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जानिए उस अस्पताल की हकीकत, जहां पिता के कंधे पर ही 12 साल के अंश ने दम तोड़ दिया

ऐसा नहीं है कि हैलेट अस्पताल ने कोई पहली बार अपना अमानवीय चेहरा दिखाया हो, इससे पहले करीब ढाई साल पहले भी हुए एक घटना ने इस अस्पताल का ऐसा अमानवीय चेहरा दिखाया दिखाया जिससे मानवता ही शर्मसार हो गई थी.

वक्त पर इलाज न मिलने के चलते 12 साल के अंश ने पिता के कंधे पर ही दम तोड़ दिया था वक्त पर इलाज न मिलने के चलते 12 साल के अंश ने पिता के कंधे पर ही दम तोड़ दिया था

कानपुर का सबसे बड़ा अस्पताल हैलेट. अस्पताल इतना बड़ा कि आसपास के 6 जिलों के लोग यहां इलाज को आते हैं लेकिन अब लोग हैलेट की बजाय इसे हेल यानी नर्क कहने में भी नहीं हिचकते. बीते शुक्रवार को जिस तरह से एक पिता अपने बीमार बच्चे को कंधे पर लटकाए, इलाज के लिए वार्ड के चक्कर लगाता रहा और आखिरकार उसकी मौत हो गई, इस घटना के बाद से तो इस अस्पताल को लोग हैलेट के बजाय हेल की संज्ञा देने लगे हैं.

ऐसा नहीं है कि हैलेट अस्पताल ने कोई पहली बार अपना अमानवीय चेहरा दिखाया हो, इससे पहले करीब ढाई साल पहले भी हुए एक घटना ने इस अस्पताल का ऐसा अमानवीय चेहरा दिखाया दिखाया जिससे मानवता ही शर्मसार हो गई थी. उस वाक्ये में एक पैर कटी महिला को जब कोई लेने नहीं आया और अस्पताल में उसके सड़े जख्मों से बदबू आने लगी तो यहां के कुछ डॉक्टरों ने मिलकर उसे झाड़ी में फिकवा दिया था. लोग आज भी अस्पताल के उस अमानवीय कृत्य को नहीं भूल पाए हैं.

अंश की मौत से शर्मसार हुआ अस्पताल
अगर ताजा मामले की बात करें तो कंधे पर बीमार बेटे अंश को टांगे और बच्चा वार्ड की तरफ भागते दृश्य को जिसने भी देखा वो अपने आंसू शायद ही रोक पाया हो लेकिन इस अस्पताल में सिस्टम ठीक हो जाए ये हो नहीं सकता. अभी अंश के मौत की जांच जारी है, इसी बीच आ जतक की टीम ने इस अस्पताल का जायजा लिया तो बेबस मरीजो की कई बानगी सामने आ गई. हमने जब हैलेट हॉस्पिटल के वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से इसकी हकीकत जानने की कोशिश की तो यह समझने में देर नहीं लगी की हैलेट अस्पताल सिर्फ नाम का ही सरकारी है यहां तो दवा से लेकर पट्टी तक मरीजों को बाहर से लानी पड़ती हैं.

अस्पताल के वार्ड पांच में हाथ और टूटे जबड़े के साथ विनय 29 अगस्त को भर्ती हुआ था. विनय के पिता जय नारायण का आरोप है वह औरैया से हैलेट सिर्फ इसलिए इलाज कराने आया था कि‍ यहां सरकारी सुविधा मिलेगी लेकिन यहां तो दवा से लेकर पट्टी तक हमसे बाहर से मंगवाई जाती है. टेस्ट भी सब बाहर से करवाए जाते हैं. इसी तरह वार्ड छह में भर्ती ओंकार सिंह के बेटे दिग्विजय ने आरोप लगाया की उसके पिता के ऑपरेशन के बाद टांके खुल गए. पिता महीने भर से भर्ती है लेकिन अब कोई डॉक्टर उनको देखता तक नहीं है. फोन करो तो डॉक्टर मारने को तैयार हो जाते हैं. अब तक दो लाख खर्च हो चुके हैं.

अब अस्पताल प्रशासन दे रहा है सफाई
अंश की मौत के बाद अस्पताल पर उंगली उठी तो प्रशासन भी बदलने मे जुटा है. कानपुर डीएम अपने सारे सम्बन्धित विभागों को लेकर हैलेट हॉस्पिटल का दिनभर मुआयना करते रहे. पुलिस प्रशासन के साथ हैलेट के अंदर सालों से काबिज लोगों को एक हफ्ते में हटाने की तैयारी भी कर डाली. आलम यह था कि‍ स्टेचर को लेकर मचे बवाल पर डीएम कौशलराज शर्मा यह तक सफाई देने लगे की हमने हॉस्पिटल में स्ट्रेचरों की व्यवस्था करा दी है, जिसको न मिले वह मेरे साथ चलकर अभी स्ट्रेचर ले ले. डीएम ने अंश के मामले में कहा की हमने जांच पूरी कर ली है. शाम को इसकी रिपोर्ट आ जाएगी, जिसके बाद दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी और आगे से ऐसा न हो इसकी पूरी व्यवस्था है.

अस्पताल के सीएमओ सस्पेंड
आज तक रिपोर्ट के बाद न सिर्फ दो सदस्यीय जांच कमिटी बनी बल्कि अस्पताल के सीएमओ को सस्पेंड किया गया. जब जांच टीम हमने बात की तो एड‍िशनल सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि परिवार ने कहा कि अस्पताल की लापरवाही की वजह से बच्चे की जान गई. जबकि अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक बच्चा जब अस्पताल पहुंचा तो वो मृत था. ऐसे सभी पहलुओं पर जांच चल रही है. जांच में शामिल एड‍िशनल चीफ मेड‍िकल ऑफिसर ने माना कि सिस्टम मे गडबड़ी है और जांच में सब सामने आ जाएगा.

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