नैनीताल हाई कोर्ट ने सरकार को राज्य के सबसे वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी राजीव भरतरी को 4 अप्रैल सुबह 10:00 बजे तक प्रमुख वन संरक्षक का पदभार सौंपने के आदेश दिए है. मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में यह सुनवाई हुई. दरअसल वर्तमान प्रमुख वन संरक्षक विनोद सिंघल की पुनर्विचार याचिका कैट ने 22 मार्च को खारिज कर दिया था लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रमुख वन संरक्षक का चार्ज ना देने पर राजीव भरतरी ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार से पदभार सौंपने का आदेश दे दिया.
पेड़ों की कटान की जांच कर रहे थे राजीव
कॉर्बेट नेशनल पार्क में पेड़ों की कटान की जांच कर रहे प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी का तबादला जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष पद पर कर दिया गया था. इस आदेश को राजीव भरतरी ने कैट की अदालत में चुनौती दी थी. कैट ने उनके पक्ष में निर्णय देते हुए उन्हें तत्काल बहाल करने के आदेश राज्य सरकार को दिए थे लेकिन इस आदेश होने के बाद भी उनकी बहाली नहीं हुई.
विनोद सिंघल अभी तक उस पद पर बने हुए हैं. आईएफएस राजीव भरतरी ने याचिका में कहा कि विनोद सिंघल को हटाया जाए और उनको नियुक्त किया जाए. इस आदेश के खिलाफ विनोद सिंघल ने कैट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी. वह भी 22 मार्च को खारिज हो गई थी.
2021 में सरकार ने कर दिया था ट्रांसफर
राजीव भरतरी ने याचिका में कहा कि वे राज्य के सबसे वरिष्ठ भारतीय वन सेवा के अधिकारी हैं. सरकार ने 25 नवंबर 2021 को उनका ट्रांसफर प्रमुख वन संरक्षक पद से अध्यक्ष जैव विविधता बोर्ड के पद पर कर दिया था, जिसको उन्होंने संविधान के खिलाफ माना. इस संबंध में उन्होंने सरकार को 4 प्रत्यावेदन दिए लेकिन सरकार ने इन प्रति आवेदनों की सुनवाई नहीं की. भरतरी ने कहा कि उनका स्थानांतरण राजनीतिक कारणों से किया गया है, जिसमें उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है.
ऐसी चर्चा है कि पीसीसीएफ राजीव भरतरी के स्थानांतरण के पीछे एक मुख्य कारण कॉर्बेट नेशनल पार्क के भीतर हो रहे अवैध निर्माण व इन निर्माणों की राजीव भरतरी द्वारा की जा रही जांच को प्रभावित करना भी माना जा रहा था. आरोप है कि तत्कालीन वन मंत्री एक अधिकारी के समर्थन में राजीव भरतरी को पीसीसीएफ पद व कॉर्बेट में हो रहे निर्माण कार्यों की जांच से हटाना चाहते थे.