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हिंदू युवक ने मुस्लिम बनकर कैसे रोका बवाल… जानिए कोटद्वार के उस 'मोहम्मद' दीपक कुमार की कहानी, उन्हीं की जुबानी

कोटद्वार में  बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर दुकान के नाम को लेकर भड़के तनाव के बीच हिंदू युवक दीपक कुमार ने खुद को मुस्लिम बताकर हालात संभालने की कोशिश की. बुजुर्ग दुकानदार के अपमान और बढ़ती भीड़ को देखकर दीपक ने यह फैसला लिया. दीपक का कहना है कि उनका मकसद किसी का पक्ष लेना नहीं, बल्कि बवाल रोकना था. घटना के बाद आरोप, डर और नुकसान के बावजूद वह शांति की अपील कर रहे हैं.

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दीपक ने भीड़ को अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया (Photo:ITG)
दीपक ने भीड़ को अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया (Photo:ITG)

उत्तराखंड के शांत, छोटे और आपसी सौहार्द के लिए पहचाने जाने वाले शहर कोटद्वार में जो कुछ हुआ, उसने अचानक इस शहर को सुर्खियों में ला दिया. वजह न कोई बड़ा आंदोलन था, न कोई राजनीतिक रैली बल्कि एक ऐसी घटना थी, जिसमें एक हिंदू युवक ने खुद को मुस्लिम बताकर हालात को संभालने की कोशिश की. यह कहानी है उस पल की, जब हालात बिगड़ रहे थे, एक बुजुर्ग अपमानित हो रहा था और माहौल गरम था. उसी पल दीपक कुमार ने वह कहा, जिसने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया मेरा नाम मोहम्मद दीपक है, बताओ क्या करना है. 

दीपक उस दिन को याद करते हैं, जब देहरादून से बड़ी संख्या में लोग कोटद्वार पहुंचे. उनके मुताबिक, करीब डेढ़ से दो सौ लोगों का एक समूह इलाके में आया. माहौल अचानक बदल गया. नारे, गालियां, अपशब्द. सब कुछ एक साथ. वह बताते हैं मेरे साथ चार-पांच लड़के थे. सामने संख्या ज्यादा थी. तीन-चार घंटे तक लगातार गाली-गलौज होती रही. मां-बहन की गालियां दी गईं. मेरी फैमिली तक को नहीं छोड़ा गया उनके मुताबिक, उस वक्त माहौल इतना बिगड़ा हुआ था कि किसी भी छोटी सी बात पर बड़ा बवाल हो सकता था.

दुकान के नाम पर शुरू हुआ बवाल 

पूरा विवाद एक दुकान के नाम को लेकर शुरू हुआ. बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर दुकान के मालिक वकील अहमद, उम्र करीब 70 साल. उन पर दबाव डाला जा रहा था कि वे अपनी दुकान का नाम बदलें. दीपक कहते हैं कि जिस तरह से बुजुर्ग से बात की जा रही थी, वह उन्हें गलत लगी. उनकी उम्र देखिए. करीब सत्तर साल के आदमी से इस तरह की बदतमीजी हो रही थी. कोई सरकारी कागज नहीं, कोई नोटिस नहीं. बस दबाव की दुकान का नाम बदल लो. 

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दीपक कहते हैं कि आज के दौर में आमतौर पर लोग किसी और के झगड़े में पड़ने से बचते हैं. यह बात वह भी जानते थे. लेकिन वह कहते हैं कि उस दिन उनसे चुप नहीं रहा गया. वह कहते हैं कि गलत जब आंखों के सामने हो रहा हो, तो चुप रहना भी एक तरह की गलती होती है. उन्होंने भीड़ से बस इतना पूछा अगर नाम बदलवाना है, तो उसके लिए सरकारी आदेश कहां है? बिना किसी दस्तावेज के किसी को मजबूर कैसे किया जा सकता है?

जब पूछा गया नाम, तब लिया फैसला

हालात और बिगड़ रहे थे. बहस तेज हो चुकी थी. इसी दौरान दीपक से उनका नाम पूछा गया. यही वह पल था, जिसने पूरी कहानी को नया एंगल दे दिया. दीपक कहते हैं कि मैंने उस वक्त कहा मेरा नाम मोहम्मद दीपक है. यह सुनते ही वहां मौजूद कई लोग चौंक गए. माहौल कुछ सेकंड के लिए थम सा गया. दीपक साफ करते हैं कि वह न तो अपना धर्म बदल रहे थे, न पहचान छुपा रहे थे. उनका असली नाम दीपक कुमार है और वह हिंदू हैं. लेकिन उस वक्त उन्होंने जानबूझकर ऐसा कहा. वह कहते हैं कि मुझे लगा कि सामने वाले शायद सिर्फ एक ही कौम को टारगेट कर रहे हैं. मैंने सोचा कि अगर मैं खुद को उसी पहचान से जोड़ दूं, तो शायद उन्हें एहसास हो कि वे क्या कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह किसी को डराने या उकसाने के लिए नहीं था, बल्कि हालात को रोकने की एक कोशिश थी.

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मैं हिंदू हूं, लेकिन पहले हिंदुस्तानी

दीपक कहते हैं कि मैं हिंदू हूं और मुझे अपने धर्म पर गर्व है. लेकिन उससे पहले मैं हिंदुस्तानी हूं. इस देश में हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई सब रहते हैं. वह सवाल करते हैं कि अगर हम एक-दूसरे को ही दुश्मन मान लेंगे, तो देश कैसे चलेगा?  उनके मुताबिक, धर्म का मतलब किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि अपने आचरण को बेहतर बनाना है. दीपक मानते हैं कि हालात पूरी तरह नहीं रुके, लेकिन टकराव उस स्तर तक नहीं गया, जहां जान-माल का नुकसान हो सकता था. वह कहते हैं कि अगर उस वक्त और उकसावा होता, तो कुछ भी हो सकता था. मैंने बस कोशिश की कि माहौल और न बिगड़े. 

इसके बाद शुरू हुआ दूसरा दौर

घटना के बाद कहानी ने सोशल मीडिया का रास्ता पकड़ लिया. दीपक कुमार को कोई उन्हें कांग्रेस समर्थक बता रहा था, कोई मुस्लिम संगठन से जोड़ रहा था. दीपक कहते हैं कि  लोग अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से कहानी बना रहे हैं.  उनका कहना है कि उनका किसी राजनीतिक दल या संगठन से कोई लेना-देना नहीं है.

आरोप, जांच और FIR

दीपक के खिलाफ भी FIR दर्ज हुई. वह कहते हैं कि हमने कौन सा गुनाह किया? हमने तो एक बुजुर्ग की मदद की, गलत का विरोध किया. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच चल रही है, अज्ञात लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई पर विचार हो रहा है.

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आर्थिक नुकसान भी कम नहीं

इस पूरे विवाद का असर उनके काम पर भी पड़ा है. दीपक का जिम कई दिनों से बंद है. जिम किराए की जगह पर है, वह बातते हैं कि जिसका हर महीने करीब 50 हजार रुपये किराया जाता है. तीन-चार दिन में ही बड़ा नुकसान हो गया है. वह बताते हैं कि घर में उनकी मां, पत्नी और पांच साल की बेटी है. मां छोटी सी चाय की दुकान चलाती हैं. अपने बारे में तो आदमी झेल लेता है, लेकिन परिवार के लिए डर लगता है.

 

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