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'तीन साल में भी नहीं सुलझे हमारे मुद्दे', उलेमाओं का सिद्धारमैया सरकार पर तीखा हमला

कर्नाटक में मुस्लिम स्कॉलर्स और उलेमा प्रतिनिधियों ने सिद्धारमैया सरकार पर आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यकों से किए गए कई वादे पूरे नहीं किए हैं.

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मुस्लिम स्कॉलर्स और उलेमा प्रतिनिधियों का कहना है कि कांग्रेस के घोषणापत्र में शामिल कई अहम मुद्दों पर अब तक अमल नहीं हुआ है. (Photo: PTI)
मुस्लिम स्कॉलर्स और उलेमा प्रतिनिधियों का कहना है कि कांग्रेस के घोषणापत्र में शामिल कई अहम मुद्दों पर अब तक अमल नहीं हुआ है. (Photo: PTI)

कर्नाटक में मुस्लिम स्कॉलर्स और उलेमाओं के एक ग्रुप ने सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की आलोचना की है. इसके अलावा ग्रुप ने आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यकों से किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं. साथ ही, दावणगेरे साउथ उपचुनाव के लिए पार्टी द्वारा उम्मीदवार के चयन पर भी उन्होंने नाराजगी जताई है.

ग्रुप का कहना है कि कांग्रेस के घोषणापत्र में शामिल कई अहम मुद्दे, जैसे मुसलमानों के लिए आरक्षण, एंटी-कन्वर्जन कानून को खत्म करना और हिजाब विवाद का समाधान अब तक सुलझाए नहीं गए हैं. 

उन्होंने बताया कि 20 मार्च को कांग्रेस नेताओं के साथ हुई बैठक में उन्होंने अपनी गहरी निराशा जाहिर की थी. उनका कहना है कि 2023 विधानसभा चुनाव से पहले किए गए वादों पर लगभग तीन साल बाद भी कोई खास प्रगति नहीं हुई है.

इसके अलावा, संस्था ने दावणगेरे साउथ उपचुनाव में अल्पसंख्यक उम्मीदवार को टिकट न देने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं. पार्टी ने यहां वरिष्ठ नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के पोते को उम्मीदवार बनाया है, जिसे उन्होंने अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के प्रति पार्टी की घोषित कमिटमेंट से हटकर कदम बताया है.

नज़ीर अहमद को पद से हटाया

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कर्नाटक में कांग्रेस की अंदरूनी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक सचिव नज़ीर अहमद को हटा दिया है. यह कार्रवाई दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के दौरान कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों के बाद की गई.

कांग्रेस में चल रही खींचतान के बीच नज़ीर अहमद का मामला पार्टी के लिए नया सिरदर्द बन गया था, जिसके बाद नेतृत्व ने यह सख्त फैसला लिया.

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