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ऑफिस में आराम से बेफिक्र होकर लीजिए झपकी, बिस्तर तकिए का भी है इंतजाम, जानें क्या है इनेमुरी परंपरा?

जापान की इनेमुरी परंपरा एक खास तरह की माइक्रो-नैप है, जिसमें लोग काम या सफर के दौरान थोड़ी देर झपकी लेते हैं. इसे वहां आलस नहीं, बल्कि मेहनत और समर्पण का संकेत माना जाता है. 10–25 मिनट की यह छोटी नींद शरीर और दिमाग को तरोताजा कर देती है.

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इनेमुरी काम की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है. ( Photo: Pexels)
इनेमुरी काम की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है. ( Photo: Pexels)

क्या आप जानते हैं कि जापान एक ऐसा देश है जहां लोग काम करते-करते थक जाएं तो वहीं थोड़ी देर के लिए सो भी सकते हैं? सुनने में यह थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन वहां की जिंदगी इतनी व्यस्त होती है कि लोग बीच-बीच में छोटी झपकी लेकर खुद को तरोताजा करते रहते हैं. यह आदत भले अलग लगे, लेकिन इसमें एक तरह का सुकून छिपा है, कम समय में आराम और फिर दोबारा पूरे जोश के साथ काम करने की ताकत. आपको बता दें कि जापान को ऐसा देश माना जाता है जहां लोग बहुत मेहनत करते हैं, नियमों का पालन करते हैं और अपने काम को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं. वहां के लोग अक्सर लंबे समय तक काम करते हैं.

लेकिन इसी बीच एक दिलचस्प आदत भी देखने को मिलती है, जिसे इनेमुरी कहा जाता है. इसका मतलब होता है- सोते हुए भी मौजूद रहना. यानी लोग थोड़ी देर के लिए झपकी लेते हैं, लेकिन पूरी तरह से आसपास की चीजों से अलग नहीं होते. खास बात यह है कि इनेमुरी के लिए कोई अलग जगह या समय तय नहीं होता. लोग इसे बस, ट्रेन, ऑफिस, मीटिंग या इंतजार करते समय भी कर सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति ट्रेन में सफर करते हुए हल्की झपकी ले रहा है, तो इसे बिल्कुल सामान्य माना जाता है. यहां तक कि ऑफिस में भी, अगर कोई कर्मचारी कुछ मिनट के लिए आंखें बंद कर लेता है, तो इसे गलत नजर से नहीं देखा जाता.

इनेमुरी का मतलब क्या होता है?
इनेमुरी का मतलब सोते हुए भी मौजूद रहना होता है. यानी आप थोड़ी देर के लिए झपकी ले रहे हैं, लेकिन पूरी तरह से उस जगह या माहौल से अलग नहीं होते. यह कोई गहरी नींद नहीं होती, बल्कि हल्की-सी झपकी होती है, जिसमें व्यक्ति आराम भी कर लेता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत जागकर काम में लग सकता है. जापान में इनेमुरी सिर्फ आराम करने का तरीका नहीं, बल्कि वहां का वर्क कल्चर का एक हिस्सा बन चुका है. यह दिखाता है कि व्यक्ति ने इतना काम किया है कि उसे थोड़ी देर के लिए आराम की जरूरत है. इसलिए कई बार इसे मेहनत और समर्पण की निशानी के रूप में भी देखा जाता है.

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इनेमुरी जापान की एक खास तरह की माइक्रो-नैप लेने की परंपरा है. यह आम नींद या दोपहर की नींद से अलग होती है. जहां बाकी देशों में लोग आराम करने के लिए अलग जगह या शांत माहौल ढूंढते हैं, वहीं जापान में लोग बस, ट्रेन, ऑफिस या मीटिंग के दौरान भी कुछ मिनट के लिए झपकी ले लेते हैं. खास बात यह है कि वे पूरी तरह से सोते नहीं, बल्कि हल्की नींद में रहते हुए भी अपने आसपास की स्थिति से जुड़े रहते हैं.

