कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने राज्य के आबकारी मंत्री आर.बी. तिम्मापुर पर 6000 करोड़ रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाए कि आबकारी विभाग राज्य में भ्रष्टाचार में नंबर 1 विभाग बन चुका है. लाइसेंस देने, ट्रांसफर करने और अन्य कामों के लिए रिश्वत लेने का सिलसिला चल रहा है. इस संबंध में कई ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई हैं और लोकायुक्त में शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं.
अशोक ने कहा कि आबकारी विभाग में हर महीने दुकानदारों से 15-20 हजार रुपये की फिक्स रिश्वत ली जाती है. राज्य में कुल 14,229 लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठान (होटल, बार, क्लब, एमआरपी आदि) हैं. इनसे औसतन हर महीने 21 करोड़ और सालाना 252 करोड़ रुपये की रिश्वत वसूली हो रही है. उन्होंने कहा कि जॉइंट कमिश्नर नागराजप्पा और एक वकील के बीच हुई बातचीत के लीक ऑडियो में मंत्री तिम्मापुर और उनके बेटे विनय का नाम लिया गया है. इसमें 18 लाख रुपये की मांग का जिक्र है, जिसे 50% कम करने के लिए सीधे मंत्री से बात करने की सलाह दी गई.
आबकारी विभाग में ट्रांसफर के लिए रिश्वत
बीजेपी नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग में ट्रांसफर के लिए भी रिश्वत की रकम तय है. उन्होंने कहा कि डिप्टी कमिश्नर के लिए 2.5-3.5 करोड़, सुपरिंटेंडेंट के लिए 25-30 लाख, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के लिए 30-40 लाख, इंस्पेक्टर के लिए 40-50 लाख और कांस्टेबल के लिए 5-8 लाख रुपये तक रिश्वत ली जा रही है. शराब विक्रेताओं के अध्यक्ष गुरुस्वामी ने भी प्रेस में बयान दिया कि लाइसेंस से लेकर हर स्तर पर रिश्वत देनी पड़ती है. उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को भी शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
अशोक ने कहा कि एक अधिकारी ने लोकायुक्त में अपना बयान दर्ज कराया है और तीन पेनड्राइव में ऑडियो साक्ष्य सौंपे हैं. फिर भी आबाकरी विभाग ने फॉरेंसिक जांच नहीं कराई और अधिकारियों को बचाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और जेडीएस समर्थक होने पर ज्यादा रिश्वत मांगी जाती है, जबकि कुछ जातियों के लोगों को कम रिश्वत में छूट दी जाती है. शराब व्यापारियों ने कहा कि इतनी भारी रिश्वत के कारण नकली शराब का कारोबार बढ़ रहा है, जिससे कर्नाटक का आबकारी राजस्व घटा है.
सिद्धरमैया को सिर्फ अपनी कुर्सी की चिंता
आर. अशोक ने तुलना करते हुए कहा कि भाजपा सरकार में ऐसे आरोप लगने पर एन. नागेश और के.एस. ईश्वरप्पा ने इस्तीफा दे दिया था, लेकिन तिम्मापुर अब भी कुर्सी पर बने हुए हैं. उन्होंने विधानसभा में पेश किए गए केंद्र सरकार विरोधी प्रस्ताव को भी नियमों के खिलाफ बताया. अशोक ने कहा कि इस तरह का कोई भी प्रस्ताव लाने से 7 दिन पहले नोटिस देना जरूरी होता है. यह कांग्रेस सरकार और राहुल गांधी का प्रस्ताव है, कर्नाटक विधानसभा का नहीं. अशोक ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार आबकारी घोटाले की चर्चा से ध्यान हटाने के लिए केंद्र पर हमला कर रही है. सिद्धरमैया राज्य के विकास में रुचि नहीं रखते, केवल अपनी कुर्सी और पार्टी की रक्षा कर रहे हैं.