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500 रुपये में ‘कैदी’ बनने का मौका! बिना अपराध महसूस करें जेल की जिंदगी

हैदराबाद में एक अनोखी पहल के तहत एक जेल में फील द जेल नाम से एक खास अनुभव शुरू किया जा रहा है, जिसमें लोग अपनी मर्जी से एक दिन जेल में बिता सकते हैं. इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को जेल की असली जिंदगी खाना, दिनचर्या, अनुशासन और रहने की स्थिति के बारे में जागरूक करना है.

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यह आइडिया नया जरूर है लेकिन तेलंगाना में पहले भी सफल हो चुका है. ( Photo: X/ @Telugu360)
यह आइडिया नया जरूर है लेकिन तेलंगाना में पहले भी सफल हो चुका है. ( Photo: X/ @Telugu360)

आमतौर पर लोग छुट्टी के दिन मॉल, पार्क या कैफे जाना पसंद करते हैं, लेकिन अब हैदराबाद में लोग अपनी मर्जी से एक दिन जेल में भी बिता सकेंगे. यह नई पहल चंचलगुडा जेल के अंदर बने एक खास जेल म्यूजियम में शुरू किया गया है, जिसे फील द जेल या एक दिन का जेल अनुभव कहा जा रहा है. इसका मकसद लोगों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि उन्हें जेल की असली जिंदगी के बारे में जागरूक करना है, जैसे वहां का खाना कैसा होता है, कैदियों की दिनचर्या कैसी होती है, अनुशासन कितना सख्त होता है और जेल के अंदर रहना कैसा महसूस होता है.

दरअसल, यह आइडिया नया जरूर है लेकिन तेलंगाना में पहले भी सफल हो चुका है. इसकी शुरुआत साल 2016 में संगारेड्डी हेरिटेज जेल संग्रहालय से हुई थी. यह जेल बहुत पुरानी है, जिसे 1796 में निजाम काल में बनाया गया था. कई सालों तक यह एक असली जेल के रूप में काम करती रही, लेकिन बाद में इसे म्यूजियम और टूरिस्ट प्लेस में बदल दिया गया. यहां लोगों को करीब 500 रुपये में 24 घंटे जेल के अंदर रहने का मौका दिया जाता था. इस दौरान उन्हें कैदियों जैसी जिंदगी जीनी होती थी, सादा खाना, तय समय पर उठना-बैठना और सख्त नियमों का पालन करना. इस अनुभव को लोगों ने बहुत पसंद किया, क्योंकि इसमें किसी तरह की दिखावा या आराम नहीं था, बल्कि असली जेल जीवन की झलक दिखाई जाती थी.

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जेल की असली सच्चाई दिखाने की पहल
अब इसी सफल मॉडल को हैदराबाद में लाया जा रहा है. चंचलगुडा जेल, जो कि एक हाई-सिक्योरिटी जेल है, उसके अंदर इस म्यूजियम को तैयार किया गया है. यहां पर पुराने समय से लेकर आज तक की जेल व्यवस्था को दिखाया गया है. म्यूजियम में कैदियों की कोठरियों को फिर से बनाया गया है, ताकि लोग समझ सकें कि जेल में रहने की जगह कैसी होती है. इसके अलावा यहां पुरानी हथकड़ियां, जंजीरें, जेल में इस्तेमाल होने वाले औजार और बुनाई मशीन भी रखी गई हैं. ऑडियो और वीडियो के जरिए यह भी दिखाया जाता है कि कैदियों की रोजमर्रा की जिंदगी कैसी होती है, वे कैसे काम करते हैं, अदालत में पेशी कैसे होती है और परिवार से मुलाकात कैसे होती है.

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2016 में शुरू हुआ था यह अनोखा प्रयोग
इसके साथ ही, जेल में होने वाले काम जैसे खेती, हथकरघा और स्किल डेवलपमेंट को भी दिखाया गया है, जिससे यह समझ में आता है कि जेल सिर्फ सजा देने की जगह नहीं, बल्कि सुधार का भी केंद्र है. इस म्यूजियम के साथ ही एक दिन का जेल अनुभव कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा. इसमें शामिल होने वाले लोगों को कुछ समय के लिए कैदियों जैसी जिंदगी जीनी होगी.

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उन्हें वही खाना मिलेगा, वही नियम मानने होंगे और उसी तरह की दिनचर्या अपनानी होगी. इसका उद्देश्य यह है कि लोग खुद महसूस करें कि जेल की जिंदगी कितनी कठिन होती है और आजादी की असली कीमत क्या है. खासकर युवाओं के लिए यह एक सीख देने वाला अनुभव होगा, ताकि वे गलत रास्तों से दूर रहें और समझें कि अपराध का परिणाम कितना गंभीर होता है.

हाई-सिक्योरिटी जेल में बना खास म्यूजियम
कुल मिलाकर, यह पहल हैदराबाद के लोगों के लिए एक अलग और सोच बदलने वाला अनुभव लेकर आ रही है. यह कोई लग्जरी या मजेदार आउटिंग नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो इंसान को सोचने पर मजबूर करता है. जो लोग मॉल और कैफे से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक अनोखा मौका हो सकता है, जहां वे असली जिंदगी के एक सख्त और सच्चे पहलू को करीब से देख और समझ सकेंगे.

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