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UP के सरकारी अस्पतालों में नौकरी नहीं करना चाहते हैं डॉक्टर!

उत्तर प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों के खाली पदों के भरने के लिए बार-बार आवेदन मांगे जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टर इसमें दिलचस्पी ही नहीं दिखा रहे हैं. ऐसे में अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की वजह से मरीज बेहाल है. विशेषज्ञ डॉक्टरों के 1039 पदों पर भर्ती की गई थी, लेकिन उसमें भी तकरीबन 230 डॉक्टर ने ज्वॉइन ही नहीं किया.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में तकरीबन साढ़े 8 हजार से ऊपर डॉक्टरों की सख्त जरूरत है. बार-बार खाली पदों के भरने के आवेदन मांगे जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टर इसमें दिलचस्पी ही नहीं दिखा रहे हैं. ऐसे में अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की वजह से मरीज बेहाल है.

जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के चलते ऑनलाइन-ऑफलाइन आवेदन फॉर्म डॉक्टरों से भरवाए गए. आवेदन मांगे गए थे, जिसमें डॉक्टरों के ज्वॉइन ना करने से 433 खाली पदों के भरने की जद्दोजहद की जा रही है लेकिन इसके बावजूद भी डॉक्टर दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.

रिटायर डॉक्टर भी नहीं ले रहे हैं दिलचस्पी

इससे पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों के 1039 पदों पर भर्ती की गई थी, लेकिन उसमें भी तकरीबन 230 डॉक्टर ने ज्वॉइन ही नहीं किया. अब फिर स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर कमी चलते आवेदन दोबारा निकाले हैं, जिसमें सेवानिवृत्त डॉक्टरों को आवेदन मांगे गए हैं. 

इस बार डॉक्टर को ना मिलने की वजह से सेवानिवृत्त डॉक्टरों को दोबारा नौकरी करने के लिए आवेदन मांगे गए थे, जिसमें एचआरए भी दिया जाने की व्यवस्था शासन के द्वारा कर दी गई जिससे डॉक्टर आए, लेकिन इसके बावजूद भी सेवानिवृत्त डॉक्टर भी दोबारा ज्वॉइन नहीं कर रहे हैं.

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हर जिले में डॉक्टरों की कमी

उत्तर प्रदेश की बात करें तो श्रावस्ती में डॉक्टरों के 14 पद खाली हैं और आवेदन सिर्फ चार ही आए हैं. वही महोबा में 12 तो चित्रकूट में 13, हमीरपुर में 11, बलरामपुर में 10, मैनपुरी में 11, कासगंज में 12, कन्नौज में 10 पद खाली है, मगर इन जिलों में पदों की संख्या के कम आवेदन फॉर्म आए हैं.

स्वास्थ महानिदेशक लिली सिंह के मुताबिक, डॉक्टरों की प्रदेश भर में साढ़े 8000 से ऊपर कमी है, जिसको भरने में हम प्रयास कर रहे हैं, हमने आवेदन मांगे थे लेकिन आवेदन कम आए हैं, हमारी कोशिश है कि डॉक्टर आए हमारे पास क्योंकि अस्पतालों में दिक्कत है, अभी के लिए हमने डॉक्टरों से कहा है कि डबल शिफ्ट में काम करिए.

प्राइवेट ज्वॉइनिंग बेहतर समझ रहे हैं डॉक्टर

स्वास्थ महानिदेशक लिली सिंह ने कहा कि ज्यादातर डॉक्टर प्राइवेट ज्वॉइन कर लेते हैं और कम ही डॉक्टर सरकारी नौकरी में रुचि दिखा रहे हैं क्योंकि काम ज्यादा है, प्रेशर ज्यादा है. आज तक ने लखनऊ के सिविल हॉस्पिटल पहुंचकर मरीजों से बात की तो उन्होंने बताया कि यहां पर डॉक्टरों की कमी है, हम एडमिट है लेकिन कोई देखने नहीं आ रहा है.

अस्पताल में मरीज के साथ बैठे अटेंडेंट के मुताबिक, हमारे डिप्टी सीएम लगातार अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं, लगातार डॉक्टरों को निर्देश दे रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी अस्पताल में ना ही डॉक्टर हैं और ना ही व्यवस्था, यहां की मैं खुद बीजेपी का कार्यकर्ता हूं लेकिन जब मेरा भतीजा एडमिट हुआ तो डॉक्टर प्रॉपर तरीके से नहीं उपलब्ध हैं.

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हमीरपुर में 25 की जगह सिर्फ 8 डॉक्टर

यूपी के हमीरपुर जिला अस्पताल में 25 की जगह सिर्फ 8 डॉक्टर ही तैनात हैं. 100 बेड का अस्पताल है, जिसमें हर रोज करीब 700 मरीज इलाज कराने आते हैं. यहां पर रेडियोलॉजिस्ट, आर्थोपेडिक सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, कार्डियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजिशियन जैसे महत्वपूर्ण डॉक्टरों के ना होने से मरीजों के इलाज के लिए कानपुर जाना पड़ता है.

हमीरपुर जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ केके गुप्ता के मुताबिक, जिला अस्पताल में पिछले 3 सालों में डॉक्टर रिटायर्ड नहीं हुए हैं, नए किसी ने आवेदन नहीं किया, डॉक्टरों की कमी की पूरी करने के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को लिखा गया, लेकिन अभी तक किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है.

चित्रकूट में 8 डॉक्टरों की कमी

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्किन विभाग में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं है. चेस्ट विभाग में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं है. इसके अलावा जच्चा-बच्चा विभाग में डॉक्टरों की बहुत ज्यादा कमी है. यहां तक जच्चा बच्चा विभाग में मात्र 2 डॉक्टर है, जो 24 घंटे डिलीवरी का काम करवाते हैं. 

चित्रकूट जिले सीएमओ डॉक्टर भूपेश द्विवेदी के मुताबिक, तकरीबन 8 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, इसके बावजूद भी मरीजों को आए दिन दिक्कतों से रूबरू होना पड़ता है, चित्रकूट में 115 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी 80 डॉक्टर ही कार्य कर रहे हैं. ऐसे में अस्पताल के साथ-साथ मरीजों का भी बुरा हाल है.

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