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'मस्जिद से धीरे-धीरे मंदिर के प्रतीक चिन्हों को हटाया जा रहा है', ज्ञानवापी विवाद के मुख्य पैरोकार का दावा

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर की जो सर्वे की जा रही है, उसमें मुख्य भूमिका वकील हरिशंकर जैन ने निभाई है. शनिवार को ज्ञानवापी परिसर के भीतर जाने से रोके जाने के बाद सर्वे बंद कर दिया गया. इसके बाद परिसर से बाहर निकले सीनियर वकील हरिशंकर जैन ने खुलकर आजतक से बात की.

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मुख्य पैरोकार हरिशंकर जैन. -फाइल फोटो मुख्य पैरोकार हरिशंकर जैन. -फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ज्ञानवापी के अंदर सर्वे होगा तो मंदिर के तमाम सबूत मिलेंगे: हरिशंकर जैन
  • सीनियर वकील ने कहा- ज्ञानवापी का धार्मिक स्वरूप हमेशा से मंदिर का रहा है

ज्ञानवापी परिसर में यह दूसरी बार सर्वे हो रहा है. पहली बार 1996 में हुआ था और उस दौरान भी कोर्ट के आदेश के बावजूद यह सर्वे पूरा नहीं हो पाया था लेकिन उसकी रिपोर्ट अदालत को दी गई थी. पिछले सर्वे में जितनी चीजें खासकर मंदिर से जुड़ी जो प्रतीक चिन्ह मिले थे, वह अब खत्म किए जा रहे हैं. धीरे-धीरे प्रतीक चिन्हों को तथाकथित मस्जिद से साफ किया गया है, ताकि मंदिर का चिन्ह नहीं दिखाई दे. यह मैं दावे के साथ कह सकता हूं. ये बातें ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के मुख्य पैरोकार और सीनियर वकील हरिशंकर जैन ने आजतक से खास बातचीत में कही.

हरिशंकर जैन ने दावा किया कि बाहर से किए गए इस सर्वे में भी हमें मंदिर के तमाम प्रतीक चिन्ह मिले हैं. दो बड़े-बड़े स्वास्तिक के चिन्ह ज्ञानवापी की दीवारों पर मिले हैं. इसके अलावा खंडित मूर्तियों के अवशेष मिले हैं. कई पत्थरों पर भगवान की उकेरी हुई प्रतिमाएं मिली हैं और साथ-साथ मंदिर का पूरा स्वरूप इसकी दीवार पर हमें मिला है.

ज्ञानवापी के अंदर सर्वे होगा तो मंदिर के तमाम सबूत मिलेंगे: हरिशंकर जैन

हरिशंकर जैन ने कहा कि जब ज्ञानवापी के भीतर सर्वे होगा तो मंदिर के तमाम साक्ष्य मिलेंगे, इसका हमें पूरा यकीन है. उन्होंने कहा कि हमें यह भी उम्मीद है कि हम इस बार इस सर्वे पूरा कर पाएंगे.

सीनियर वकील ने कहा कि हम इस बार अदालत में मजबूती से अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और हर हाल में बाबा विश्वेश्वरनाथ को मुक्त करा कर ही दम लेंगे. 

ज्ञानवापी का धार्मिक स्वरूप हमेशा से मंदिर का रहा है: हरिशंकर जैन 

जैन ने कहा कि एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी जिस 1991 के वरशिप एक्ट का हवाला दे रहे हैं. दरअसल वह जानते ही नहीं या फिर जानकर अनजान बन रहे हैं कि उस वरशिप एक्ट में किसी भी ढांचे की धार्मिक स्वरूप के छेड़छाड़ पर रोक लगाई गई है और ज्ञानवापी मस्जिद का धार्मिक स्वरूप हमेशा से मंदिर का रहा है.

1990 तक ज्ञानवापी के तहखाने में पूजा होती रही है. ज्ञानवापी के चारों तरफ देवी देवताओं की तब तक पूजा होती रही जब तक मुलायम सिंह के जमाने में इसे लोहे से नहीं घेर दिया गया. आज भी व्यास परिवार के पास ज्ञानवापी के नीचे जो मंदिर के तहखाने हैं या जो मूल मंदिर है, वहां पूजा पाठ का अधिकार भी उन्हीं के पास है.

1991 के वरशिप एक्ट के नाम पर हम अपने मंदिरों को लेने की लड़ाई नहीं छोड़ सकते हैं. हमारे एजेंडे में सिर्फ बाबा विश्वनाथ या ज्ञानवापी ही नहीं मथुरा भी है, कुतुब मीनार भी है, ताजमहल भी है और मध्यप्रदेश का भोजशाला भी है. उन्होंने कहा कि चाहे जितना वक्त लगे, हम यह लड़ाई लड़ते रहेंगे.

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