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केदारनाथ: चार दिन में चार तीर्थ यात्रियों की मौत, उठे सवाल

केदारनाथ धाम की यात्रा को शुरू हुए महज चार दिन हुए हैं लेकिन अब तक चार तीर्थ यात्रियों की मौत हो चुकी है. यात्रा मार्ग पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री ने लोगों से पूरी जानकारी के बाद ही यात्रा शुरू करने की अपील की है. वहीं कांग्रेस ने व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं.

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केदारनाथ यात्रा के दौरान चार तीर्थ यात्रियों की मौत केदारनाथ यात्रा के दौरान चार तीर्थ यात्रियों की मौत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केदारनाथ धाम में बीमार पड़ने से तीन तीर्थ यात्रियों की मौत
  • पैर फिसलकर खाई में गिरने से गुरुग्राम के यात्री की मौत

केदारनाथ यात्रा को शुरू हुए अभी चार दिन ही हुए हैं लेकिन इस दौरान चार तीर्थ यात्रियों की अब तक मौत हो चुकी है. पैदल मार्ग पर तबियत बिगड़ने से जहां एक महिला की मौत हो गई  वहीं दो महिलाओं की केदारनाथ धाम में स्वास्थ्य खराब होने से जान चली गई. इसके अलावा एक तीर्थ यात्री की सोनप्रयाग में गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई.

हर दिन हजारों तीर्थ यात्री केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं लेकिन रास्ते में तबियत बिगड़ने के बाद समय पर इलाज नहीं मिल पाने की वजह से यात्रियों की मौत हो रही है. गुजरात की रहने वाली सोनी छाया बेन 47 साल की उम्र में यात्रा पर आई थी. रास्ते में तबियत बिगड़ने के कारण वह परिजनों के साथ सोनप्रयाग लौट आईं. यहां से उन्हें जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग लाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

इसके अलावा बुलंदशहर की रहने वाली 67 साल की उर्मिला गर्ग की भी तबियत बिगड़ने से मौत हो गई. वहीं मध्य प्रदेश की रहने वाली एक अन्य महिला की भी तबितय बिगड़ने से जान चली गई. दोनों शवों का पंचनामा करने के बाद पुलिस ने उसे हेलिकॉप्टर से गुप्तकाशी भेज दिया.

पोस्टमार्टम के बाद शवों को परिजनों को सौंप दिया गया. वहीं केदारनाथ यात्रा पर गए गुरुग्राम के रहने वाले प्रवीण सैनी गौरीकुंड के पास पैर फिसल जाने के कारण लगभग 150 मीटर गहरी खाई में गिर गए जहां मौके पर ही उनकी मौत हो गई.
  
वहीं तीर्थ यात्रियों की मौत को लेकर डॉ प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि केदारनाथ धाम में अत्यधिक ठंड है और कई तीर्थयात्री बिना जानकारी के यहां पहुंच रहे हैं. धाम में स्वास्थ्य केन्द्र में सबसे ज्यादा मरीज हाइपोथर्मिया के आ रहे हैं.

ऐसे में उन्हें सलाह दी जा रही है कि वे सुरक्षात्मक तरीके से केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू करें. श्रद्धालुओं को बताया जा रहा है कि यह बीमारी अत्यधिक ठंडे इलाके में जाने से होती है, ऐसे में अपनी सावधानी के साथ यात्रा करें. उन्होंने बताया कि केदारनाथ धाम में भक्तों की लंबी कतार लगी हुई है. 

क्या होता है हाइपोथर्मिया बीमारी

हाइपोथर्मिया तब होता है जब शरीर तेजी से गर्मी खोता है और ठंडा पड़ने लगता है. इस दौरान शरीर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर जाता है. सामान्य शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है.

हाइपोथर्मिया अक्सर ठंडे मौसम में या ठंडे पानी में जाने से होता है. इससे बचाव के लिए सर्दी में बाहर जाने पर सुरक्षात्मक उपाय जरूरी हैं. इसके लिए मोजे, टोपी, गर्म कंबल, हीटर और गर्म पानी की बोतल का उपयोग करते हुए सफर करना चाहिए.

भीड़ को देखकर सीएम ने की अपील

बता दें कि केदारनाथ में 3 दिन में दर्शन करने वालों की संख्या 60,000 को पार कर चुकी है जबकि बद्रीनाथ में 1 दिन में दर्शन करने वालों की संख्या 25 हज़ार के पार पहुंच चुकी है. यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने पुष्कर सिंह धामी अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले रहने और दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें.

कांग्रेस ने उठाए सवाल

केदारनाथ यात्रा के दौरान तीर्थ यात्रियों की मौत को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन महारा ने व्यवस्था को लेकर खड़े किए हैं. उन्होंने कहा, न तो यात्रा मार्ग में कहीं शौचालय की व्यवस्था है (जो हैं भी वो पुराने हैं) और न ही कहीं स्वास्थ्य सुविधाओं को देखा जा रहा है. सरकार को यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना करनी चाहिए थी और हर जगह कम से कम एक डॉक्टर और एयर एंबुलेस की व्यवस्था होनी चाहिए.

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