scorecardresearch
 

आज ही हुई थी कार्बन-14 की खोज, जिससे तय होती है जीवाश्मों की आयु

आज के दिन ही 27 फरवरी को कार्बन-14 की खोज हुई थी, जिसका इस्तेमाल किसी भी चीज की सटीक उम्र पता करने के लिए किया जाता है. कार्बन-14 ने विज्ञान और इतिहास की कई समस्याओं का समाधान कर दिया.

Advertisement
X
मार्टिन कमेन ने कार्बन 14 की खोज की थी, इससे जीवाश्म या किसी भी पुरातत्विक चीजों की आयु का पता लगाया जा सकता है (Representational Photo - AFP)
मार्टिन कमेन ने कार्बन 14 की खोज की थी, इससे जीवाश्म या किसी भी पुरातत्विक चीजों की आयु का पता लगाया जा सकता है (Representational Photo - AFP)

27 फरवरी 1940 को मार्टिन कामेन ने कार्बन-14 की खोज की थी. कार्बन के इस आइसोटॉप का इस्तेमाल किसी भी चीज की सटीक उम्र पता करने के लिए इस्तेमाल होता है. इस खोज ने जैव रसायन से लेकर समुद्र विज्ञान तक हर क्षेत्र में क्रांति ला दी. लेकिन, यह खोज अस्तित्व में आने से पहले ही खत्म हो जाती. 

क्योंकि, जिस दिन यह खोज हुई, उसी दिन इसके खोजकर्ता वैज्ञानिक को पुलिस ने गलतफहमी में गिरफ्तार कर लिया था और वह अपने प्रयोग का रिजल्ट भी नहीं देख पाए थे.  इसकी खोज मार्टिन कामेन ने की थी. इस खोज के साथ काफी दिलचस्प कहानी भी जुड़ी हुई है.

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्टिन कामेन ने तीन दिन और तीन रात बिना सोए काम किया था.  उन्होंने और उनके सहयोगी सैम रुबेन ने ग्रेफाइट के एक टुकड़े पर उप-परमाणु कणों की बौछार की थी. उनके काम का उद्देश्य कार्बन के नए रूप बनाना था, जिनका व्यावहारिक उपयोग हो सके. 

27 फरवरी 1940 की सुबह-सुबह कैलिफोर्निया के बर्कले स्थित अपनी प्रयोगशाला से लड़खड़ाते हुए बाहर निकले. उन्हें आराम की सख्त जरूरत थी. बिखरे बालों, लाल आंखों और तीन दिन बढ़ी दाढ़ी के साथ, वे बेहद बदहाल दिख रहे थे.

Advertisement

यह भी पढ़ें: जब एल्बा द्वीप से भाग निकला था नेपोलियन, ऐसे नाम के साथ जुड़ा 'बोनापार्ट'

यह दुर्भाग्यपूर्ण था. बर्कले पुलिस उस समय एक फरार अपराधी की तलाश कर रही थी जिसने हाल ही में कई हत्याएं की थीं. इसलिए जब उन्होंने अस्त-व्यस्त हालत में कामेन को देखा, तो उन्होंने तुरंत उसे पकड़ लिया, अपनी गश्ती कार की पिछली सीट पर बिठाया और एक संदिग्ध हत्यारे के रूप में उससे पूछताछ की. 

यह भी पढ़ें: जब एडिसन को मिला फोनोग्राफ का पेटेंट, संगीत की दुनिया में ऐसे आई थी क्रांति

गवाहों द्वारा यह स्पष्ट किए जाने पर ही कि कामेन वह व्यक्ति नहीं था जिसकी पुलिस तलाश कर रही थी, उसे रिहा किया गया और उसे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की विकिरण प्रयोगशाला में वापस जाकर उस ग्रेफाइट के टुकड़े को देखने की अनुमति दी गई, जिस पर वह और रुबेन काम कर रहे थे.

यह भी पढ़ें: जब एडिसन को मिला फोनोग्राफ का पेटेंट, संगीत की दुनिया में ऐसे आई थी क्रांति

जब वो लैब पहुंचे तो उन्हें यह समझने में ज़्यादा समय नहीं लगा कि उन्होंने असाधारण गुणों वाला एक पदार्थ बनाया है. ग्रेफाइट को विकिरणित करके उन्होंने कार्बन-14 का निर्माण किया था. इसने तब से लेकर अब तक कई वैज्ञानिक क्षेत्रों में क्रांति ला दी है और वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण खोजें करने में लगातार मदद कर रहा है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement