कांशीराम ने जिन सिपहसलारों के साथ मिलकर दलित समाज में राजनीतिक चेतना जगाने के लिए बहुजन समाज पार्टी का गठन किया था. वो सभी नेता एक-एक कर बीएसपी का साथ छोड़ते जा रहे हैं. इस कड़ी में कांशीराम के साथी रहे पूर्व सांसद लालमणि प्रसाद भी मायावती के हाथी से उतरकर अखिलेश यादव की साइकिल पर सवारी करने जा रहे हैं.
उत्तर प्रदेश की बस्ती लोकसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के पूर्व सांसद लालमणि प्रसाद ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. लालमणि ने अपना इस्तीफा बसपा अध्यक्ष मायावती को भेज दिया है. माना जा रहा है कि शुक्रवार को दोपहर में अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी का दामन थामेंगे. ऐसे में बसपा के लिए यह करारा झटका माना जा रहा है.

लालमणि मौजूदा समय में सिद्धार्थनगर के जिला कोऑर्डिनेटर पर नियुक्त थे. उन्होंने अपने इस्तीफे में बसपा की मौजूदा नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा, लगता है कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के मूवमेंट से पार्टी भटक गई है, जिसके चलते बहुजन समाज में आक्रोश है.
बसपा में साइड लाइन चल रहे थे
बता दें कि बसपा में राम प्रसाद चौधरी के राजनीतिक प्रभाव के चलते लालमणि पार्टी में साइड लाइन चल रहे थे. इस बार के लोकसभा चुनाव में भी बसपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया था. बस्ती के सपा में दिग्गज नेता माने जाने वाले राजकिशोर सिंह कांग्रेस का दामन थाम लिया है. इस तरह से बस्ती में फिलहाल सपा का कोई कद्दावर नेता नहीं बचा है, जिसके चलते लालमणि ने अखिलेश यादव के साथ जाने का मन बनाया है.
लालमणि का सियासी सफर
बसपा के शुरुआती दौर से ही लालमणि पार्टी के साथ जुड़े थे. लालमणि पहली बार 1993 में सपा-बसपा गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़े और विधायक बने. इसके बाद 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में दोबारा बसपा से विधायक बनने में सफल रहे. इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने उन्हें बस्ती संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया और वह जीतकर संसद पहुंचे.
इसके बाद बसपा ने 2009 में उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद से लालमणि लगातार बसपा के संगठन का काम देख रहे थे. ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव में बस्ती से चुनावी किस्मत आजमाना चाहते थे, लेकिन इस बार भी मायावती ने उन्हें निराश किया.