समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के यशगान के लिए तैयार किया गया गीत 'मन से हैं मुलायम और इरादे लोहा हैं' पार्टी कार्यक्रमों में लोकप्रियता बटोर रहा है. लेकिन इस गीत को लिखने वाले मुलायम सिंह यादव के शिक्षक 81 वर्षीय उदय प्रताप सिंह के लिए यह काम जीवन की सबसे कठिन चुनौतियों मे से एक था.
मुलायम सिंह पर अब तक दो दर्जन से अधिक गीत लिख जा चुके उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने लखनऊ स्थित अपने दफ्तर में 'इंडिया टुडे' से खास बातचीत में मुलायम पर लिखे गीतों से जुड़े पहलुओं को उजागर किया. सिंह बताते हैं, 'दो महीने पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुझे 1989 में अमेरिकी गायक बिली जोएल के बेहद लोकप्रिय गीत 'वी डिडंट स्टार्ट द फायर' की धुन सुनाई और इस पर गीत लिखने को कहा. यह मेरे लिए जीवन की सबसे कठिन चुनौती थी, क्योंकि मैंने कभी भी अंग्रेजी गीत की धुन पर हिंदी गाना नहीं लिखा था.' सिंह के मुताबिक अंग्रेजी गानों में केवल रिदम होता है और कविता नहीं होती. ऐसे में अंग्रेजी धुन पर कविता पिरोना बेहद कठिन काम था.
पुराने नेताओं का नाम डाल बिठाया धुन से तालमेल
उदय प्रताप सिंह बताते हैं 'मैंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सलाह दी कि वे इस काम को लोकप्रिय गीतकार गोपाल दास नीरज को सौंपें. वे इस काम को खूबसूरती के साथ अंजाम दे सकते हैं, लेकिन अखिलेश नहीं माने. एक महीने की मेहनत के बाद उदय प्रताप सिंह ने अंग्रेजी धुन पर 'मन से हैं मुलायम और इरादे लोहा हैं' लिख डाले जो इन दिनों पार्टी कार्यक्रमों में बेहद लोकप्रिय हो रहे हैं. सिंह बताते हैं कि मैंने गीत की शुरुआत में मुलायम से पहले के समाजवादी आंदोलन से जुड़े नेताओं के नाम शामिल कर धुन के साथ तालमेल बिठाया और उसके बाद सपा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र किया.
उदय प्रताप सिंह 1958 में जैन इंटर कॉलेज करहल, मैनपुरी में अंग्रेजी के शिक्षक थे. यहां इन्होंने मुलायम सिंह यादव को 12वीं कक्षा में अंग्रेजी पढ़ाई थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद मुलायम भी जैन इंटर कॉलेज में उदय प्रताप सिंह के साथी शिक्षक बने. उदय प्रताप सिंह बताते हैं, 'लोहिया जी ने जब अंग्रेजी हटाओ आंदोलन शुरू किया तब मैं और मुलायम ने एक साथ इसमें हिस्सा लिया था. यहीं से हमारा साथ शुरू हुआ जो अब तक बरकरार है.' उदय प्रताप ने मुलायम सिंह यादव पर पहला गीत 1984 में लिखा जब उन्होंने प्रदेश में क्रांति रथयात्रा शुरू की थी. इस गीत के बोल थे- 'केवल नेता नहीं मुलायम सिंह वह तो एक विचार है, जोर जुल्म की टक्कर में वह जन जन का हथियार है.'
इसके बाद कई मौकों में उदय प्रताप ने मुलायम के लिए गीत लिखे. 1996 में जब मुलायम ने तीसरे मोर्चे के गठन के सपने को हकीकत में बदलने में कामयाबी हासिल की तो उदय प्रताप सिंह ने उनके यशगान में लिखा, 'नाम मुलायम सिंह है लेकिन काम बड़ा फौलादी है, सब विपक्ष की बिखरी ताकत एक मंच पर ला दी है.' उदय प्रताप सिंह 1989 से 1996 तक मैनपुरी लोकसभा सीट से चुनाव जीत कर नवीं और दसवीं लोकसभा के सदस्य बने. इसके बाद जब मुलायम ने मैनपुरी को अपना संसदीय क्षेत्र चुना तो उदय प्रताप को राज्य सभा में जगह दी. पिछले वर्ष यूपी में सपा सरकार बनने के बाद मुलायम ने उदय प्रताप सिंह को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी थी.