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क्या होर्मुज में दोहराई जाएगी 42 साल पुरानी कहानी, बन रहे वैसे ही हालात

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है वो नया नहीं है. आज जिस तरह से ईरान कमर्शियल जहाजों को निशाना बना रहा है. कुछ ऐसा ही आज से करीब 42 साल पहले भी हुआ था. इसे 'टैंकर वॉर' के नाम से जाना जाता है.

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80 के दशक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुआ था टैंकर युद्ध (Photo - Getty)
80 के दशक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुआ था टैंकर युद्ध (Photo - Getty)

ईरान और अमेरिका के बीच करीब एक महीने से युद्ध विराम जारी है. दोनों देशों के बीच शांति बहाली को लेकर प्रयास चल रहे हैं. इस बीच एक बार फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कुछ ऐसा गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिससे युद्ध भड़कने के आसार दिखाई देने लगे हैं. इस बार युद्ध का स्वरूप कुछ अलग नजर आ रहा है.

 ईरान कुछ दिनों से लगातार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों और कमर्शियल जहाजों को निशाना बना रहा है. ऐसे में होर्मुज लड़ाई का नया अखाड़ा बनता दिख रहा है. इन सब के बीच आशंका जताई जा रही है कि कहीं फिर से यहां 42 साल पुरानी कहानी न दोहराई जाए. आज जैसे हालात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बन रहे हैं.  कुछ ऐसा ही  42 साल पहले यानी 1984 में भी हुआ था. इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुए 'टैंकर वॉर' की याद दिलाता है. 

80 के दशक में क्या हुआ था 
1979 की ईरानी क्रांति और तेहरान में अमेरिकी दूतावास में 52 लोगों के बंधक बनाए जाने के बाद ईरान के साथ अमेरिकी राजनयिक संबंध टूट गए थे. जब ​​1980 में इराक के सद्दाम हुसैन ने ईरान पर आक्रमण किया, तो अमेरिका ने अपने साझा दुश्मन के खिलाफ हुसैन का समर्थन किया.

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ईरान -इराक युद्ध आठ वर्षों तक चला. इस दौरान भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही को बाधित होने का खतरा पैदा हो गया था. तेल टैंकर दोनों पक्षों के निशाने पर आ गए थे. तभी 1984 में, इराक ने कुछ ईरानी तेल टैंकरों पर हमला कर दिया और ईरान ने भी फारस की खाड़ी में माइंस बिछाकर और हथियारबंद स्पीडबोटों से इराकी, कुवैती और सऊदी टैंकरों पर हमला शुरू कर दिया.

होर्मुज में छिड़ी इस लड़ाई को 'टैंकर युद्ध' के  नाम से जाना जाता है. इस दौरान, अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  से तटस्थ टैंकरों को सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए युद्धपोत भेजे. 1988 में, फारस की खाड़ी में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात नौसैनिक फ्रिगेट यूएसएस सैमुअल बी . रॉबर्ट्स एक ईरानी माइंस से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गया.

फिर से बन रहे टैंकर युद्ध जैसे हालात
तब अमेरिका ने ऑपरेशन प्रेइंग मैंटिस के साथ जवाबी कार्रवाई की, जो एक बड़ा सैन्य अभियान था. इसके तहत ईरानी नौसेना के अधिकांश जहाजों को डुबो दिया गया या निष्क्रिय कर दिया गया. उसी वर्ष बाद में, एक अमेरिकी युद्धपोत ने गलती से ईरान एयर फ्लाइट 655 को मार गिराया, जिसमें सवार सभी 290 नागरिक मारे गए.

आज एक बार फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऐसे ही हालात पैदा हो गए हैं. एक तरफ अमेरिका ने वहां फंसे तटस्थ जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू किया है. वहीं ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कंट्रोल करने का दावा करते हुए अमेरिका, यूएई और अन्य देशों के जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक कर रहा है. 

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अब अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह युद्ध विराम का उल्लंघन कर रहा है. ऐसी स्थिति में एक बार फिर से जंग छिड़ सकती है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेसथेग ने ईरान पर युद्ध भड़काने के आरोप लगाए हैं. वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू करने के वक्त कहा है कि इस अभियान में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से सख्ती से निपटा जाएगा. ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बार फिर से तनातनी के बीच टैंकर युद्ध जैसे हालात बनते दिखाई देने लगे हैं.

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