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उत्तर प्रदेश में इस साल नहीं होंगे पंचायत चुनाव, वोटर लिस्ट बनाने का काम शुरू

उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के बाबत मंगलवार को विस्तृत कार्यक्रम जारी किया. अक्तूबर से बूथ लेबल आफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर वोटर लिस्ट की जांच करेंगे और 29 दिसंबर को वोटर लिस्ट का प्रकाशन होगा. ऐसे में यह बात साफ हो गई है कि इस साल तो सूबे में पंचायत चुनाव किसी भी सूरत में नहीं हो सकेंगे.

यूपी में पंचायत चुनाव यूपी में पंचायत चुनाव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पंचायत चुनाव की प्रक्रिया मंंगलवार से शुरू हुई
  • फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन 29 दिसंबर को
  • यूपी ग्राम प्रधान का कार्यकाल 25 दिसंबर तक

कोरोना संक्रमण और लाकडाउन के बादल छटते ही उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है. राज्य राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के बारे में मंगलवार को विस्तृत कार्यक्रम जारी किया. अक्टूबर से बूथ लेबल आफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर वोटर लिस्ट की जांच करेंगे और 29 दिसंबर को वोटर लिस्ट का प्रकाशन होगा. ऐसे में यह बात साफ हो गई है कि इस साल तो सूबे में पंचायत चुनाव किसी भी सूरत में नहीं हो सकेंगे. 

दरअसल उत्तर प्रदेश की 59,163 ग्राम पंचायतों के मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल आगामी 25 दिसंबर को समाप्त हो रहा है. इसी क्रम में अगले साल 13 जनवरी को जिला पंचायत अध्यक्ष और 17 मार्च को क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है. सूबे में फिलहाल वोटर लिस्ट पुनरीक्षण के कार्यक्रम का ऐलान मंगलवार को किया गया है, जो करीब साढ़े तीन महीने तक चलेगा. ऐसे में इस साल पंचायत का चुनाव करवा पाना प्रशासन के लिए काफी मुश्किल है, क्योंकि पंचायत के चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को कम से कम छह माह का समय चाहिए. 

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस बार जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी, प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव एक साथ कराएगी. आयोग से जिलों को जो तैयारी कराने के निर्देश दिलवाए गए हैं, वह चारों पदों पर एक साथ चुनाव कराए जाने के क्रम में हैं. इससे साफ जाहिर है कि यूपी में जब भी चुनाव होंगे सभी पदों पर एक साथ होंगे. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के जारी कार्यक्रम से साफ है कि अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल ही हो सकते हैं. 29 दिसंबर को मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन होने से पंचायत चुनाव अगले वर्ष फरवरी या मार्च में होने की उम्मीद जताई जा रही है.  

उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी है. राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार के जारी आदेश के क्रम में कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए एक अक्टूबर से मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू होगा.15 सितंबर से ही बीएलओ और पर्यवेक्षकों को काम बांटने के साथ स्टेशनरी वितरण का काम शुरू कर दिया गया है. यह दोनों काम 30 सितंबर तक खत्म कर लेने होंगे. इसके बाद एक अक्टूबर से 12 नवंबर तक बीएलओ घर-घर जाकर गणना और सर्वेक्षण कार्य करेंगे. 

अभियान के तहत पिछले पंचायत चुनाव यानी साल  2015 के बाद से पहली जनवरी 2021 तक 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले ग्रामीण युवाओं को पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में नए वोटर के रूप में दर्ज किया जाएगा. इसी के साथ इस अवधि में मृत, अन्यत्र स्थानांतरित या डुप्लीकेट वोटरों के नाम हटाए भी जाएंगे. इसके अलावा किस ग्राम पंचायत का आंशिक भाग, अन्य ग्राम पंचायत या नगरीय निकाय में शामिल हुआ है. ऐसी सूरत में उस ग्राम पंचायत के आंशिक भाग या ग्राम पंचायत को प्रदेश की ग्राम पंचायतों की सूची से हटाया जाएगा. 
 

दिसंबर को फाइनल वोटर लिस्ट आएगी
13 नवंबर से 5 दिसम्बर के बीच वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट की कम्पयूटरीकृत पाण्डुलिपि तैयार की जाएगी. 6 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया जाएगा. इसके बाद 6 से 12 दिसंबर से इस वोटर लिस्ट में अपने नाम व अन्य विवरण की लोग जांच कर सकेंगे. इसी अवधि में वोटर लिस्ट के इस ड्राफ्ट की खामियों पर दावे और आपत्तियां मांगी जाएंगी. 13 से 19 दिसंबर के बीच इन दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा. इसके बाद 29 दिसंबर को इस वोटर लिस्ट के फाइनल ड्राफ्ट का प्रकाशन किया जाएगा. 

आयोग से अभी जिलों को जो तैयारी कराने के निर्देश दिए गए हैं, वह चारों पदों पर एक साथ चुनाव कराए जाने के क्रम में हैं. इससे साफ जाहिर है कि यूपी में जब भी चुनाव होंगे सभी पदों पर एक साथ होंगे. सूबे की पंचायतों का परिसीमन भी है. इसके अलावा जिन ग्राम पंचायतों को पिछले पांच साल में शहरी निकायों में शामिल किया गया है. उनको हटाकर अब ऐसी पंचायतों के नए सिरे से वार्ड भी तय होने हैं. ऐसे में अगले साल ही चुनाव की संभावना बनती नजर आ रही है. ऐसे में यूपी सरकार ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म कर ग्राम प्रधान और वार्ड सदस्यों को मिलाकर प्रशासनिक समिति का गठन कर सकती है. इस दौरान मौजदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाकर उनसे ही गांव में विकास कार्य करवाए जा सकते हैं. 
 

 

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