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'फ्लावर से फायर' बनकर उभरे पुष्कर सिंह धामी तो सतपाल महाराज ही उत्तराखंड के असल 'महाराज'

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो गया है. पुष्कर सिंह धामी ने अपने पास गृह, राजस्व, सूचना सहित 21 मंत्रालय रखे हैं तो कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और धन सिंह रावत का भी सियासी कद बढ़ा है. दोनों ही नेताओं को पुराने मंत्रालय के साथ-साथ नई जिम्मेदारी भी सौंपी गई हैं.

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सतपाल महाराज और पुष्कर सिंह धामी
सतपाल महाराज और पुष्कर सिंह धामी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सतपाल महाराज और धन सिंह रावत का बढ़ा कद
  • सीएम पुष्कर धामी ने 21 मंत्रालय अपने पास रखे
  • पहली बार बने मंत्रियों को कद के हिसाब से मिला विभाग

उत्तराखंड में सरकार गठन के एक सप्ताह के बाद आखिरकार मंगलवार शाम मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया गया है. विधानसभा चुनाव में अपनी सीट से हारने के बाद मुख्यमंत्री बने पुष्कर सिंह धामी ने अपने पास 21 मंत्रालय के साथ 23 विभाग रखे हैं जबकि पिछले कार्यकाल में उनके पास 12 मंत्रालय थे. वहीं, कैबिनेट मंत्री बने सतपाल महाराज के विभागों के साथ किसी तरह का कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है. एक बार फिर से उन्हें सबसे पावरफुल मंत्रालय का जिम्मा मिला तो धन सिंह रावत का कद बढ़ा है. इस तरह धामी जहां 'फ्लावर से फायर' बनकर उभरे तो सतपाल ही उत्तराखंड के असल 'महाराज' साबित हुए हैं. 

धामी ने पिछली बार से ज्यादा विभाग रखें अपने पास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों के कामकाज का बंटवारा कर दिया है. आबकारी, ऊर्जा, पेयजल, श्रम, गृह, राजस्व, कार्मिक, राज्य संपत्ति, नियोजन, सूचना, न्याय, आपदा प्रबंधन, नगारिक उड्डयन समेत 21 मंत्रालय को धामी ने अपने पास रखा है. पिछले कार्यकाल में उनके पास 12 मंत्रालय थे, लेकिन इस बार धामी ने जिस तरह से विकास कार्यों से जुड़े विभागों को अपने पास रखा है, उससे संदेश साफ है. धामी अब 'नाइट वाचमैन' के रूप में नहीं बल्कि लंबी पारी खेलने के लिए उतरे हैं. 

उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी की सत्ता में ताजपोशी जुलाई 2021 में हुई थी. उन्होंने सात महीने के पारी में बेहतर प्रदर्शन किया. वो अपनी सीट भले ही हार गए, लेकिन बीजेपी को सत्ता में वापसी कराकर इतिहास रच दिया है. ऐसे में बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें सत्ता की कमान देकर एक और मौका दिया है. मुख्यमंत्री धामी ने अपने पास वो तमाम विभाग रखें हैं, जो सीधे जनता से जुड़े हुए हैं. उत्तराखंड में भ्रष्टाचार पर प्रहार करने को धामी ने सतर्कता सुराज, भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा विभाग अपने पास ही रखा है. 

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सतपाल ही बने उत्तराखंड के महाराज

सतपाल महाराज को को भले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी न मिली हो, लेकिन उन्हें जिस तरह के विभाग दिए गए हैं, उससे साफ है कि उत्तराखंड से असल महाराज वही हैं. धामी कैबिनेट में मंत्री सतपाल महाराज के मंत्रालय में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है बल्कि कद भी बढ़ा दिया गया है. महाराज के लोक निर्माण विभाग, संस्कृति, धर्मस्व, पर्यटन, जलागम प्रबंधन, सिंचाई एवं लघु सिंचाई मंत्रालय को बरकरार रखते हुए पंचायती राज और ग्रामीण निर्माण के रूप में नए मंत्रालय का जिम्मा दिया गया है. 

सतपाल महाराज के पास वो तमाम मंत्रालय हैं, जो उत्तराखंड में सबसे पावरफुल माने जाते हैं. उत्तराखंड की पूरी आर्थिक व्यवस्था पर्यटन पर टिकी हुई है तो धार्मिक और भारतीय संस्कृति वाला यह राज्य माना जाता है. हरिद्वार से लेकर चार धाम तक उत्तराखंड में है. पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व मंत्रालय सतपाल महाराज के पास है. इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, पंचायती और ग्रामीण विकास मंत्रालय भी उनके पास है. इस तरह से सतपाल महाराज के पास उत्तराखंड में पर्यटन से लेकर विकास तक को बुलंदी पर ले जाने का जिम्मा सतपाल महाराज को मिला है.  

डॉ. धन सिंह रावत का बढ़ा कद

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल डॉ. धन सिंह रावत को भले ही सत्ता की कमान न मिली हो, लेकिन कैबिनेट में उन्हें अहम जिम्मेदारियां मिली हैं. पहली सरकार में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण का जिम्मा देख रहे धन सिंह रावत के कंधों पर अब शिक्षा विभाग की भी जिम्मेदारी दी गई है. इससे पहले, शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी अरविंद पांडे के कंधों पर थीं. अब उनके पास बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कृत शिक्षा, सहकारिता, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा की जिम्मादेरी होगी. 

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सूबे में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर उपलब्ध कराने से लेकर शिक्षा व्यवस्था की दशा और दिशा को सुधारने का जिम्मा धन सिंह रावत के ऊपर होगा. वहीं, सहकारिता विभाग मिला है, जो केंद्र में अमित शाह संभाल रहे हैं. इसे में उनके सियासी कद का अंदाजा लगाया जा सकता है. साथ ही उत्तराखंड में सिक्षा के साथ संस्कृत शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. इस तरह से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने का साथ शिक्षा में संघ परिवार का एजेंडा लागू करने की कमान सौंपी है. 

प्रेमचंद के पास शहरी विकास 

धामी कैबिनेट में शामिल किए गए कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को वित्त मंत्रालय दिया गया है. वह शहरी विकास एवं आवास, विधायी एवं संसदीय कार्य, पुनर्गठन एवं जनगणना मंत्रालय भी देखेंगे. हालांकि मंत्री सुबोध उनियाल को कुछ हलका किया गया है, उनके पास अब कृषि एवं उद्यान मंत्रालय नहीं होंगे, उन्हें इस बार वन, भाषा, निर्वाचन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्रालय दिए गए हैं. 

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सैनिक कल्याण व ग्राम्य विकास के साथ कृषि एवं उद्याग विभाग भी देखेंगे. कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य का भी कद बढ़ाया गया है. वह महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास के अलावा खेल एवं युवा कल्याण तथा खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले का मंत्रालय देखेंगी. 

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पहली बार बने मंत्रियों को मिला जिम्मा

मंत्रिमंडल में पहली बार शामिल हुए कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास को समाज कल्याण, परिवहन एवं लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्यम मंत्रालय दिए गए हैं. नए व युवा कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा को पशुपालन, दुग्धन विकास एवं मत्स्य पालन, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, प्रोटोकाल व कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग दिए गए है. इस तरह से नए मंत्रियों के कंधों पर अभी फिलहाल हल्के फुल्के विभाग दिए हैं, लेकिन उन्हें शीर्ष नेतृत्व की उम्मीदों और कसौटी पर खरा उतरना होगा? 

 

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