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'धोनी 10 लाख जमा करें', मद्रास हाईकोर्ट का आदेश, जानें क्या है मामला

मद्रास हाईकोर्ट ने एमएस धोनी को उनके मानहानि केस से जुड़ी एक सीडी के ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद के लिए 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति आरएन मन्जुला ने दी है. कोर्ट ने कहा है कि ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद प्रक्रिया जटिल है. इसका खर्च वादकर्ता ही उठाता है.

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मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरप्रेटर और टाइपिस्ट का खर्च धोनी को वहन करना होगा (Photo: ITG)
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरप्रेटर और टाइपिस्ट का खर्च धोनी को वहन करना होगा (Photo: ITG)

तमिलनाडु में स्थित मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी को उनके द्वारा दायर मानहानि केस से जुड़ी एक सीडी के कंटेंट के ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति आर एन मन्जुला ने एक अंतरिम आदेश के तहत दिया.

धोनी ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी सम्पथकुमार के खिलाफ 100 करोड़ रुपये के मानहानि हर्जाने का दावा किया था. धोनी पर आरोप था कि उन्हें 2013 में हुए आईपीएल सट्टेबाजी घोटाले से जोड़ा गया था. इस मामले में कोर्ट ने संबंधित सीडी की सामग्री का ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद कराना आवश्यक माना था.

अदालत ने अपने आदेश में बताया कि 28 अक्टूबर 2025 के आदेश के तहत मीडिया कंटेंट को लिखित रूप में उतारने और इसका अनुवाद करने का काम कोर्ट के इंटरप्रेटर की ओर से शुरू किया जा चुका है. यह काम बेहद कॉम्पलेक्स और समय लेने वाला है. 

इंटरप्रेटर ने अदालत को सूचित किया है कि इस प्रोसेस को पूरा करने में लगभग तीन से चार महीने का वक्त लगेगा और इसमें एक इंटरप्रेटर और एक टाइपिस्ट की जरूरत पूरे समय के लिए होगी.

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न्यायमूर्ति ने कहा कि सामान्य तौर पर वादकर्ता को ही दस्तावेज तैयार कर अदालत में पेश करना होता है, लेकिन इस विशेष मामले में आधिकारिक इंटरप्रेटर की आवश्यकता होने के कारण यह खर्च वादी यानी धोनी को ही देनी पड़ेगी.

अदालत ने आदेश दिया कि 10 लाख रुपये की राशि अगले महीने 12 मार्च तक मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राहत कोष खाते में जमा कराई जाए. साथ ही, इंटरप्रेटर को मार्च 2026 के तीसरे सप्ताह तक ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद का काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी.

इनपुट: पीटीआई

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