कर्नाटक में एक बार फिर हिजाब विवाद पर बवाल बढ़ता दिख रहा है. अब कर्नाटक की कुछ छात्राएं परीक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं. ये प्री-यूनिवर्सिटी परीक्षा 9 मार्च से शुरू होने की उम्मीद है. CJI ने इस याचिकाकर्ताओं से आश्वस्त किया है कि उनकी याचिका पर इस मामले की सुनवाई के लिए एक बेंच बनाई जाएगी.
इस मामले में याचिका सुनवाई के दौरान शादान फरासत ने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लड़कियों को परीक्षा देने की इजाजत नहीं दी जा रही है. उनका एक साल बर्बाद हो जाएगा. इसलिए मामले पर शीघ्र सुनवाई की जानी चाहिए.
वकील ने बेंच को बताया कि लड़कियों को सिर पर स्कार्फ बांधकर परीक्षा देने की इजाजत नहीं है और लड़कियां बिना स्कार्फ के परीक्षा देने के लिए तैयार नहीं हैं. अदालत से अपील है कि लड़कियों को परीक्षा में भाग लेने दिया जाए.
पहले भी हिजाब को लेकर हुआ विवाद?
करीब डेढ़ साल पहले कर्नाटक के उडुपी जिले में एक जूनियर कॉलेज ने छात्राओं पर स्कूल में हिजाब पहनकर आने पर रोक लगा दी थी. गर्वनमेंट पूयी कॉलेज ने 01 जुलाई 2021 को कॉलेज यूनिफॉर्म लागू किया था और सभी छात्र-छात्राओं को इसे फॉलो करने के लिए कहा था. कोविड-19 में लागू लॉकडाउन के बाद जब फिर से स्कूलों को खोला गया तो सीनियर स्कूल की कुछ छात्राएं हिजाब पहनकर आने लगी थीं.
तब उडुपी जिले के सरकारी जूनियर कॉलेज की छात्राओं ने कॉलेज अथॉरिटी से हिजाब पहनकर स्कूल आने की अनुमति मांगी. दिसंबर 2021 कुछ छात्राएं हिजाब पहनकर स्कूल पहुंची तो उन्हें गेट के बाहर ही रोक दिया गया. इसपर छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया और हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ जनवरी 2022 में कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर की.
उडुपी जिले के बाद बाकी जिलों शिवमोगा और बेलगावी के कॉलेजों में भी हिजाब पहनकर कॉलेज आने वाली छात्राओं पर रोक लगा दी गई. दूसरी ओर एक समुदाय के छात्रों ने हिजाब पहने छात्राओं के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. देखते ही देखते मामले ने तूल पकड़ा, दो समुदाय के छात्र आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे के खिलाफ प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो गया.
हिजाब बैन पर हाई कोर्ट का फैसला
11 दिन तक दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद, 05 फरवरी 2022 को कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था. कोर्ट ने हिजाब बैन पर राज्य सरकार का आदेश बरकार रखा था. कोर्ट ने कहा था, 'स्कूल ड्रेस कोड तय करना उचित प्रतिबंध है, जो सवैंधानिक रूप से स्वीकार्य है. हालांकि कुछ वकीलों ने इस केस को पांच जजों की बेंच के पास भेजे जाने का भी तर्क दिया था.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, देवदत्त कामत, संदय हेगड़े समेत 20 से ज्यादा वकीलों ने दलील पेश की. दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलील रखने के लिए 10 दिन मिले. 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया लेकिन कोई रास्ता साफ नहीं हुआ. दोनों जजों की राय इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग थी.