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पति पीट सकता है, हड्डी टूटी तो ही पत्नी कर पाएगी केस...  तालिबान के अजीब नियम!

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के नए कानूनों को लेकर विवाद बढ़ गया है. नए नियमों के अनुसार, अगर कोई लड़की शादी के प्रस्ताव पर चुप रहती है, तो उसकी चुप्पी को भी ‘हां’ माना जाएगा. इसके अलावा नाबालिग लड़कियों की शादी, घरेलू हिंसा और महिलाओं की स्वतंत्रता से जुड़े कई नियमों पर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है.

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सोशल मीडिया पर भी इन कानूनों को लेकर तीखी बहस हो रही है. ( Photo: Pexels)
सोशल मीडिया पर भी इन कानूनों को लेकर तीखी बहस हो रही है. ( Photo: Pexels)

आज के समय में दुनिया भर में महिलाओं के अधिकारों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है. कई देशों में महिलाओं को बराबरी, शिक्षा, काम और अपनी जिंदगी के फैसले लेने का अधिकार दिया जा रहा है. लेकिन दूसरी तरफ कुछ जगहों पर अब भी ऐसे कानून बनाए जा रहे हैं, जिन पर मानवाधिकार संगठन गंभीर सवाल उठा रहे हैं. हाल ही में अफगानिस्तान में तालिबान सरकार द्वारा बनाए गए नए नियमों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. अफगानिस्तान में बाल विवाह को लेकर एक फरमान जारी किया गया है. जिसमें कहा गया है अगर कोई वर्जिन लड़की बालिग होने के बाद शादी पर चुप रहती है, तो उसकी चुप्पी को सहमति माना जा सकता है.

लड़की की चुप्पी को माना जाएगा 'हां'
इन नए कानूनों में सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की हो रही है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई 'वर्जिन लड़की' शादी के प्रस्ताव पर कुछ नहीं बोलती, तो उसकी चुप्पी को भी 'हां' माना जाएगा. इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि किसी लड़की की चुप्पी को उसकी सहमति मान लेना गलत है. उनका कहना है कि शादी जैसे बड़े फैसले में लड़की की साफ और खुली सहमति जरूरी होनी चाहिए. सिर्फ चुप रहने का मतलब यह नहीं होता कि वह शादी के लिए तैयार है.

नाबालिग लड़कियों की शादी पर भी विवाद
तालिबान सरकार के नए नियमों में यह भी कहा गया है कि नाबालिग लड़की का निकाह उसके पिता या दादा कर सकते हैं. इस नियम पर भी काफी विरोध हो रहा है. लोगों का कहना है कि इससे बाल विवाह को बढ़ावा मिल सकता है और छोटी उम्र की लड़कियों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ सकता है. कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पहले भी अफगानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा और अधिकारों को लेकर चिंता जताई है. अब इन नए नियमों ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अफगानिस्तान की स्थिति की ओर खींचा है.

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शादी खत्म करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी
नए कानून के मुताबिक, अगर किसी शादी को रद्द करना हो, तो उसके लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होगी. यानी लड़की या महिला खुद आसानी से शादी खत्म नहीं कर सकती. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे महिलाओं के लिए मुश्किल हालात से बाहर निकलना और भी कठिन हो जाएगा. उनका मानना है कि महिलाओं को अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए.

घरेलू हिंसा के नियमों पर भी सवाल
घरेलू हिंसा को लेकर बनाए गए नियमों पर भी विवाद बढ़ गया है. नए नियमों के अनुसार, अगर पति पत्नी या बच्चों को मारता है, तो कार्रवाई तभी होगी जब हड्डी टूटे या शरीर पर गंभीर घाव दिखाई दें. यानी मामूली मारपीट या मानसिक प्रताड़ना को उतनी गंभीरता से नहीं देखा जाएगा. महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि घरेलू हिंसा सिर्फ शारीरिक चोट तक सीमित नहीं होती, बल्कि मानसिक और भावनात्मक हिंसा भी उतनी ही खतरनाक होती है.

12 साल के बाद पढ़ाई पर रोक
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के फैसलों को लेकर दुनिया भर में लगातार बहस हो रही है. खासतौर पर महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा को लेकर लिए गए फैसले सबसे ज्यादा विवाद में हैं. तालिबान ने सत्ता में आने के बाद लड़कियों की पढ़ाई पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी थीं, लेकिन अब 12 साल की उम्र के बाद यानी छठी कक्षा के आगे लड़कियों की शिक्षा पर रोक सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है.

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क्या है पूरा मामला?
तालिबान सरकार ने अफगानिस्तान में लड़कियों को छठी कक्षा के बाद स्कूल जाने से रोक दिया है. यानी लगभग 12 साल की उम्र के बाद लड़कियां आगे की पढ़ाई नहीं कर सकतीं. इसके अलावा महिलाओं के लिए यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पर भी प्रतिबंध लगाया जा चुका है. इस फैसले का असर लाखों लड़कियों के भविष्य पर पड़ रहा है. कई छात्राएं जो डॉक्टर, टीचर या इंजीनियर बनने का सपना देख रही थीं, उनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गई.

क्या पहले भी ऐसा हुआ था?
जब 1990 के दशक में तालिबान पहली बार सत्ता में आया था, तब भी महिलाओं की शिक्षा और काम पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे. 2021 में दोबारा सत्ता में आने के बाद शुरुआत में तालिबान ने कहा था कि महिलाओं को अधिकार दिए जाएंगे, लेकिन धीरे-धीरे कई पाबंदियां लागू कर दी गईं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश की तरक्की शिक्षा पर निर्भर करती है. अगर लड़कियों को पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा, तो समाज का विकास भी प्रभावित होगा.

पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने पर सजा
एक और नियम ने लोगों को हैरान किया है. अगर कोई शादीशुदा महिला अपने पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने जाती है, तो उसे सजा दी जा सकती है. इस नियम पर लोगों का कहना है कि इससे महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीधा असर पड़ेगा. उनका मानना है कि किसी महिला को अपने परिवार या रिश्तेदारों से मिलने के लिए अनुमति लेना पड़ना उसकी आजादी को सीमित करता है.

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सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
इन कानूनों को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कई लोग कह रहे हैं कि जब भी समाज में कट्टर सोच या धर्म का अत्यधिक प्रभाव बढ़ता है, तो उसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ता है. लोगों का कहना है कि इतिहास में कई बार ऐसा देखा गया है कि महिलाओं की आजादी, शिक्षा और अधिकार सबसे पहले प्रभावित होते हैं.

पहले से ही महिलाओं पर कई पाबंदियां
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं की शिक्षा, नौकरी और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर पहले ही कई तरह की पाबंदियां लग चुकी हैं. लड़कियों के स्कूल और कॉलेज बंद किए गए, महिलाओं के कई नौकरियों में काम करने पर रोक लगी और सार्वजनिक जगहों पर भी सख्त नियम लागू किए गए. अब इन नए कानूनों ने महिलाओं की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है.

क्यों पूरी दुनिया में हो रही चर्चा?
यह पूरा मामला सिर्फ अफगानिस्तान का नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़ी वैश्विक बहस का हिस्सा बन गया है. दुनिया भर में लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या किसी भी समाज में महिलाओं की आवाज और उनकी सहमति को नजरअंदाज किया जा सकता है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की प्रगति तभी संभव है, जब वहां महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार और सम्मान मिले.

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