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Varanasi: काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे आज, चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर स्थित श्रृंगार गौरी सहित अन्य विग्रहों में दर्शन पूजन और सुरक्षा की मांग पर आज सर्वे और वीडियोग्राफी होनी है. इस सर्वे से पहले काशी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

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काशी धाम की बढ़ाई गई सुरक्षा काशी धाम की बढ़ाई गई सुरक्षा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोर्ट कमिश्नर की अगुवाई में होगा सर्वे
  • सर्वे से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा, रखी जा रही है नजर

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर स्थित श्रृंगार गौरी सहित अन्य विग्रहों में दर्शन पूजन और सुरक्षा की मांग को लेकर वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन की ओर से कमीशन की कार्रवाई के तहत आज कोर्ट कमिश्नर की ओर से सर्वे और वीडियोग्राफी होनी है. इस सर्वे से पहले काशी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

इसमें वादी हिंदू पक्ष से लगभग 15 लोग तो वहीं कोर्ट कमिश्नर की टीम में उनके अलावा दो सहयोगी और 3 फोटो और वीडियो ग्राफर भी मौजूद रहेंगे. प्रतिवादी मुस्लिम पक्ष से 5 वकील और अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी से भी लोग रहेंगे. सर्वे की कार्रवाई को देखते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.

मंदिर के अंदर दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं या किसी भी व्यक्ति की सघन चेकिंग करके ही उसे अंदर प्रवेश दिया जा रहा है. मस्जिद की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही पैरामिलिट्री फोर्स के हवाले है. सर्वे की कार्रवाई का समय लगभग 3:00 बजे दोपहर में सुनिश्चित किया गया है. इससे पहले ही हलचल बढ़ गई है.

क्या है पूरा मामला

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और उसी परिक्षेत्र में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का केस भले ही वर्ष 1991 से वाराणसी के स्थानीय अदालत में चल रहा हो और फिर हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही हो, लेकिन मां श्रृंगार गौरी का केस महज साढ़े 7 महीने ही पुराना है.

18 अगस्त 2021 को वाराणसी की पांच महिलाओं ने बतौर वादी वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना दर्शन पूजन की मांग सहित अन्य मांगों के साथ एक वाद दर्ज कराया था, जिसको कोर्ट ने स्वीकार करते हुए न केवल मौके की स्थिति को जानने के लिए वकीलों का एक कमीशन गठित करने अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त करने और तीन दिन के अंदर पैरवी का आदेश दिया था.

इतना ही नहीं विपक्षियों को नोटिस जारी करने के साथ ही सुनवाई की अगली भी तय कर दी थी, लेकिन दो-दो बार कोर्ट कमिश्नर के बैकफुट पर चले जाने के चलते विवादित स्थल का मौका मुआयना नहीं हो सका था. वाराणसी के सिविल जज सिनियर डिवीजन फास्ट ट्रेक के जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने पुराने 18 अगस्त के ही आदेश को फिर से दोहराते हुए बीते 8 अप्रैल को कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नियुक्त करते हुए कमीशन और वीडियोग्राफी की कार्रवाई करने की फिर से अनुमति दे दी थी.

इसके बाद प्रतिवादियों में से वाराणसी जिला प्रशासन और कमिश्नरेट पुलिस ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कार्रवाई को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मस्जिद में मुस्लिमों और सुरक्षाकर्मियों के ही जाने की दलील दी थी, जिसपर कोर्ट ने सुनवाई के बाद दलील को खारिज करते हुए अपने पुराने आदेश के जारी रखते हुए ईद के बाद कमीशन और वीडियोग्राफी की कार्रवाई करके 10 मई के पहले तक रिपोर्ट मांगी है और सुनवाई की तारीख भी 10 मई नियत कर दी है.

 

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