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चंदौली में बाढ़ का सितम, कैसे होगी बहन-बेटियों की शा‍दी?

पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर लगातार जारी है. उफनाई गंगा ने सूबे में धान का कटोरा कहे जाने वाले चंदौली जिले के सौ से ज्यादा गावों को अपनी चपेट में ले लिया है. डेढ़ लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित है और हजारों हेक्टेयर फसल बरबाद हो गई है. बाढ़ के सितम ने लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं कि आने वाले दिनों में वे अपनी बहन बेटियों के हाथ पीले कैसे कर पाएंगे.

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यूपी में बाढ़ से बिगड़े हालात
यूपी में बाढ़ से बिगड़े हालात

पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर लगातार जारी है. उफनाई गंगा ने सूबे में धान का कटोरा कहे जाने वाले चंदौली जिले के सौ से ज्यादा गावों को अपनी चपेट में ले लिया है. डेढ़ लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित है और हजारों हेक्टेयर फसल बरबाद हो गई है. बाढ़ के सितम ने लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं कि आने वाले दिनों में वे अपनी बहन बेटियों के हाथ पीले कैसे कर पाएंगे.

चंदौली को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां की अधिकांश आबादी खेती पर ही निर्भर रहती है लेकिन पिछले एक महीने में तीन बार उफनाई गंगा के पानी ने चार हजार हेक्टेयर से ज्यादा धान की फसल को चौपट कर दिया है. लोग तबाह और बेहाल हैं. हालांकि स्थानीय प्रशाशन बाढ़ प्रभावित लोगों की हर संभव मदद कर रहा है लेकिन अब किसानों को इस बात की चिंता खाए जा रही है कि वे कम से कम दो साल तक अपनी बहन बेटियों के हाथ पीले नहीं नहीं कर पाएंगे.

चंदौली के रहने वाले किसान महेंद्र का कहना है कि बाढ़ का जो अभी तत्काल में असर है, वह काफी भयावह है. इसका सीधा-सीधा असर पड़ेगा कि हम आने वाले एक-दो साल में अपनी बहन बेटियों की शादी नहीं कर पाएंगे. हम लोगों को काफी आर्थिक क्षति हुई है.

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बहरहाल स्थानीय प्रशाशन फौरी तौर पर बाढ़ पीड़ितों की मदद जरूर कर रहा है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि उन लोगों का क्या होगा जिनका इस बाढ़ में सब तबाह हो गया है और जिन्होंने इस साल अपनी बहन और बेटियों के हाथ पीले करने का सपना देखा था.

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