इसे गलत नहीं माना जाता
दूसरे देशों में अगर कोई ऑफिस या मीटिंग में सोता हुआ दिख जाए, तो उसे आलसी या लापरवाही समझा जाता है. लेकिन जापान में ऐसा नहीं है. वहां अगर कोई व्यक्ति थोड़ी देर के लिए आंखें बंद कर लेता है, तो इसे उसकी मेहनत और लगन का संकेत माना जाता है. लोग सोचते हैं कि वह इतना काम कर रहा है कि थक गया है, इसलिए थोड़ी देर आराम कर रहा है. इससे उसकी छवि खराब नहीं होती, बल्कि कई बार बेहतर ही होती है.

जापान की ट्रेनों और बसों में देखने को मिलता है, जहां लोग सफर के दौरान कुछ मिनट के लिए झपकी ले लेते हैं. इसके अलावा ऑफिस, मीटिंग, यहां तक कि कुछ मामलों में स्कूलों में भी छात्र या कर्मचारी हल्की झपकी लेते हुए नजर आ सकते हैं. लेकिन इसमें एक नियम जैसा होता है- आपको इस तरह सोना है कि आप मौजूद दिखें, यानी जरूरत पड़ने पर तुरंत सक्रिय हो सके.

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कितनी देर की झपकी होती है सही?
इनेमुरी के लिए कोई तय समय नहीं है. यह कुछ मिनटों से लेकर 20-25 मिनट तक हो सकती है. साइंटिस्ट रिसर्च भी बताते हैं कि छोटी झपकी लेना फायदेमंद होता है. एक स्टडी के अनुसार, करीब 25 मिनट की झपकी से काम करने की क्षमता में लगभग 34% तक सुधार हो सकता है और सतर्कता 50% से ज्यादा बढ़ सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि 10 से 25 मिनट के बीच की झपकी सबसे बेहतर होती है. कुछ लोग 15-20 मिनट को आदर्श समय मानते हैं. खास तौर पर 18 मिनट की झपकी को संतुलित माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर तरोताजा हो जाता है और ज्यादा देर सोने से आने वाली सुस्ती भी नहीं होती.

काम के बीच झपकी क्यों जरूरी है?
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग लंबे समय तक काम करते हैं, जिससे थकान और तनाव बढ़ जाता है. ऐसे में छोटी झपकी शरीर और दिमाग को दोबारा एनर्जी देने का काम करती है. इससे फोकस बढ़ता है, काम में गलतियां कम होती हैं और मूड भी बेहतर होता है. इसी वजह से अब दुनिया के कई देशों में पावर नैप यानी छोटी झपकी लेने का चलन बढ़ रहा है. कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए खास जगह भी बना रही हैं, जहां वे कुछ मिनट आराम कर सकें.

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क्या 18 मिनट की झपकी सबसे बेस्ट होती है? 
इनेमुरी यानी छोटी झपकी लेने का कोई तय समय नहीं होता. लोग इसे बस, ट्रेन, ऑफिस या स्कूल में अपनी जरूरत के हिसाब से लेते हैं. लेकिन वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च की है. एक स्टडी के मुताबिक, करीब 25 मिनट की झपकी लेने से काम करने की क्षमता लगभग 34% तक बढ़ सकती है और अलर्टनेस 50% से ज्यादा बेहतर हो जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि 10 से 25 मिनट के बीच की झपकी सबसे फायदेमंद होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए 18 मिनट का समय बीच का संतुलित समय माना जाता है. 18 मिनट की झपकी लेने से शरीर को अच्छा आराम मिल जाता है, दिमाग तरोताजा हो जाता है और ज्यादा देर सोने के बाद आने वाली भारीपन या सुस्ती भी नहीं होती.

