है.
मूंग दाल हल्की होती है और मौसम बदलने के समय पेट को आराम देती है. वहीं, अगर आपको किसी तरह की डाइजेशन प्रॉब्लम नहीं है तो आप मूंग और अरहर दोनों दाल मिलाकर भी खिचड़ी बना सकते हैं. इससे खिचड़ी का टेस्ट भी बेहतर होगा और यह ज्यादा हेल्दी भी बनेगी.