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'सोनभद्र से हाथरस तक', प्रियंका गांधी के संघर्षों को हथियार बना यूपी में उतरेगी कांग्रेस, जानिए क्या है प्लान

कांग्रेस ने नए साल पर एक कैलेंडर तैयार किया है, जिसमें प्रियंका गांधी के सोनभद्र जाने से लेकर हाथरस में पीड़िता के परिवार से मिलने तक की तस्वीर लगाई गई है. प्रियंका की तस्वीर वाले इस 12 पेज के कैलेंडर को यूपी के घर-घर तक पहुंचाने का काम कांग्रेस नेताओं ने शुरू कर दिया है. इसके जरिए कांग्रेस संदेश देने के साथ-साथ सियासी समीकरण साधने की कवायद की है.

स्टोरी हाइलाइट्स
  • कांग्रेस यूपी के गांव-गांव में अपना आधार बढ़ाने में जुटी
  • प्रियंका गांधी की तस्वीरों वाले कैलेंडर घर-घर बटेगी पार्टी
  • कैलेंडर में हाथरस से लेकर सोनभद्र तक की तस्वीरें हैं

उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस ने सूबे के हर गांव और हर एक घर तक प्रियंका गांधी के संघर्षों को पहुंचाने की रणनीति अपनाई है. इसके लिए नए साल पर कांग्रेस ने एक कैलेंडर तैयार किया है, जिसमें प्रियंका गांधी के सोनभद्र जाने से लेकर हाथरस कांड की पीड़िता के परिवार से मिलने तक की तस्वीर लगाई गई है. प्रियंका की तस्वीर वाले इस कैलेंडर को घर-घर तक पहुंचाने का काम कांग्रेस नेताओं ने शुरू कर दिया है. 

यूपी में कांग्रेस पार्टी फिलहाल संगठन सृजन अभियान के जरिए अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने में लगी है. प्रदेश में न्याय पंचायत के अध्यक्षों और ब्लाक कांग्रेस कमेटी के गठन का काम बहुत तेजी से चल रहा है. इतना ही कांग्रेस के पदाधिकारी 3 जनवरी से अपने प्रभार वाले जिलों में प्रवास पर हैं. वहीं, अब प्रियंका गांधी के द्वारा भेजे गए कैलेंडरों को हर एक गांव और हर शहर तक पहुंचाने का काम भी शुरू हो गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस ने इस तस्वीर के जरिए सूबे के लोगों को राजनीतिक तौर पर एक संदेश देने की कोशिश की है कि हर एक मुद्दे पर प्रियंका गांधी उनके साथ खड़ी रही हैं.  

प्रियंका ने भेजा 10 लाख कैलेंडर
सूत्रों के मुताबिक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव प्रियंका गांधी ने 10 लाख कैलेंडर यूपी में भेजे हैं. नव वर्ष के इस कैलेंडर को हर गांव और शहर के सभी वार्डों तक वितरित करने का निर्देश पदाधिकारियों को दिए गए हैं. हर जिले और शहर कमेटी के लिए उसके आबादी के लिहाज से कैलेंडर दिए जा रहे हैं. इस कैलेंडर के जरिए कांग्रेस सूबे में हर एक गांव और घर तक पहुंचने की रणनीति बनाई है. 

प्रियंका के जनसंपर्क-संघर्षों की तस्वीरें
कांग्रेस द्वारा यूपी में भेजे गए कैलेंडर में प्रियंका गांधी के जनसंपर्कों और संघर्षों की तस्वीरों को ही रखा गया है. 12 पेज के इस नए साल के कैलेंडर में पहले पेज पर सोनभद्र के उभ्भा जनसंहार के बाद अपनी संवेदना व्यक्त करने पहुंचीं प्रियंका गांधी की तस्वीर आदिवासी महिलाओं के साथ छपी है. बता दें कि घटना के बाद सबसे पहले प्रियंका गांधी पीड़ितों से मिलने के लिए सोनभद्र पहुंची थी, जिसके बाद यह काफी बड़ा मुद्दा बन गया था और सीएम योगी को बाद में सोनभद्र जाना पड़ा था. 

कांग्रेस द्वारा जारी किया गया कैलेंडर

सोनभद्र ही नहीं बल्कि कैलेंडर में हाथरस में पीड़िता के मां से गले लगते महासचिव प्रियंका गांधी की तस्वीर छापी गई है. हाथरस जाते हुए रास्ते में पुलिसिया लाठीचार्ज से कार्यकर्ताओं को बचाते हुए भी महासचिव की तस्वीर को भी इस कैलेंडर में जगह दी गई है. इसके अलावा CAA-NRC के खिलाफ लगातार सड़कों पर संघर्ष करती रहीं प्रियंका की एक तस्वीर आज़मगढ़ जिले की भी है, जिसमें वे पीड़ित परिवार की एक बच्ची के आंसू पोंछती नजर आ रही हैं. 

राजनीतिक संदेश देने की कोशिश

कांग्रेस के इस कैलेंडर में अमेठी, रायबरेली, हरियाणा, झारखंड सहित यूपी में प्रियंका गांधी द्वारा किये गए जन संपर्कों की तस्वीरों भी जगह दी गई है. माना जा रहा है कि कांग्रेस ने प्रियंका गांधी की इन तस्वीरों से लगातार यह संदेश देने की कोशिश की है कि हर एक मुद्दे पर कांग्रेस मुखर रही है और जमीन पर उतकर उनके दुख-सुख में शामिल रही है. इसके जरिए संदेश ही नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरण भी साधने की कवायद की गई है. 

सोनभद्र और हाथरस पीड़ितों के साथ प्रियंका की तस्वीर लगातार दलित और आदिवासी समुदाय संदेश देती दिख रही है तो सीएए-एनआरसी की खिलाफ प्रियंका के उतरने वाली तस्वीरों को जगह देकर सूबे में मुस्लिम समुदाय को भी यह मैसेज दिया गय है कि कांग्रेस  पार्टी आपके साथ मजबूती के साथ खड़ी है. सीएए-एनआरसी के खिलाफ यूपी की तमाम विपक्षी पार्टियां खुलकर नहीं आई थीं. यूपी में सीएए-एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की जान चली गई थी. विरोध प्रदर्शन के दौर सार्वजानिक संपत्तियों को होने वाले नुकसान की भरपाई योगी सरकार ने प्रदर्शनकारियों से वसूले थे. ऐसे में प्रियंका गांधी ने बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, लखनऊ और आजमगढ़ जाकर लोगों से मुलाकात की थी,जिसका एक राजनीतिक संदेश गया था. 

 

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