क्या भारत या दूसरे देशों में अपनाया जा सकता है?
इनेमुरी का विचार धीरे-धीरे दूसरे देशों में भी लोकप्रिय हो रहा है. हालांकि हर जगह इसे उसी रूप में अपनाना आसान नहीं है, क्योंकि अलग-अलग समाजों में काम करने की संस्कृति अलग होती है. फिर भी, छोटी झपकी लेने की आदत को अपनाया जा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय तक काम करते हैं. जरूरी यह है कि इसे सही तरीके से किया जाए, जैसे 15-20 मिनट का छोटा ब्रेक लेना, शांत जगह चुनना और ज्यादा देर तक न सोना. इनेमुरी हमें यह सिखाता है कि काम और आराम के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है. यह सिर्फ सोने की आदत नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा तरीका है, जिससे हम अपनी  ऊर्जा को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं.

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आज के समय में, जब काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है, तब छोटी-सी झपकी भी बड़ी राहत दे सकती है. जापान की यह परंपरा बताती है कि थोड़ी देर का आराम कमजोरी नहीं, बल्कि बेहतर प्रदर्शन की कुंजी हो सकता है.

इनेमुरी के क्या फायदे हैं? 
अगर पश्चिमी देशों से तुलना करें, तो जापान की इनेमुरी को पावर नैप यानी छोटी झपकी कहा जा सकता है. इसका मकसद कम समय में शरीर और दिमाग को दोबारा तरोताजा करना होता है. आमतौर पर यह झपकी 10 से 20 मिनट की होती है, जो दिनभर की थकान को काफी हद तक दूर कर देती है. यह छोटी-सी झपकी शरीर और दिमाग दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होती है. थोड़ी देर आराम करने के बाद दिमाग ज्यादा तेजी से काम करता है, जिससे काम बेहतर और जल्दी होता है. दिनभर के काम और भागदौड़ से जो तनाव होता है, वह कम हो जाता है और मन हल्का महसूस करता है. लगातार काम करने से जो थकावट आती है, छोटी झपकी उसे कम कर देती है और शरीर फिर से एक्टिव हो जाता है. 

झपकी लेने के बाद व्यक्ति ज्यादा खुश और पॉजिटिव महसूस करता है. छोटी नींद शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत को बढ़ाने में मदद करती है. आराम मिलने के बाद दिमाग नए और बेहतर आइडिया सोचने में ज्यादा सक्षम हो जाता है. झपकी लेने से चीजें याद रखने की क्षमता बढ़ती है और ध्यान भी ज्यादा लगता है. यह दिल से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम करने में भी मदद कर सकता है. दिन में कुछ मिनट की झपकी लेना कोई आलस नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा तरीका है। इससे आप पूरे दिन ज्यादा एक्टिव, खुश और प्रोडक्टिव रह सकते हैं.

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क्या किसी को सोते हुए जगाने पर कोई कानूनी सजा
जापान में इनेमुरी एक सामाजिक आदत है, कोई कानून नहीं. इसलिए अगर कोई व्यक्ति किसी को हल्की झपकी से जगा देता है- जैसे मीटिंग शुरू हो गई हो, काम जरूरी हो या स्टेशन आ गया हो, तो यह बिल्कुल सामान्य बात मानी जाती है. लेकिन कुछ बातें ध्यान रखने वाली हैं.  जापान में लोगों को सम्मान देना बहुत महत्वपूर्ण है. इसलिए अगर कोई सो रहा है, तो उसे धीरे और विनम्र तरीके से जगाया जाता है, न कि झटके से या मजाक बनाकर. इसके साथ ही अगर आप किसी को सही कारण से जगा रहे हैं- जैसे उसका स्टॉप आ गया, मीटिंग शुरू हो गई- तो यह मदद मानी जाती है, न कि गलत काम.

अगर कोई जानबूझकर किसी को परेशान करने के लिए जोर-जोर से जगाए, धक्का दे या अपमान करे, तो यह गलत व्यवहार माना जाएगा. ऐसे में शिकायत हो सकती है, लेकिन यह इनेमुरी से जुड़ी सजा नहीं, बल्कि बदतमीजी का मामला होगा.

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