चुनावों मे राजनीतिक दलों के खर्च की सीमा तय करने की मांग का मामला सुप्रीम कोर्ट में है. सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है.
यह याचिका गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की ओर से दायर की गई है. इसमें चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से धनबल के बेलगाम इस्तेमाल को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले के संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण पेश हुए.
यह भी पढ़ें: पुणे पोर्श कांड: मुख्य आरोपी के पिता ने मांगी जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को भेजा नोटिस
प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से धनबल का अनियंत्रित इस्तेमाल लोकतंत्र की बुनियाद को प्रभावित करता है और चुनावी प्रक्रिया को असंतुलित करता है. उन्होंने अदालत को याद दिलाया कि इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह मान चुका है कि अनियंत्रित धनबल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को विकृत करता है और मतदाताओं के सूचना के अधिकार को प्रभावित करता है.
यह भी पढ़ें: 'द केरल स्टोरी 2' की रिलीज पर लगी रोक, केरल हाई कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को लगाई झाड़
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉय माल्या बागची ने धनबल के दुरुपयोग को रोकने से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देशों में भी चुनावी खर्च की सीमाएं मौजूद हैं, लेकिन वहां भी खर्च को उम्मीदवारों के मित्रों, सहयोगियों या तीसरे पक्षों के माध्यम से किए जाने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं.