गाजीपुर कांड में मारे गए पुलिस कॉन्स्टेबल का शव प्रतापगढ़ में रानीगंज थाना के लच्छीपुर गांव पहुंचा. इस बीच, पुलिस ने इस मामले में अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. 11 के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ है. निषाद पार्टी के कुछ नेता भी घेरे में हैं. पुलिस गाजीपुर के उस गांव पहुंची जहां भीड़ अराजक हो गई थी. पुलिस गांव के प्रधान अर्जुन कश्यप से पूछताछ करेगी.
इधर, गाजीपुर कांड की गूंज आज संसद तक पहुंच सकती है. बुलंदशहर के बाद गाजीपुर में पुलिसकर्मी की पीट-पीट कर हत्या की घटना पर सियासत गर्म है, और विपक्ष इस मसले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को घेरने में कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है.
गौरतलब है कि पहले बुलंदशहर और अब गाजीपुर. उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भीड़ के निशाने पर पुलिस आई है. भीड़ ने हेड कॉन्स्टेबल सुरेश प्रताप वत्स को पीट-पीट कर मार डाला. प्रधानमंत्री की रैली के बाद भीड़ ने गाजीपुर में ऐसा बवाल मचाया जिसका शोर लखनऊ से दिल्ली तक जा पहुंचा. आज संसद में भी इसकी गूंज सुनाई देगी.
प्रशासन के रवैये से परिजन नाराज
वहीं, सुरेश प्रताप वत्स की पत्नी प्रशासन से बेहद नाराज हैं. जब 'आजतक' ने उनसे सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, 'मैं बहुत तड़प रही हूं. मैं इतना तड़प रही हूं कि मैं अभी तक अपने पति का चेहरा नहीं देख पाई हूं. झूठ पर झूठ, धोखे पर धोखा, हम सब परेशान हो गए हैं. हम टूट गए हैं, लेकिन अब हम खड़े होंगे तो अपने बच्चों के लिए खड़े होंगे.'
क्या मरने के लिए आदमी पुलिस ज्वाइन करता है
सुरेश प्रताप के बेटे विनीत कुमार ने कहा कि उस दिन मम्मी से पिता जी की 4 बजे बात हुई थी और बहन से कह रहे थे कि 2 दिन बाद छुट्टी लेकर घर आएंगे. अब घर कैसे आएंगे? यहां के मुख्यमंत्री को सोचना चाहिए कि आदमी को मुआवजा मिल जाएगा, शहीद का दर्जा दे देंगे, इससे क्या होगा? आदमी पुलिस फोर्स क्या मरने के लिए ज्वाइन करता है? पुलिस वाले अगर अपनी सुरक्षा नहीं कर पा रहे तो दूसरों की सुरक्षा क्या करेंगे? मैं अपने पिता की जगह नहीं जाना चाहता. हम अकेले हैं, हमारी दो बहने हैं, मां हैं. अगर हमको भी कुछ हो जाएगा तो उनको कौन देखेगा, क्या मुख्यमंत्री जिम्मेदारी लेंगे?
संसद में उठ सकता है मुद्दा
पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत पर संसद के बाहर भी सियासत गर्म है. हर दल अपनी सुविधा के मुताबिक सिपाही की मौत पर राजनीति कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि यूपी सरकार ने कानून व्यवस्था को खराब कर दिया है. गाजीपुर विवाद को प्रशासन चाहता तो रोक सकता था. प्रधानमंत्री का कार्यक्रम था, वहां पर इतनी सुरक्षा थी, फिर भी यह हादसा हुआ.
पूर्व सीएम ने कहा कि जहां योगी जी कहते है कि ठोक दो.. तो कभी पुलिस को नहीं समझ नहीं आता कि किसको ठोके और कभी जनता को नहीं समझ आ रहा है कि किसे ठोके. दोनों कन्फ्यूज हैं. ट्रांस्फर से बचने के लिए पुलिस अधिकारी एन्कांउटर कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आंकड़े बता रहे हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था खराब हो गई है.
कानून पर सवाल उठाएं तो कैसे?
वहीं, इलाहाबाद से बीजेपी के सांसद श्यामा चरण गुप्ता को तो ये छोटी-मोटी घटना लगती है. उनका कहना है कि प्रयागराज में दो दिन पहले उनके ही रिश्तेदार को गोली मारी गई. लेकिन सरकार अपनी है तो कानून पर सवाल उठाएं तो कैसे? इस मामले में आरोपियों में निषाद पार्टी के भी कार्यकर्ता हैं, लेकिन हर किसी को सियासी नफे-नुकसान की ही फिक्र है.