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यमुना एक्सप्रेस पर बनेंगे इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन, जेवर एयरपोर्ट से होगी सीधी कनेक्टिविटी

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत सौर ऊर्जा होने की संभावना है. इतने बड़े एयरपोर्ट को चलाने के लिए इतनी बड़ी मात्रा में बिजली का उत्पादन करने के लिए एयरपोर्ट परिसर में हजारों सोलर पैनलों के साथ एक पार्क विकसित किया जाएगा. इसके अलावा एयरपोर्ट की छतों को बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त सोलर पैनल लगाने में इस्तेमाल किया जाएगा.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 5,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर बनना है एयरपोर्ट
  • अभी पहले चरण का निर्माण 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आधारशिला रखेंगे. जेवर एयरपोर्ट से कई बदलाव आएंगे. इसी के साथ यमुना एक्सप्रेसवे इलेक्ट्रिक व्हीकल हाईवे में बदल जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि यह एयरपोर्ट जीरो एमिशन होगा, जैसा पीएम मोदी और सीएम योगी ने ऐलान किया है. 

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत सौर ऊर्जा होने की संभावना है. इतने बड़े एयरपोर्ट को चलाने के लिए इतनी बड़ी मात्रा में बिजली का उत्पादन करने के लिए एयरपोर्ट परिसर में हजारों सोलर पैनलों के साथ एक पार्क विकसित किया जाएगा. इसके अलावा एयरपोर्ट की छतों को बिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त सोलर पैनल लगाने में इस्तेमाल किया जाएगा.  

चार्जिंग प्वाइंट और बैटरी बदलने जैसी सुविधाएं मिलेंगी 
दरअसल, पीएम मोदी ने हाल ही में जीरो कार्बन उत्सर्जन एयरपोर्ट पर फोकस कर रहे हैं, ऐसे में यमुना हाईवे, जो एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी के लिए प्रमुख साधन होगा, उसे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ग्रीन हाईवे में तब्दील किया जाएगा. यह भारत का पहला और इकलौता हाईवे होगा जहां इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन और बैटरी बदलने जैसी सभी सुविधाएं होंगी. यह हाईवे दिल्ली-एनसीआर को मथुरा, आगरा और पश्चिम यूपी के हिस्सों से जोड़ता है. 

ग्रेटर नोएडा की जेवर सीट से भाजपा विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा, जलवायु परिवर्तन वास्तविक है और हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कड़े कदम उठाने के लिए दृढ़ हैं. इसी दिशा में जेवर में जीरो एमिशन वाला एयरपोर्ट और हाईवे होगा, जो एयरपोर्ट तक जीरो एमिशन के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल का सपोर्ट करेगा. 

एयरपोर्ट की होंगी ये विशेषताएं
एयरपोर्ट  5,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर बनना है. हालांकि, पहला चरण के तहत 1300 हेक्टेयर पर निर्माण किया जाएगा. 8 रनवे के साथ यह एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा. पहले चरण में 2 रनवे तैयार किए जाएंगे. बताया जा रहा है कि 2024 के अंत तक दो में से कम से कम एक रनवे शुरू हो जाएगा.  Zurich एयरपोर्ट इस एयरपोर्ट को बना रहा है. पहले चरण की लागत करीब 10050 करोड़ बताई जा रही है. वहीं, कुल औसत 30 हजार करोड़ रुपए होगी. 

एयरपोर्ट पर ग्राउंड ट्रांस्पोर्टेशन सेंटर विकसित किया जायेगा, जिसमें मल्टी मॉडल ट्रांजिट केंद्र होगा. मेट्रो और हाई स्पीड रेलवे के स्टेशन होंगे, टैक्सी, बस सेवा और निजी वाहन पार्किंग सुविधा मौजूद होगी. इस तरह हवाई अड्डा सड़क, रेल और मेट्रो से सीधे जुड़ने में सक्षम हो जाएगा. इतना ही नहीं आसपास के सभी प्रमुख मार्ग और राजमार्ग, जैसे यमुना एक्सप्रेस-वे, वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे तथा अन्य भी हवाई अड्डे से जोड़े जाएंगे. एयरपोर्ट को प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल से भी जोड़ने की योजना है, जिससे दिल्ली और हवाई अड्डे के बीच का सफर मात्र 21 मिनट का हो जाएगा. 


 

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