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एएमयू हॉस्टल ने फरमान वापस लिया, लड़कियां पहन सकेंगी अपनी मर्जी से कपड़े

अलीगढ़ मु्स्लिम यूनिवर्सिटी में पहले फरमान जारी किया गया कि लड़कियां परोपर ड्रेस में आएं, सलवार कमीज पहनें. जब यह खबर मीडिया मे आई तो प्रशासन ने तुरंत ये निर्देश वापस ले लिए. लेकिन लड़कों के संबंध में जारी किया गया प्रशासन का निर्देश अब भी ज्यों का त्यों है.

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एएमयू का फरमान
एएमयू का फरमान

अलीगढ़ मु्स्लिम यूनिवर्सिटी में पहले फरमान जारी किया गया कि लड़कियां परोपर ड्रेस में आएं, सलवार कमीज पहनें. जब यह खबर मीडिया मे आई तो प्रशासन ने तुरंत ये निर्देश वापस ले लिए. लेकिन लड़कों के संबंध में जारी किया गया प्रशासन का निर्देश अब भी ज्यों का त्यों है.

गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी ने हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के लिए हमेशा दुपट्टे के साथ सलवार-कमीज पहनने का फरमान जारी किया था. इसके अलावा लड़कों के लिए निर्देश था कि वे हॉस्टल में बाइक नहीं रख पाएंगे.

छात्राओं से कहा गया था कि वे केवल एक मोबाइल रख सकती हैं, जिसका नंबर उनके माता-पिता को पता होना ही चाहिए. उनके सिनेमा, रेस्तरां और होटल जाने पर भी रोक लगाई गई थी. इन सब पाबंदियों की सूचना 6 हॉस्टलों के नोटिस-बोर्ड पर भी दी गई थी. इन हॉस्टलों में करीब 1300 छात्राएं रहती हैं.

इसके बाद छात्राओं ने विरोध जताया और खबर मीडिया तक पहुंच गई. बाद में यूनिवर्सिटी की प्रोवोस्ट गजाला परवीन ने बताया कि उन्हें लगा कि स्टूडेंट्स को उन निर्देशों पर ऐतराज है, ऐसे में लड़कियों से संबंधित तमाम निर्देश वापस ले लिए गए हैं. लेकिन प्रशासन ने अभी तक लड़कों की बाइक के बारे में निर्देश वापस नहीं लिया है. इसके पीछे दलील दी गई है कि बाहरी तत्व यहां आते हैं और अप्रिय घटना को अंजाम देने के बाद बाइक से भाग जाते हैं. इसलिए हॉस्टल में बाइक रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

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अप्रैल में ही एएमयू के वीसी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह ने छात्रों को निर्देश दिया था कि अगर कोई छात्र उनसे मिलना चाहता है तो उसे शेरवानी पहनकर आना होगा. छात्राओं से भी कहा गया था कि वे मिलने आएंगी तो उन्हें भी सांस्कृतिक परिधान में आना होगा.

नोटिस के मुताबिक, अगर छात्राएं नए नियम का पालन नहीं करती हैं तो उन्हें 500 रुपए का जुर्माना भरना होगा. अब्दुल्ला हॉल रेजिडेंट्स की छात्राओं को शुक्रवार और रविवार को ही शॉपिंग करने और अभिभावकों से मिलने की इजाजत है. पुरुष उनसे सिर्फ निर्धारित दिन ही मिल सकते हैं और उन्हें हॉस्टल कैंपस में नहीं लाया जा सकता.

अब्दुल्ला हॉ़ल की प्रोवोस्ट डॉ. परवीन इसे दकियानूसी नहीं मानतीं. उनके मुताबिक, सावधानी और किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए एहतियातन ये कदम उठाए गए हैं. उन्होंने कहा, 'ड्रेस कोड अभद्र घटनाओं से बचने के लिए है. सिर्फ एक मोबाइल का नियम बॉयफ्रेंड से बातचीत रोकने के लिए किया गया है. अगर किसी को मौज मस्ती में रहना पसंद है तो यहां से जा सकता है.'

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