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'मैं कई बार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरा हूं, खतरनाक द्वीप...', मर्चेंट नेवी अफसर ने सुनाया डेथ रूट का पूरा किस्सा

मर्चेंट नेवी के ऑफिसर से जानते हैं कि आखिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हकीकत में कैसा है, वहां का माहौल दूसरे समुद्री रूट से कितना अलग है?

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा रास्ता है, जहां से रोज कई जहाज गुजरते हैं. (Photo: AP)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा रास्ता है, जहां से रोज कई जहाज गुजरते हैं. (Photo: AP)

ईरान जंग में सबसे ज्यादा जिसका नाम लिया जा रहा है, वो है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज. फारस की खाड़ी में बनी एक 'गली' जहां से कई जहाज मिडिल ईस्ट से भारत की तरफ आते हैं. अभी तो वहां के हालात चिंताजनक हैं, डर है कि कब कोई टॉरपीडो या मिसाइल जहाज को अपना शिकार ना बना ले. लेकिन, आम दिनों में वहां कैसा माहौल रहता है? ये जानने के लिए हमने बात की मर्चेंट नेवी के सेकेंड ऑफिसर नवजोत सिंह से, जो कार्गो शिप को लेकर एक देश से दूसरे देश जाते हैं. यहां तक कि वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भी शिप लेकर निकले हैं. तो जानते हैं कि उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में क्या बताया?

कभी गए हैं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में नवजोत सिंह कहते हैं, 'मैं 2015 से अभी तक कई बार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरा हूं. मैं जिन जहाजों पर रहता था, वो ज्यादातर ऑयल टैंकर और गैस कैरियर थे और उनका ट्रेडिंग एरिया भी यही इलाका था, इसलिए इस रूट से अक्सर आना-जाना होता था. 

दूसरे समुद्री रास्तों से कितना अलग है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

ऑफिसर ने बताया, 'वैसे तो आप जब जहाज पर होते हैं तो चारों तरफ सिर्फ समुद्र दिखता है, तो ऐसे में दूर तक देखने पर आपको बहुत बड़ा फर्क नजर नहीं आता.  लेकिन भौगोलिक रूप से यह इलाका अलग है. यहां तापमान ज्यादा होता है और आसपास सूखे पहाड़ नजर आते हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो अरब सागर और फारस की खाड़ी को जोड़ता है. इस स्ट्रेट के दक्षिण में खोरफक्कन और फुजैरा एंकरज जैसे इलाके हैं, जहां जहाज अक्सर अगला ऑर्डर मिलने तक इंतजार करते हैं.'

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उन्होंने बताया, 'यहां पानी काफी गहरा होता है, इसलिए एंकर डालना सुरक्षित नहीं माना जाता, लेकिन फिर भी कई जहाज यहां रुकते हैं. इसका कारण यह है कि इस इलाके में सालभर समुद्र वैसे शांत रहता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान और यूएई पड़ते हैं. इस इलाके में कभी-कभी छोटी तेज नावों से तेल की अवैध तस्करी भी देखने को मिलती है. युद्ध से पहले भी कई बड़ी कंपनियां कोशिश करती थीं कि जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दक्षिण वाले हिस्से के जितना करीब हो सके उतना रहे, ताकि ईरानी नौसेना से टकराव की स्थिति से बचा जा सके. 

ईरान

'अबू मूसा द्वीप से दूर रहते हैं'

उन्होंने बताया कि वो इस रूट पर अबू मूसा द्वीप से दूर रहते हैं. उन्होंने बताया कि ये द्वीप फारस की खाड़ी में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंटर करते वक्त आता है. यह द्वीप फिलहाल ईरान के नियंत्रण में है, लेकिन यूएई भी इस पर दावा करता है. उन्होंने बताया कि जहाज चलाते समय वे कोशिश करते हैं कि इस द्वीप से जितना हो सके उतनी दूरी बनाए रखें. 

यहां जहाज में कोई दिक्कत आती है?

नवजोत सिंह ने बताया, 'यहां मौसम आम तौर पर शांत रहता है,, इसलिए बहुत बड़ी प्राकृतिक मुश्किलें नहीं होतीं, लेकिन कुछ चुनौतियां जरूर होती हैं. यह रास्ता काफी संकरा है, इसलिए जहाजों को गुजरने में सावधानी रखनी पड़ती है. यहां जहाजों का ट्रैफिक काफी ज्यादा रहता है. कई बार स्थानीय स्पीड बोट और मछली पकड़ने वाली नावें रास्ते में आ जाती हैं. आसपास नौसेनाओं के युद्धाभ्यास भी चलते रहते हैं. कभी-कभी पनडुब्बियां भी फुजैरा एंकरज के आसपास रुकती हैं. यह इलाका समुद्री सुरक्षा के लिहाज से वॉलंटरी रिपोर्टिंग एरिया (VRA) में आता है. 

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क्या वहां जहाजों की भीड़ लग जाती है?

ऑफिसर ने इस सवाल का सीधा आंकड़ा नहीं बताया, लेकिन उनके अनुभव के मुताबिक उस इलाके में काफी जहाज आते-जाते रहते हैं और कई जहाज एंकरज में इंतजार भी करते हैं. 

क्या आपने कभी युद्ध जैसी स्थिति का सामना किया है?

ऑफिसर ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तो नहीं, लेकिन रेड सी में उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा था. उन्होंने बताया कि कि जब वह उस रूट से गुजरने वाले थे, उससे एक दिन पहले बाब-एल-मंदेब के बाद तीन जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल से हमला हुआ था, जिसे यमन के हूती विद्रोहियों से जोड़ा जा रहा था. इस घटना के बाद जहाज पर काफी तनाव का माहौल बन गया था और यह तय करना मुश्किल हो गया था कि रेड सी में प्रवेश करना चाहिए या नहीं. 

ऑफिसर ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में फैसला लेना बहुत कठिन होता है, क्योंकि एक तरफ कंपनी और कार्गो से जुड़े व्यावसायिक दबाव होते हैं और दूसरी तरफ जहाज पर मौजूद क्रू की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी होती है. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में कप्तान को कई बार बहुत कठिन फैसले लेने पड़ते हैं, क्योंकि सभी पक्षों को एक साथ संतुष्ट करना संभव नहीं होता. 

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एक शिप में कई देशों का हित

ऑफिसर बताते हैं कि आम लोगों को लगता है कि जहाज किसी एक देश का होता है और वही देश उसे ऑपरेट करता है, लेकिन असलियत इससे काफी अलग है. कई बार जहाज पर काम करने वाला क्रू किसी एक देश का होता है, उसे मैनेज करने वाली मैनिंग कंपनी किसी दूसरे देश की होती है, जबकि जहाज का मालिक किसी तीसरे देश का हो सकता है. वहीं जिस सामान को जहाज लेकर जा रहा होता है, उसका मालिक भी किसी और देश की कंपनी हो सकती है. इतना ही नहीं, जहाज जिस देश से सामान लेकर निकलता है और जिस देश में उसे उतारता है, वे भी अलग-अलग होते हैं. 
 

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