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भारतीय राजनीति के औरंगजेब हैं अखिलेश यादव, पिता को जबरन बेदखल किया: लालजी प्रसाद निर्मल

डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि अखिलेश यादव भारतीय राजनीति के औरंगजेब हैं. जिसने अपने पिता मुलायम सिंह यादव को राजनीति से बेदखल कर उन्हें घर में बैठने के लिए मजबूर कर दिया. ऐसे मुगल शासक की विचारधारा के लोगों को प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी.

अखिलेश यादव पर लालजी प्रसाद निर्मल ने जमकर निशाना साधा (फाइल-पीटीआई) अखिलेश यादव पर लालजी प्रसाद निर्मल ने जमकर निशाना साधा (फाइल-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'अखिलेश राज में एक भी दलित विद्वान को नहीं मिला यश भारती'
  • 'विधानसभा चुनाव में दूर-दूर तक दिखाई नहीं पड़ेंगे अखिलेश'
  • वह केवल मुगल मानसिकता से काम करते हैंः लालजी प्रसाद

अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हमला करते हुए कहा कि अंबेडकर के मानने वालों से वह नफरत करते हैं. वह महज वोटबैंक के लिए समय-समय पर दिखावा करते रहते हैं. अखिलेश सरकार के दौर में 195 लोगों को यश भारती पुरस्कार दिया गया, लेकिन इनमें से एक भी दलित विद्वान नहीं था.

डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि अखिलेश यादव भारतीय राजनीति के औरंगजेब हैं. जिसने अपने पिता मुलायम सिंह यादव को राजनीति से बेदखल कर उन्हें घर में बैठने के लिए मजबूर कर दिया. ऐसे मुगल शासक की विचारधारा के लोगों को प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी. विधानसभा चुनाव में कहीं दूर-दूर तक अखिलेश यादव दिखाई नहीं पड़ेंगे.

एक भी दलित को यश भारती नहींः निर्मल

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लेकर डॉ. निर्मल ने आगे कहा कि अंबेडकर के मानने वालों से वह नफरत करते हैं. वह केवल वोटबैंक के लिए समय-समय पर दिखावा करते रहते हैं. अखिलेश सरकार में कुल 195 लोगों को यशभारती पुरस्कार दिए गए, इसमें से एक भी दलित विद्वान नहीं थे. यह दिखाता है कि वह केवल मुगल मानसिकता से काम करते हैं.

उन्होंने कहा कि कांशीराम उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी जो लखनऊ में है उसका नाम बदल कर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी कर दिया गया है, जबकि बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की पत्नी के नाम पर बने रमाबाई नगर जिले का नाम बदल कर कानपुर देहात कर दिया.

दलितों से लिया बदलाः निर्मल

डॉ. निर्मल ने अखिलेश यादव की राजनीति को परिवार और एक जाति विशेष की राजनीति बताया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी में दलितों का कोई स्थान नहीं है. उनकी पार्टी में अनुसूचित जाति मोर्चे का कोई अध्यक्ष तक नहीं है. यही हाल उनकी उत्तर प्रदेश की सरकार में भी था. दलितों की आवाज को दबा दिया जाता था. मायावती से निजी शत्रुता का बदला उन्होंने दलितों से लिया. दलितों से इतनी नफरत थी कि उन्होंने गैरदलितों को अनुसूचित जाति आयोग और वित्त निगम का अध्यक्ष तक बना दिया. 

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव तो अपना जन्मदिन तक देश में नहीं मनाते हैं. ऐसे नेताओं को हमारा गरीब, किसान, हाशिए का समाज हवाई नेता समझता है. वह दिन दूर नहीं, जब वह पूरे देश में कहीं से भी चुनाव नहीं जीत पाएंगे. वह चुनाव जीतने के लिए, ऐसा लोकसभा क्षेत्र चुनते हैं जहां उनके जातियों की संख्या सबसे अधिक हो, लेकिन उनका सजातीय समाज भी अब जान गया है कि वह वोट भले ही पूरे समाज का लेते हैं, लेकिन वह केवल परिवार की राजनीति करते हैं. सिर्फ परिवार का ही भला करते हैं. अब तो उनके परिवार में भी केवल 2 ही सांसद रह गए हैं.

अखिलेश पर हमला करते हुए डॉ. निर्मल ने कहा कि अब वक्त आ गया है, जब जातिवादी राजनीति और परिवारवादी पार्टियों को नकार दिया गया. फर्जी समाजवाद और फर्जी बहुजनवाद के खतरों से वे पूरे प्रदेश के दलित समाज को अवगत कराएंगे. समाजवाद और बहुजनवाद के नाम से दलितों-पिछड़ों को छलने वाले क्षेत्रिय दलों ने प्रदेश में जातिवाद को मजबूत कर आर्थिक साम्राज्य और परिवारवाद को बढ़ाने का काम किया.

 

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