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आसाराम को बचाने के लिए पीड़िता को बनाया बालिग

आसाराम पर रेप का आरोप लगाने वाली बालिका को बालिग साबित करने की कोशिश पहले भी हो चुकी है. अब लंबे समय बाद जोधपुर पुलिस को बीजेपी के पूर्व सांसद स्वामी चिन्मयानंद के श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ से जन्म-तिथि का जो प्रमाण पत्र सौंपा गया है, उसे पीड़ित लड़की के पिता ने फर्जी बताया है.

आसाराम आसाराम

आसाराम पर रेप का आरोप लगाने वाली बालिका को बालिग साबित करने की कोशिश पहले भी हो चुकी है. अब लंबे समय बाद जोधपुर पुलिस को बीजेपी के पूर्व सांसद स्वामी चिन्मयानंद के श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ से जन्म-तिथि का जो प्रमाण पत्र सौंपा गया है, उसे पीड़ित लड़की के पिता ने फर्जी बताया है.

पिता का आरोप है कि आसाराम को बचाने के लिए मुमुक्ष विद्यापीठ से हुई डील के चलते ही स्कूल वालों ने खुद प्रमाण पत्र जोधपुर पुलिस के हवाले किया है. पिछले अगस्त में शाहजहांपुर की रहने वाली लड़की से रेप का मामला सामने आने पर आसाराम पर पॉक्सो एक्ट के जरिए कानूनी शिकंजा कसा गया था. यह एक्ट नाबालिग के साथ दुराचार होने पर लगता है.

पिछले अक्टूबर-नवंबर में आसाराम के गुर्गे पीडि़ता की जन्म-तिथि संबंधी फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने की जुगत में लग गए थे. आसाराम के गुर्गे नगरपालिका परिषद और उस स्कूल के प्रधानाचार्य पर काफी दबाव डलवाते रहे, जहां पीड़िता ने क्लास 5 तक शिक्षा पाई थी, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली. अब अचानक एक ऐसे स्कूल का नाम सामने आया, जिसमें लड़की ने नर्सरी से क्लास 1 तक पढ़ाई की थी.

पीड़िता के पिता की बात पर विश्वास किया जाए, तो इस मामले में 'डील' की गई है. आरोप है कि इसी 'डील' के चलते स्कूल की प्रधानाचार्य ने कॉलेज के लेटरपैड पर जन्मतिथि समेत लड़की का विवरण लिखकर जोधपुर पुलिस को उपलब्ध कराया है. इसकी तहकीकात करने के लिए जोधपुर पुलिस यहां पहुंची और उसने पीड़िता के आरंभिक स्कूल श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ से दस्तावेजों की फोटोकॉपी ली. पीडि़ता के पिता से भी पूछताछ की. जोधपुर पुलिस जांच-पड़ताल और पूछताछ से संतुष्ट नहीं है और कई दिनों से शहर में ही है.

पुलिस ने बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण कागजातों की फोटोकॉपी जुटाई है. उधर, लड़की के पिता का कहना है कि आरंभिक स्कूल में पढ़ाई का कोई मतलब नहीं था. चूंकि स्कूल नया-नया खुला था, इसीलिए उनकी बिटिया का नाम जबरदस्ती लिख लिया गया. वह तो अपने भाई के साथ यूं ही स्कूल जाती थी. उस समय उसकी उम्र भी प्रवेश लायक नहीं थी. स्कूल वालों ने ही उम्र बढ़ाकर उसका नाम लिख लिया था.

पीड़िता के पिता बताते हैं कि उनकी बेटी का नाम भी गलत लिखा गया था. बाद में शपथ पत्र लेकर उसे संशोधित किया गया. शपथ पत्र में जन्मतिथि का हवाला नहीं है. उधर, स्वामी चिन्मयानंद बताते हैं, 'हमने अपनी ओर से कोई जानकारी नहीं दी है. जोधपुर पुलिस खुद ही पता लगाकर यहां तक पहुंची. स्कूल की ओर से खुद जानकारी देने का आरोप असत्य और निराधार है.'

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