जंगल में सिर्फ बड़े जानवर ही नहीं, छोटे-छोटे कीड़े भी अपनी अहम भूमिका निभाते हैं. हाल ही में एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसमें कई मच्छर आराम से एक सांप का खून पीता हुआ दिखा. यह देखकर कई लोग हैरान रह गए. मच्छर सिर्फ इंसानों या पक्षियों का ही नहीं, बल्कि सांप, छिपकली और कछुए जैसे रेंगने वाले जीवों (रेप्टाइल्स) का खून भी पीते हैं. आपको बता दें कि सांप की स्किन पूरी तरह सख्त नहीं होती. उसमें बहुत छोटे-छोटे गैप या जगह होती हैं, जहां मच्छर आसानी से अपनी सूंड घुसाकर खून चूस लेते हैं. सांप का खून भी मच्छरों के लिए पोषण से भरपूर होता है. आमतौर पर एक-दो मच्छरों से सांप को कोई बड़ा नुकसान नहीं होता. लेकिन समस्या तब हो सकती है जब मच्छर किसी बीमारी का वायरस लेकर आएं. ऐसे में वे सांप को संक्रमित कर सकते हैं, और कुछ मामलों में सांप भी उन वायरस के वाहक बन सकते हैं.
क्या मच्छरों से सांप को खतरा होता है?
वैज्ञानिक मच्छरों के जरिए यह पता लगा सकते हैं कि कौन-कौन से जानवर किस इलाके में मौजूद हैं. यानी मच्छरों के खून के सैंपल से सांपों की लोकेशन और उनकी गतिविधियों को ट्रैक किया जा सकता है. आपको बता दें कि मच्छरों की उम्र ज्यादा लंबी नहीं होती. नर मच्छर लगभग 5 से 10 दिन तक जीवित रहते हैं और मादा मच्छर 2 से 4 हफ्ते तक जीवित रह सकती हैं. खास बात ये है कि केवल मादा मच्छर ही खून पीती हैं, क्योंकि उन्हें अंडे देने के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है. दुनिया भर में मच्छरों की लगभग 3,500 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से कुछ ही प्रजातियां इंसानों और जानवरों को काटती है और बीमारियां फैलाती हैं, जैसे: मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया, जापानी इंसेफेलाइटिस.
मच्छरों का जीवन चक्र बहुत तेज होता है. पूरी प्रक्रिया 7 से 14 दिनों में पूरी हो सकती है. मादा मच्छर पानी में अंडे देती है. 2-3 दिन में अंडे से निकलता है. 2-3 दिन बाद अगला चरण.7-10 दिन में पूरा मच्छर बन जाता है. एक मादा मच्छर एक बार में 100 से 200 अंडे तक दे सकती है. मच्छर सिर्फ खून नहीं पीते, बल्कि वे फूलों का रस भी पीते हैं. नर मच्छर सिर्फ रस पीते हैं. मच्छर छोटे जरूर होते हैं, लेकिन वे तेजी से बढ़ते हैं, कई प्रजातियों में पाए जाते हैं और अलग-अलग जीव- जैसे इंसान, जानवर और यहां तक कि सांप का खून भी पी सकते हैं.
यह भी पढ़ें: क्या सांप अंडे देते हैं या बच्चे? सच जानकर चौंक जाएंगे
पेंटानल में मच्छरों का आतंक
वीडियो के कैप्शन में लिखा है- यकीन मानिए, मुझे भी इनसे छुटकारा नहीं मिला. क्या आप उनकी भनभनाहट सुन सकते हैं? पेंटानल जैसे इलाकों में मच्छर किसी के साथ भेदभाव नहीं करते. हम अक्सर सोचते हैं कि मच्छर सिर्फ इंसानों या बड़े जानवरों को परेशान करते हैं, लेकिन सच यह है कि कई मच्छर जो भी जीव आसानी से मिल जाए, उसका खून पी लेते हैं, चाहे वो पक्षी हो, जानवर हो या फिर रेंगने वाले जीव (रेप्टाइल) जैसे सांप. इस छोटे से बोआ सांप को देखिए, यह पूरी तरह मच्छरों से घिरा हुआ था. हर जीव की तरह यह भी सांस लेते समय कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है, जिसे मच्छर आसानी से पहचान लेते हैं.
यह भी पढ़ें: बड़े सांप 2-4 बार... तो छोटे सांप इतनी बार बदलते हैं अपनी केंचुली
इसके साथ ही शरीर की हल्की गर्मी और त्वचा से निकलने वाली गंध भी मच्छरों को आकर्षित करती है. जब सांप शांत या बिना हिले-डुले पड़ा रहता है, तो वह मच्छरों के लिए आसान निशाना बन जाता है. सांपों के पास इन छोटे हमलावरों से बचने के ज्यादा तरीके नहीं होते. वे कभी-कभी अपनी जगह बदल लेते हैं या घास-पौधों से रगड़कर मच्छरों को हटाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा करना उनके लिए थकाने वाला होता है. खासकर इस तरह के छोटे या कम उम्र के सांप के लिए, बार-बार मच्छरों के काटने से तनाव, जलन और धीरे-धीरे खून की कमी जैसी समस्या भी हो सकती है.