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वाराणसी: ...जब 1896 में जन्मे 125 साल के स्वामी शिवांनद वैक्सीन लगवाने पहुंचे

डॉक्टर और वॉलिंटियर उस समय हैरान हो गए जब उन्होंने टीकाकरण केंद्र पर पहुंचे एक बुजुर्ग का रजिस्ट्रेशन करना चाहा. आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट पर अंकित स्वामी शिवानंद की जन्मतिथि 1896 होने की वजह से रजिस्ट्रेशन कराने में दिक्कत हुई.

स्वामी शिवानंद के आधार कार्ड पर जन्म का साल 1896 अंकित स्वामी शिवानंद के आधार कार्ड पर जन्म का साल 1896 अंकित
स्टोरी हाइलाइट्स
  • स्वामी शिवानंद की जन्मतिथि 1896 होने से हुई दिक्कत
  • पोर्टल पर साल 1900 से ही रजिस्ट्रेशन की शुरुआत
  • स्वामी शिवानंद ने कोविशिल्ड की पहली डोज लगवाई

वाराणसी में चल रहे कोरोना वैक्सीनेशन कार्यक्रम में एक नया और हैरान करने वाला अध्याय उस वक्त जुड़ गया जब 125 साल के स्वामी शिवानंद ने वैक्सीनेशन सेंटर पहुंचकर कोरोना का पहला टीका लगवाया. हालांकि इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना आसान नहीं था क्योंकि उनकी पैदाइश 1900 से पहले की है. वैक्सीन लेने के बाद उन्होंने सभी से वैक्सीन लगाने की अपील भी की.

शहर के दुर्गाकुंड इलाके के यूसीएचसी पर तैनात डॉक्टर और वॉलिंटियर उस समय हैरान हो गए जब उन्होंने टीकाकरण केंद्र पर पहुंचे एक बुजुर्ग शख्स का रजिस्ट्रेशन करना चाहा, लेकिन आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट पर अंकित बुजुर्ग शख्स स्वामी शिवानंद का डेट ऑफ बर्थ 1896 होने के चलते सभी इस चिंता में डूब गए कि पोर्टल पर साल 1900 से ही रजिस्ट्रेशन की शुरुआत है.

जिसके बाद सभी ने बुजुर्ग स्वामी शिवानंद का 1900 के वर्ष में डेट ऑफ बर्थ में रजिस्ट्रेशन कर लिया और खुद को दुनिया का सबसे उम्रदराज और स्वस्थ व्यक्ति बताने वाले स्वामी शिवानंद ने कोरोना वैक्सीन की पहली कोविशिल्ड डोज ली.

लंबी उम्र की वजह से चर्चित
दरअसल, दुर्गाकुंड इलाके में स्थित कबीर नगर कॉलोनी में रहने वाले 125 वर्ष के बुजुर्ग शिवानंद एक नामचीन शख्सियत है और अक्सर अपने नियमित संयमित और स्वस्थ्य तथा लंबी उम्र की वजह से चर्चा में रहते हैं. जब स्वामी शिवानंद टीकाकरण केंद्र पर पहुंचे तो उनको कोई पहचान नहीं सका.

इस बारे में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की प्रदेश मंत्री और टीकाकरण केंद्र पर एक वॉलिंटियर के तौर पर काम करने वाली साक्षी सिंह ने आजतक को बताया कि बुजुर्ग स्वामी शिवानंद के टीकाकरण केंद्र पर आते ही वह उनकी मदद के लिए आगे आई, लेकिन जैसे ही उनके आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों पर उनकी उम्र का वर्ष 1896 देखा तो इस सोच में पड़ गई कि डेट ऑफ बर्थ लिस्ट की शुरुआत ही पोर्टल पर वर्ष 1900 से है तो आखिर स्वामी शिवानंद का रजिस्ट्रेशन वैक्सीनेशन के लिए होगा तो कैसे? जिस पर वहां मौजूद अन्य स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टर से राय भी लिया गया.

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उन्होंने बताया कि मजबूरी में 125 वर्षीय स्वामी शिवानंद का पंजीयन वर्ष 1900 के डेट ऑफ बर्थ में ही किया गया और फिर कहीं जाकर स्वामी शिवानंद को कोविशिल्ड की पहली डोज लग सकी. इस दौरान साक्षी सिंह ने स्वामी शिवानंद से बात भी की. जिन्होंने बताया कि सभी को कोरोना का टीका जरूर लगाना चाहिए.

ब्राह्मण परिवार में हुआ था जन्म
स्वामी शिवानंद का जन्म 8 अगस्त 1896 को श्रीहट्ट जिला के हबिगंज महकुमा, ग्राम हरिपुर के थाना क्षेत्र बाहुबल में एक भिखारी ब्राह्मण गोस्वामी परिवार में हुआ था. मौजूदा समय में ये जगह बांगलादेश में स्थित है. शिवानंद के मां-बाप भिखारी थे और दरवाजे-दरवाजे भीख मांगकर अपनी जीविका चलाते थे.

4 साल की उम्र में उनके माता-पिता ने उनकी बेहतरी के लिए उन्हें नवद्वीप निवासी बाबा श्री ओंकारनंद गोस्वामी के हाथ समर्पित कर दिया. जब शिवानंद 6 साल के थे तो उनके माता-पिता और बहन का भूख के चलते निधन हो गया. जिसके बाद उन्होंने अपने गुरुजी के सानिध्य में आध्यात्म की शिक्षा लेना शुरू किया और उन्हीं की प्ररेणा से आज तक कुंआरा जीवन जी रहे हैं.

मौजूदा समय में स्वामी शिवानंद वाराणसी के दुर्गाकुंड इलाके में स्थित कबीरनगर कॉलोनी में रहते हैं और कभी-कभी कोलकाता भी जाया करते हैं. स्वामी शिवानंद के पास उनकी उम्र के प्रमाण के तौर पर वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड और पासपोर्ट भी हैं. स्वामी शिवानंद की लंबी उम्र का राज नियमित संयमित जीवन और सादा जीवन उच्च विचार है.

 

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