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UP में खड़ा हो सकता है तीसरा मोर्चा, शिवपाल-कांग्रेस के बीच पक रही खिचड़ी

Lok sabha election 2019 को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी समीकरण सेट किए जाने लगे हैं. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस को अलग कर गठबंधन की कवायद कर रही है. वहीं, कांग्रेस ने शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना तलाशना शुरू कर दिया है.

शिवपाल यादव (फोटो-twitter) शिवपाल यादव (फोटो-twitter)

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस से गठबंधन को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिखाई है, दूसरी ओर कांग्रेस ने अपनी नई तैयारियां शुरू कर दी हैं. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना तलाशने में जुट गई है. हालांकि, अभी तक यूपी में किसी भी दल का किसी के साथ गठबंधन का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है.

सूत्रों की मानें तो शिवपाल यादव प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के गठन के बाद से ही लगातार कांग्रेस के साथ जाने को लेकर मन बना रहे हैं. इसके मद्देनजर कांग्रेस आलाकमान को अपना संदेश भेज रहे हैं. हाल ही में कांग्रेस के एक नेता से शिवपाल यादव की बातचीत भी हुई है. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस नेता पीएल पुनिया और शिवपाल यादव एक दूसरे के संपर्क में बताए जा रहे हैं.

माना जा रहा है कि सपा-बसपा गठबंधन से अलग तीसरे मोर्चे के रूप में शिवपाल यादव के साथ जाने की रणनीति को लेकर कवायद की जा रही है. शिवपाल तीन दिन पहले दिल्ली में थे. इस दौरान 2019 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर मंथन किया है.

हालांकि, शिवपाल यादव साफ तौर पर कह चुके हैं कि बीजेपी को हराने के लिए वो किसी भी गठबंधन के साथ जा सकते हैं. महागठबंधन में अगर उन्हें सम्मानजनक सीटें मिलती हैं तो वो इसका हिस्सा बन सकते हैं, नहीं तो दूसरे विकल्प भी खुले हुए हैं.

बता दें कि सपा और बसपा-दोनों फिलहाल कांग्रेस को लेकर अपनी रुचि नहीं दिखा रहे. दोनों आपसी गठबंधन के लिए सहमति तैयार करने में जुटे हैं. कांग्रेस को इस बात की पूरी जानकारी है और वह मायावती के जन्मदिन के दिन होने वाले बड़े कार्यक्रम पर अपनी नजरें लगाए हुए हैं. दरअसल, कहा जा रहा है कि इसी दिन यूपी में सपा-बसपा गठबंधन का ऐलान हो सकता है.

हालांकि, कांग्रेस फिलहाल सपा-बसपा गठबंधन से खुद को अलग नहीं मानती. वो अपने आपको महागठबंधन का हिस्सा मानती है. ऐसे में वह खुलकर शिवपाल यादव के साथ तब तक दिखना नहीं चाहती, जब तक उसके इस महागठबंधन में जुड़ने की संभावनाएं बची हुई हैं, लेकिन इसी बीच कांग्रेस का शिवपाल यादव के साथ बातचीत का रास्ता खोलना उसकी रणनीति एक हिस्सा माना जा रहा है.

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