केंद्र और राज्यों के बीच सियासी खींचतान कोई नई बात नहीं है. पर यूपी का यह मामला जरा हटके है. आने वाले दिनों में अखिलेश यादव सरकार व केंद्र सरकार के बीच ताजमहल को लेकर राजनीतिक बखेड़ा खड़ा हो सकता है. यूपी के शहरी विकास व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री आजम खान के एक बयान से विवाद पैदा होना तय माना जा रहा है.
दरअसल, आजम खान ने कहा है कि ताजमहल को यूपी वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित कर दी जानी चाहिए. बीते 13 नवंबर को आजम खान ने ताजमहल का चार्ज वक्फ बोर्ड को सौंप दिए जाने की वकालत की. आजम राज्य वक्फ बोर्ड के भी मंत्री हैं. उन्होंने लखनऊ में मुस्लिम नेताओं के साथ बैठक में ये बातें कहीं. इस मीटिंग में वक्फ बोर्ड के सदस्य भी मौजूद थे.
लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद राशिद फिरंगीमहल ने इसी बैठक में मांग की कि ताजमहल को पूरी तरह से मुसलमानों के लिए खोल दिया जाना चाहिए. मौलाना ने कहा, 'हमें दिन में 5 बार ताजमहल के अंदर इबादत करने की इजाजत दी जानी चाहिए.'
जहां तक सीएम अखिलेश यादव की बात है, उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि ताजमहल में एंट्री के लिए ई-टिकट की व्यवस्था की जानी चाहिए. उनकी शिकायत है कि घरेलू और विदेशी पर्यटकों को टिकट के लिए घंटों कतार में खड़ा होना पड़ता है.
बहरहाल, बयानों के जरिए विवाद खड़ा करना आजम खान की पुरानी फितरत रही है. देखना यह है कि ताजमहल को लेकर छिड़ा यह विवाद आगे और क्या-क्या रंग लाता है.