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जौहर यूनिवर्सिटी का क्या है पूरा विवाद, जिसकी जमीन पर अब सरकार का है कंट्रोल

जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन के लिए दोपहर तीन बजे तहसीलदार सदर प्रमोद कुमार के नेतृत्व में टीम पहुंची. तहसीलदार ने जौहर यूनिवर्सिटी के कुलपति सुल्तान मुहम्मद खां से बात की.

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आजम खान की युनिवर्सिटी का कैंपस
आजम खान की युनिवर्सिटी का कैंपस
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आजम के विश्वविद्यालय की जमीन पर सरकार का कब्जा
  • मौलाना अली जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान हैं
  • क्या यूनिवर्सिटी को नियंत्रण में लेगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद से रामपुर सीट से सपा के सांसद आजम खान की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है. आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की पूरी जमीन को अब सरकार ने टेकओवर कर लिया है. गुरुवार को यूनिवर्सिटी पहुंची तहसील की टीम ने जमीन का कब्जा लेने के साथ ही आजम खान के मौलाना मुहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को बेदखल कर दिया. .  

जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन के लिए दोपहर तीन बजे तहसीलदार सदर प्रमोद कुमार के नेतृत्व में टीम पहुंची. तहसीलदार ने जौहर यूनिवर्सिटी के कुलपति सुल्तान मुहम्मद खां से बात की. उनसे दखलनामा पर हस्ताक्षर करने को कहा लेकिन उन्होंने खुद को मुलाजिम  बताते हुए हस्ताक्षर करने में असमर्थता जता दी. इस पर दो गवाहों और पुलिस की मौजूदगी में 173 एकड़ जमीन से कब्जा बेदखली की कार्रवाई की गई. 

आजम खान ने रामपुर में मौलाना अली जौहर के नाम पर अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी स्थापित की थी. यूनिवर्सिटी को संचालित मौलाना मुहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है. आजम खान इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं, जबकि उनकी पत्नी रामपुर शहर से विधायक डा. तंजीन फातिमा सचिव हैं. आजम खान ने जौहर यूनिवर्सिटी को बनाने के लिए तमाम जमीन अधिग्रहण किया गया था, जिसे लेकर विवाद शुरू से रहा है. 

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बता दें कि इसी साल जनवरी माह में ही तहसील प्रशासन ने ट्रस्ट को बेदखल करते हुए इस जमीन को शासन में निहित करा दिया था. तब अपर जिलाधिकारी जगदंबा प्रसाद गुप्ता की अदालत ने इस जमीन को सरकार में निहित करने के आदेश दिए थे. इसके विरोध में जौहर ट्रस्ट हाईकोर्ट चला गया, लेकिन छह सितंबर को कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने प्रशासन के फैसले को सही ठहराया. इसके बाद ही तहसील प्रशासन ने बेदखली की कार्रवाई की है. 

ट्रस्ट ने किया शर्तों का उल्लंघन
 

जौहर यूनिवर्सिटी को मौलाना मुहम्मद अली जौहर ट्रस्ट संचालित करता है और यह अल्पसंख्यक संस्थान है. प्रदेश सरकार ने 2005 में जौहर ट्रस्ट को 12.50 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदने की अनुमति दी थी, तब कुछ शर्तें भी लगाई थीं. ट्रस्ट ने तब कहा था कि वह गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दिलाएगी और चैरिटी का कार्य करेगी लेकिन, इन शर्तों का अनुपालन न करने का आरोप लगाते हुए बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर दी. 

बीजेपी नेता की शिकायत पर यूपी शासन के आदेश पर रामपुर प्रशासन ने जांच कराई तो शर्तों के उल्लंघन की बात सही पाई. जौहर ट्रस्ट को हर वर्ष एक अप्रैल को जिलाधिकारी को प्रगति रिपोर्ट देनी होती है लेकिन इस बीच ट्रस्ट ने कोई रिपोर्ट नहीं दी. ट्रस्ट के नाम पर खरीदी गई जमीनों की खरीद-फरोख्त में भी नियमों का उल्लंघन किया गया. इसके बाद अपर जिला अधिकारी प्रशासन की ओर से अदालत में मुकदमा दायर किया गया था. 

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जमीन को लेकर विवाद 

आजम खान की यूनिवर्सिटी की जमीन पर आरोप लगा था कि शत्रु संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बताकर कब्जा किया गया है. चकरोड की जमीन की अदला-बदली करने में भी अनियमितता मिली,. इसी तरह कोसी नदी क्षेत्र की जमीन का आवंटन गलत तरीके से कराया. इसके अलावा अनुसूचित जाति के लोगों की 101 बीघा जमीन बिना अनुमति के खरीद ली गई थी. 

जिला शासकीय अधिवक्ता अजय तिवारी ने कोर्ट को बताया था कि अनुसूचित जाति के लोगों की 12.50 एकड़ जमीन बिना अनुमति के खरीदी गई थी. इस कारण योगी सरकार ने पहले ही इसे वापस ले लिया था. इसी तरह 26 किसानों की भी करीब तीन एकड़ जमीन पर कब्जा था, जिसे सरकार ने उनकी जमीन पर भी प्रशासन की मदद से कब्जा वापस दिला दिया था. 

यूनिवर्सिटी को नियंत्रण में लेगी सरकार

जौहर यूनिवर्सिटी के पास करीब 265 एकड़ जमीन थी लेकिन, अब 12.50 एकड़ ही बची है. यह जमीन भी यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर बताई जा रही है. यह जमीन ट्रस्ट ने सबसे पहले खरीदी थी, इसलिए इसे ट्रस्ट के कब्जे में छोड़ा गया है, बाकी जमीन सरकार के पास आ गई है. यूनिवर्सिटी के पास महज 12.50 एकड़ जमीन बची है, जबकि नियमानुसार 50 एकड़ चाहिए. यही कारण है, योगी सरकार इसे अपने नियंत्रण में लेने की तैयारी में है. इसके लिए प्रशासन ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है. 

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